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खुले में फेंकीं ग्लूकोज की बोतलें

Sat, 09 Oct 2021 11:30 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 09 Oct 2021 11:30 PM IST
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glucose bottles thrown in the open
जिला अस्पताल में हड्डी वार्ड के पास पड़ी सील बंद ग्लूकोज की बोतलें। - संवाद - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। जिला अस्पताल में अभी दवाओं का संकट बना हुआ है। इसके बाद भी अस्पताल में जो दवाएं हैं, उनके उपयोग में लापरवाही बरती जा रही है। जिला अस्पताल में खुले में कई ग्लूकोज की सीलबंद बोतलें फर्श पर पड़ी मिली। इन पर उत्पादन व एक्सपायर्ड तिथि दिखाई नहीं दे रही थी। आखिर यह बोतलें यहां पर कैसे पहुंची। अगर सही थी तो इन्हें फेंका क्यों गया, अगर खराब थी तो इन्हें यहां पर फेंकने के बजाए सुरक्षित तरीके से नष्ट क्यों नहीं करवाया। इसका जवाब जिम्मेदार अफसर भी नहीं दे पा रहे है।
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जिला अस्पताल में मरीजों की काफी भीड़ उमड़ रही है। ढाई हजार के करीब ओपीडी में मरीज आ रहे हैं। इससे दवाओं की डिमांड बढ़ी है। भर्ती मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। भर्ती मरीजों को रोजाना ग्लूकोज की दो से तीन बोतलों की जरूरत पड़ रही है। अस्पताल प्रशासन इन बोतलों को सही तरीके से रखने व उपयोग करने में ही हीलाहवाली कर रहा है।
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अमर उजाला टीम ने जिला अस्पताल की रियलटी देखी तो अस्पताल के पिछले हिस्से में हड्डी वार्ड के सामने कुछ ग्लूकोज की बोतलें सीलबंद पड़ी हुई मिली। इनको एक बार भी उपयोग नहीं किया गया था। बोतलें सीलबंद के साथ ही पॉलीथिन में बंद थी।
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अस्पताल सूत्रों का मानना है कि अस्पताल प्रशासन द्वारा दवाओं के रखरखाव में लापरवाही बरती जा रही है। यह बोतलें मरीजों के उपयोग के लिए दी गई थी। लेकिन मरीजों को इनको चढ़ाया नहीं जा सका। जब अधिक दिन बीत गए तो इन्हें कूड़े में फेंक दिया गया। अगर सही से कर्मचारी जिम्मेदारी निभाते तो इन्हें किसी मरीज को चढ़ाया जा सकता था।
इससे पहले बच्चों की बांटी गई थी एक्सपायर्ड दवा
जिला अस्पताल में इससे पहले भी दवाओं को लेकर लापरवाही देखने को मिल चुकी है। करीब दो साल पहले बच्चों को बुखार की एक्सपायर्ड दवा बांट दी थी। जब मामला सुर्खियों में आया तो अस्पताल प्रशासन ने उस दवा के वितरण पर रोक लगा दी थी। उसके बाद शासन स्तर से इस मामले की जांच हुई थी। यह खुलासा एक मरीज द्वारा काउंटर से दवा लेने के बाद हुआ था। तब तक तमाम सीरप मरीजों तक पहुंच चुकी थी।
दस्तावेजों के रखरखाव के प्रति संजीदा नहीं जिम्मेदार
जिला अस्पताल में दवाओं के साथ ही अभिलेखों के रखरखाव में भी लापरवाही बरती जा रही है। जिला अस्पताल में इमरजेंसी गेट से सीएमएस कक्ष की तरफ बढ़ने पर एक कमरे में कपड़े के बंडलों में अभिलेख पड़े हुए मिले। इनका रखरखाव बेहद खराब दिखा। पूरे कमरे में तितर बितर तरीके से अभिलेख पड़े दिखाई दिए।

अगर मान भी लिया जाए कि यह अभिलेख उपयोग के लायक नहीं है, तो भी इनको सही तरीके से रखा जा सकता है। जिस कमरे में अभिलेख रखे थे, वहां पर चूहे घूम रहे थे। ऐसे में चूहे अभिलेखों को कुतर रहे थे। अस्पताल प्रशासन अभिलेखों को लेकर संजीदा नहीं दिख रहा है।
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