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वन विभाग की टीम पर किया हमला, वन दरोगा को पीटा
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महाराजनगर (सीतापुर)। सकरन थाना क्षेत्र में गुुरुवार रात पेड़ कटान की सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम पर लकड़ी काट रहे लोगों ने हमला बोल दिया। इस दौरान उन्होंने एक वन दरोगा को पीट दिया। इस मामले में पुलिस ने छह नामजद व 15 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज कर लिया है।
सकरन थाना क्षेत्र के कुटीपुरवा मजरा सुमरावां गांव निवासी बाबू के खेत में जामुन के चार, एक नीम व एक आम के पेड़ लगे थे। जिन्हें सुमरावां निवासी ठेकेदार विमलेश व गुलरबोझा गांव निवासी बृजलाल ने खरीदा था। रात में उन पेड़ों को काटा जा रहा था। इसकी सूचना किसी ने वन विभाग को दी। मौके पर वन विभाग की टीम और वन दरोगा नरेंद्र यादव पहुंचे।
इस दौरान लकड़ी काट रहे लोगोें ने टीम पर हमला कर दिया। ठेकेदार और उनके मजदूरों ने वन दरोगा को पीट दिया। सूचना पाकर मौके पर पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस को देख आरोपी मौके से भाग गए। घटना के बाद पीड़ित थाने पहुंचे और पुलिस को तहरीर दी। एसओ मुकेश वर्मा ने बताया कि तहरीर पर विमलेश, बृजलाल, महेश, दिलेराम समेत छह नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
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इनसेट
आखिर अलग से क्यों भेजनी पड़ी टीम
रेंजर अहमद कमाल सिद्दीकी ने बताया कि उनको लकड़ी कटान की सूचना मिली थी, इसलिए उन्होंने अलग टीम बनाकर भेजी थी। लेकिन उन्होंने अपने ही बीट दरोगा नरेंद्र वर्मा को इसकी जानकारी नहीं दी थी। फिर भी दरोगा को कहीं से कटान की जानकारी मिल गई। वह काफी देर तक वहां खड़े रहे। इसके बाद दबंगों ने हमला किया है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर रेंजर को अपने ही दरोगा पर विश्वास क्यों नहीं था।
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सकरन थाना क्षेत्र के कुटीपुरवा मजरा सुमरावां गांव निवासी बाबू के खेत में जामुन के चार, एक नीम व एक आम के पेड़ लगे थे। जिन्हें सुमरावां निवासी ठेकेदार विमलेश व गुलरबोझा गांव निवासी बृजलाल ने खरीदा था। रात में उन पेड़ों को काटा जा रहा था। इसकी सूचना किसी ने वन विभाग को दी। मौके पर वन विभाग की टीम और वन दरोगा नरेंद्र यादव पहुंचे।
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इस दौरान लकड़ी काट रहे लोगोें ने टीम पर हमला कर दिया। ठेकेदार और उनके मजदूरों ने वन दरोगा को पीट दिया। सूचना पाकर मौके पर पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस को देख आरोपी मौके से भाग गए। घटना के बाद पीड़ित थाने पहुंचे और पुलिस को तहरीर दी। एसओ मुकेश वर्मा ने बताया कि तहरीर पर विमलेश, बृजलाल, महेश, दिलेराम समेत छह नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
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आखिर अलग से क्यों भेजनी पड़ी टीम
रेंजर अहमद कमाल सिद्दीकी ने बताया कि उनको लकड़ी कटान की सूचना मिली थी, इसलिए उन्होंने अलग टीम बनाकर भेजी थी। लेकिन उन्होंने अपने ही बीट दरोगा नरेंद्र वर्मा को इसकी जानकारी नहीं दी थी। फिर भी दरोगा को कहीं से कटान की जानकारी मिल गई। वह काफी देर तक वहां खड़े रहे। इसके बाद दबंगों ने हमला किया है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर रेंजर को अपने ही दरोगा पर विश्वास क्यों नहीं था।