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जिला अस्पताल में भर्ती होना हो तो घर से पंखा लाएं
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लीड
गर्मी में इलाज मुश्किल
जिला अस्पताल की महिला वार्ड में फूलन ने बताया कि पंखा लगा था, अब वह खराब हो गया है। कई दिनों से जब गर्मी से राहत नहीं मिली तो मजबूरी में घर से पंखा लाई हूं। अस्पताल के हालात तो बहुत खराब है। गर्मी में इलाज कराने में बहुत दिक्कतें आ रही है।
दूर लगे है पंखे
जिला अस्पताल के इमरजेंसी में दिखावे के लिए पंखा, कूलर व एसी तक लगे है। लेकिन इस समय जब मरीजों को इनकी जरूरत है तो वह दिखावा बनकर रह गए है। इमरजेंसी के बेड सात व आठ नंबर पर हवा का कोई इंतजाम नहीं है। पंखों की दूरी अधिक होने के कारण सभी बेडों पर हवा नहीं पहुंच रही है। मरीज घर से पंखा लाए हैं।
गर्मी में हाल बेहाल
जिला अस्पताल का मेडिकल वार्ड हर समय फुल रहता है। यहां पर अतिरिक्त बेड डाल दिए गए है। इसकी वजह से अधिक मरीज भर्ती हैं, उस पर सुस्त रफ्तार से चलते पंखों से मरीज परेशान हो रहे हैं। एक पंखा दो से तीन बेड को कवर कर रहा है। इसकी वजह से सभी मरीजों को हवा मिलना मुश्किल हो रही है।
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सीतापुर। जिला अस्पताल में भर्ती मरीज गर्मी से बेहाल हैं। अस्पताल में जरूरत के मुताबिक पंखे नहीं है। एक पंखा दो से तीन बेड कवर कर रहा है। पंखों की दूरी अधिक व स्पीड कम होने से मरीज गर्मी में बिलबिला रहे हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी से कई पंखे खराब हैं। इससे मरीज अपने घर से पंखा लाने को मजबूर हैं।
जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड, मेडिकल बी वार्ड, महिला वार्ड व इमरजेंसी में मरीज भर्ती किए जाते हैं। ओपीडी खुलने व कोविड के मरीज कम पड़ने से सभी वार्ड मरीजों से फुल हैं। जिला अस्पताल में इस समय करीब दो सौ मरीज भर्ती हैं। जब गर्मी का पारा बढ़ रहा है तो अस्पताल में भर्ती मरीजों की समस्या भी दोगुनी हो रही है। एक तो बीमारी व दूसरी गर्मी से निजात पाने की दोहरी समस्या मुसीबत पैदा कर रही है।
अगर मेडिकल वार्ड की बात की जाए तो इसमें एक बेड के ऊपर लगा हुआ पंखा दो से तीन बेड को हवा देता है। एक बेड से दूसरे बेड की दूरी अधिक होने से मरीजों को हवा मिलना मुश्किल होती है। अगर पंखा तेज स्पीड में चले तो भले ही कुछ राहत मरीजों को मिल जाए। लेकिन इन पंखों की स्पीड भी कम है। इससे एक पंखा केवल एक बेड कवर कर पा रहा है। कई पंखे खराब पड़े है।
जब मरीजों को पंखे से राहत नहीं मिली तो उनके परिजन घर से पंखा ले आए है। वह अपने मरीज को उस पंखे से हवा दे रहे है। यह हालात एक-दो मरीजों के नहीं बल्कि अस्पताल में भर्ती तमाम मरीजों के बने हुए है। यहां तक की इमरजेंसी में एसी, कूलर व पंखा सब दिखावा बनकर रह गए है। मरीज अपने पंखे से हवा लेने को मजबूर हो रहे है।
जिला अस्पताल में पंखे लगे हुए है। जो पंखे खराब हैं, उन्हें बनवाया जा रहा है। जरूरत पड़ी तो नए पंखे भी लगवाए जाएंगे।
- डॉ. अनिल अग्रवाल, सीएमएस, जिला अस्पताल
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गर्मी में इलाज मुश्किल
जिला अस्पताल की महिला वार्ड में फूलन ने बताया कि पंखा लगा था, अब वह खराब हो गया है। कई दिनों से जब गर्मी से राहत नहीं मिली तो मजबूरी में घर से पंखा लाई हूं। अस्पताल के हालात तो बहुत खराब है। गर्मी में इलाज कराने में बहुत दिक्कतें आ रही है।
दूर लगे है पंखे
जिला अस्पताल के इमरजेंसी में दिखावे के लिए पंखा, कूलर व एसी तक लगे है। लेकिन इस समय जब मरीजों को इनकी जरूरत है तो वह दिखावा बनकर रह गए है। इमरजेंसी के बेड सात व आठ नंबर पर हवा का कोई इंतजाम नहीं है। पंखों की दूरी अधिक होने के कारण सभी बेडों पर हवा नहीं पहुंच रही है। मरीज घर से पंखा लाए हैं।
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गर्मी में हाल बेहाल
जिला अस्पताल का मेडिकल वार्ड हर समय फुल रहता है। यहां पर अतिरिक्त बेड डाल दिए गए है। इसकी वजह से अधिक मरीज भर्ती हैं, उस पर सुस्त रफ्तार से चलते पंखों से मरीज परेशान हो रहे हैं। एक पंखा दो से तीन बेड को कवर कर रहा है। इसकी वजह से सभी मरीजों को हवा मिलना मुश्किल हो रही है।
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सीतापुर। जिला अस्पताल में भर्ती मरीज गर्मी से बेहाल हैं। अस्पताल में जरूरत के मुताबिक पंखे नहीं है। एक पंखा दो से तीन बेड कवर कर रहा है। पंखों की दूरी अधिक व स्पीड कम होने से मरीज गर्मी में बिलबिला रहे हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी से कई पंखे खराब हैं। इससे मरीज अपने घर से पंखा लाने को मजबूर हैं।
जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड, मेडिकल बी वार्ड, महिला वार्ड व इमरजेंसी में मरीज भर्ती किए जाते हैं। ओपीडी खुलने व कोविड के मरीज कम पड़ने से सभी वार्ड मरीजों से फुल हैं। जिला अस्पताल में इस समय करीब दो सौ मरीज भर्ती हैं। जब गर्मी का पारा बढ़ रहा है तो अस्पताल में भर्ती मरीजों की समस्या भी दोगुनी हो रही है। एक तो बीमारी व दूसरी गर्मी से निजात पाने की दोहरी समस्या मुसीबत पैदा कर रही है।
अगर मेडिकल वार्ड की बात की जाए तो इसमें एक बेड के ऊपर लगा हुआ पंखा दो से तीन बेड को हवा देता है। एक बेड से दूसरे बेड की दूरी अधिक होने से मरीजों को हवा मिलना मुश्किल होती है। अगर पंखा तेज स्पीड में चले तो भले ही कुछ राहत मरीजों को मिल जाए। लेकिन इन पंखों की स्पीड भी कम है। इससे एक पंखा केवल एक बेड कवर कर पा रहा है। कई पंखे खराब पड़े है।
जब मरीजों को पंखे से राहत नहीं मिली तो उनके परिजन घर से पंखा ले आए है। वह अपने मरीज को उस पंखे से हवा दे रहे है। यह हालात एक-दो मरीजों के नहीं बल्कि अस्पताल में भर्ती तमाम मरीजों के बने हुए है। यहां तक की इमरजेंसी में एसी, कूलर व पंखा सब दिखावा बनकर रह गए है। मरीज अपने पंखे से हवा लेने को मजबूर हो रहे है।
जिला अस्पताल में पंखे लगे हुए है। जो पंखे खराब हैं, उन्हें बनवाया जा रहा है। जरूरत पड़ी तो नए पंखे भी लगवाए जाएंगे।
- डॉ. अनिल अग्रवाल, सीएमएस, जिला अस्पताल