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दुर्गा पुरवा पर मंडराए संकट के बादल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 06 Aug 2016 10:54 PM IST
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जलस्तर बढ़ रहा है
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जिले के गांजर क्षेत्र में घाघरा का कहर जारी है। करीब चार गांवों को निगल चुकी नदी अब दुर्गा पुरवा गांव को निगलने के लिए बेताब नजर आ रही है। नदी दुर्गा पुरवा के निकट सड़क को काट रही है। शुक्रवार की रात आधी सड़क को नदी का पानी काट चुका था।
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करीब 12 बीघा खेती भी नदी में समा गई है। हालत यही रही तो दुर्गा पुरवा व कोनी का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट जाएगा। इन गांवों को पहुंचना मुश्किल साबित होगा। उधर, बाढ़गस्त इलाके में पानी कम हो रहा है। जिससे कई गांवों में संपर्क मार्ग खुल रहे हैं। हालांकि अभी बाढ़ की मुसीबत पूरी तरह टली नहीं है।
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गांजर का रेउसा इलाका बाढ़ की चपेट में है। घाघरा नदी निर्मल पुरवा समेत चार गांवों को निगल चुकी है। अब नदी ने दुर्गा पुरवा की तरफ रुख किया है। नदी बीच में पड़ने वाली सड़क को तेजी से काट रही है। करीब आधी सड़क को नदी निगल चुकी है।
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ग्रामीणों का कहना है कि नदी का कटान इसी रफ्तार से चलता रहा तो बहुत जल्द ही सड़क नदी में बह जाएगी। सबसे बड़ा खतरा तो अब इन गांवों में आने-जाने का है। यदि मार्ग कटा तो दुर्गा पुरवा व कोनी गांव का मुख्यालय से संपर्क टूट जाएगा। वहीं निर्मल पुरवा के कटान पीड़ित दुर्गा पुरवा में ही डेरा डाले हुए हैं।
अब इन लोगों पर फिर से कटान का खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन भी इस कटान के आगे बेबस नजर आ रहा है। पीड़ित सुरक्षित ठिकाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन उन लोगों को भूमि उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। कटान के कारण निर्मल पुरवा के निवासी रामपाल का तीन बीघा, भाई लाल तीन बीघा, संतोष, दिनेश व सुशील का छह बीघा खेत कटकर नदी में समा गया है।
ये ऐसे लोग हैं जिनका घर पहले ही कटान की भेंट चढ़ चुका है। ठेकेदार पुरवा, चौकी पुरवा, लालापुरवा, जिन्ना पुरवा, गोड़ियन पुरवा राजापुर, मुजेहना आदि गांवों के बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि उन्हें प्रशासन की तरफ से कोई राहत सामग्री नही दी गई है। हालत ये है कि यहां पर सरकारी नावें भी नहीं मिल रही हैं।
घरों में राशन खत्म हो चुका है, खाने को लाले पड़ रहे हैं। उधर, टापू पर बसे पचीसा गांव में भी घाघरा नदी कटान कर रही है। वहां बसे परिवार कटान को देखकर भयभीत हैं। यहां के अधिकांश परिवार अब टापू छोड़ने की बात कह रहे हैं। रामपुर मथुरा क्षेत्र की स्थिति रेउसा क्षेत्र से अलग नहीं है।
इस क्षेत्र में भी घाघरा नदी का जलस्तर कम हुआ है। लेकिन अंगरौरा, दुबे पुरवा आदि गांवों के निकट नदी का पानी तेजी से कटान कर रहा है। 48 गांवों में से करीब 20 गांवों से बाढ़ का पानी हट चुका है, अन्य गांवों में पानी आहिस्ता-आहिस्ता खिसक रहा है। उधर, शारदा व घाघरा बैराजों से 146682 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
अलग थलग पड़ सकता है कोनी गांव
घाघरा नदी इन दिनों जिस तरह से कटान कर रही है, उससे कोनी गांव के अलग थलग पड़ने के आसार हैं। जहां दुर्गा पुरवा के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है, वहीं कोनी का मुख्यालय से संपर्क टूटने के आसार हैं।