फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Hindi sabha pride of sitapur

हिंदी सभा सीतापुर की अनूठी धरोहरः नाईक

Fri, 30 Oct 2015 10:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर Updated Fri, 30 Oct 2015 10:39 PM IST
विज्ञापन

राज्यपाल राम नाईक ने कहा है कि हिंदी सभा सीतापुर की अनूठी धरोहर व देश का गौरव है। भारत ही नहीं बल्कि विदेशों तक में हिंदी बोली जाती है। यह राष्ट्रभाषा के साथ ही संपर्क भाषा भी है।

विज्ञापन


भाषा में अभिव्यक्ति की क्षमता होती है और हिंदी में यह क्षमता बेजोड़ ढंग से विद्यमान है। इसीलिए हिंदी भाषा की अपनी अलग गरिमा है। वह शुक्रवार को लालबाग (शहीद) उद्यान में हिंदी सभा के हीरक जयंती अधिवेशन में मुख्य अतिथि के तौर परबोल रहे थे।
विज्ञापन


राज्यपाल ने कहा, हिंदी को संपर्क भाषा बनाने का श्रेय पुरुषोत्तम दास टंडन को जाता है। तो देश-विदेश में विस्तार का श्रेय सिने जगत को। आज व्यापार, प्रशासन में हिंदी की उपयोगिता बढ़ी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कंप्यूटर सहित सोशल मीडिया में भी इसे बढ़ावा मिलना चाहिए। 25 विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति होने के नाते हिंदी को बढ़ावा देने का मेरा प्रयास जारी है। कहा कि प्रदेश अपने में कई सांस्कृतिक व ऐतिहासिक परंपरा संजोए है।

संस्कृति व ऐतिहासिकता को करीब से देखने व समझने की मेरी प्रबल इच्छा है, लेकिन अभी तक 45 जिलों का ही भ्रमण कर सका हूं। बोले, यहां की धरती पर कलकल करता गंगा-जमुना का पानी व सांस्कृतिक दर्शन अलौकिक है।

ऐसी परंपरा पूरे देश में कहीं भी देखने को नहीं मिलती। इस मौके पर उन्होंने हिंदी सभा के ग्रंथ और पाक्षिक पत्र का विमोचन किया। समारोह में मुख्य रूप से सांसद राजेश वर्मा, जिलाधिकारी डॉ. इंद्रवीर सिंह, हिंदी सभा के अध्यक्ष डॉ. रमेश मंगल बाजपेयी, डॉ. रचना भारतीय, डॉ. राजकिशोर टंडन आदि रहे।

ऐतिहासिक उद्यान आकर हूं गौरवान्वित
माइक संभालते ही राज्यपाल बोले, शहर का लालबाग (शहीद) उद्यान एक ऐसा ऐतिहासिक शौर्य स्थल है, जहां 1922 में मोतीलाल नेहरू, 1925 में महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, अलीबंधु व डॉ. सैयद महमूद तथा 1940 में नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने क्रांतिकारी भाषण दिया था।

इसी ऐतिहासिक-उद्यान में 1930 में ‘नमक का कानून’ तोड़ा गया और 1942 में गांधी जी के ‘करो या मरो’ आंदोलन के तहत जनपद के अनेक आंदोलनकारी ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीति के शिकार हुए। एक और जलियांवाला बाग कांड की पुनरावृत्ति इसी उद्यान में हुई। ऐसी शौर्य व ऐतिहासिक धरती पर आने तथा विचार व्यक्त कर मैं गौरवान्वित हो गया।


धूप में खड़े होकर दिया भाषण
राज्यपाल जब बोलने के लिए खडे़ हुए मंच पर तेज धूप हो गई। सुरक्षा अधिकारी ने माइक को छाया में करने की बात कही तो राज्यपाल ने मना कर दिया और कहा जब हिंदी प्रेमी धूप में बैठकर मेरी बात सुन सकते हैं तो मैं बोल क्यों नहीं सकता। इसके बाद करीब 25 मिनट तक धूप में ही राज्यपाल ने अपने विचार व्यक्त किए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed