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संतों की नगरी में होता ऊर्जा का संचार : राम नाईक
Amarujala Bureau
Updated Tue, 10 Jan 2017 11:09 PM IST
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राज्यपाल राम नाईक
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राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि नैमिष तीर्थ आदिकाल से ही आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं धर्म का प्रमुख केंद्र रहा है। संतों की इस नगरी में आने से विशेष ऊर्जा का संचार महसूस करता हूं। वह मंगलवार को नैमिष के कालीपीठ संस्थान में महाराष्ट्र के भक्तों द्वारा आयोजित हरिनाम सत्संग ज्ञानेश्वरी पारायण में शामिल होने आए थे।
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मंगलवार दोपहर 12 बजे राज्यपाल हेलीकॉप्टर से नैमिष पहुंचे। यहां से वह सीधे कालीपीठ पहुंचे, जहां मराठी लोक परंपरा के अनुसार महाराष्ट्र से आए श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद राज्यपाल ने मां ललिता देवी मंदिर में दर्शन व पूजन किया। काली पीठ संस्थान में हुए समारोह में राज्यपाल ने अपनी लिखी पुस्तक ‘चरैवेती-चरैवेती’ का विमोचन भी किया।
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उन्होंने कहा कि मुझे 88 हजार ऋषियों की पावन तपोभूमि में तीसरी बार आने का सौभाग्य मिला है। कालीपीठ आकर ऐसा लग रहा है, कि जैसे में महाराष्ट्र में हूं। उन्होंने कहा कि मैं देश के सबसे बडे़ राज्य उत्तर प्रदेश का राज्यपाल हूं। इसकी जनसंख्या कुछ देशों से भी अधिक है। सांस्कृतिक विरासत के रूप में जहां आगरा, लखनऊ व सारनाथ प्रसिद्ध हैं।
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वहीं धार्मिक विरासत के दर्शन आज भी भगवान शिव की नगरी काशी, कृष्ण की नगरी मथुरा, प्रभु श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या व 88 हजार संतों की तपोभूमि नैमिषारण्य में मिल रहे हैं। नैमिषारण्य में आना और किसी धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होना गौरव की बात है।
उन्होंने कालीपीठ में ही स्थित प्राचीन यज्ञकुंड में आहुति दी। साथ ही महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत गोंदवलेकर व समर्थ स्वामी रामदास की मूर्ति पर माल्यार्पण किया। इसके बाद उन्होंने दक्षिण मुखी वरदानी हनुमान मंदिर में पूजन किया। समारोह में काली पीठाधीश गोपाल शास्त्री, समाजसेवी मुनींद्र अवस्थी, कालीपीठ संचालक भास्कर शास्त्री, मां ललिता देवी पुजारी पुजारी लाल बिहारी शास्त्री व आयोजन समिति सदस्य मौजूद रहे।