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15 गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा

Sat, 13 Jul 2019 11:39 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jul 2019 11:39 PM IST
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floods threaten 15 village
रेउसा (सीतापुर)। बैराजों से छोड़े गए करीब दो लाख क्यूसेक पानी और लगातार बारिश से घाघरा व शारदा नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। शनिवार को घाघरा के आबादी के करीब पहुंचने से ग्रामीण सहमे हुए हैं। तटवर्ती करीब 15 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। इन गांवों से महज 100 मीटर की दूरी पर घाघरा की लहरें हैं।
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पानी के बहाव ने लगभग 400 बीघा फसलों को जलमग्न कर दिया है। दो दिनों में 700 बीघा फसलें पानी में डूब चुकी हैं। जिले के गांजरी इलाके में घाघरा का उफान हर साल तबाही की नई इबारत लिख जाता है। सैकड़ों आशियानों व हजारों बीघा फसलें बाढ़ व कटान की भेंट चढ़ जाती हैं। बाढ़ व कटान गांजर के बाशिंदों की नियति बन चुकी है।
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शासन-प्रशासन बाढ़ व कटान के स्थायी रोकथाम को लेकर दावे तो खूब करता है लेकिन हालात जस के तस ही बने हुए हैं। मानसून आने के बाद लगातार होने वाली बारिश के साथ शारदा, घाघरा एवं बनबसा बैराजों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी से गांजर के हालात बिगड़ने लगे हैं। घाघरा व शारदा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
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शनिवार को फिर तीनों बैराजों से करीब दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। शनिवार को बिल्लरपुरवा गांव से महज 100 मीटर की दूरी पर घाघरा की लहरें हिलोरे मारती नजर आई। आबादी के लगातार करीब पहुंच रहे पानी के बहाव से दुर्गापुरवा, मरैली, परमेश्वर पुरवा, चौकी, मुंशी पुरवा, लोधपुरवा, कोनी, गार्गी पुरवा, लाला पुरवा, नगीना पुरवा, दरजिन रेती आदि करीब 15 तटवर्ती मजरों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
शनिवार को चौकी पुरवा के पुत्ती सेठ की पांच बीघा, पैकरमा की छह बीघा, पेशकार की सात बीघा, दुर्गा पुरवा के संतोष यादव की 10 बीघा, दिनेश की आठ बीघा, रामनरेश की 10 बीघा समेत करीब 400 बीघा फसलें जलमग्न हो गई। संभावित बाढ़ को लेकर इन गांवों के ग्रामीण खौफजदा हैं।
ऊंची जगहों पर ठिकाना बना रहे ग्रामीण
घाघरा के तटवर्ती गांव खानी हुसैनपुर निवासी मोहित राजभर, नगीना पुरवा के जमुना, गुड्डू व कालिया आदि शनिवार को सीतापुर-बहराइच हाईवे के किनारे झोपड़ी बनाने में जुटे थे। पूछने पर बोले हर साल घाघरा तबाही मचाती है। तब सड़क की यह पटरी ही शरणस्थली बनती है। कब कितने वक्त गांव में पानी घुस जाए, कुछ पता नहीं। इसलिए अभी से झोपड़ी बना लेंगे तो परिवार सहित यहां आसरा ले सकेंगे।
अब तक नहीं बन सकीं बाढ़ राहत चैकियां
बाढ़ का खतरा कई गांवों पर मंडराने लगा है। किसी भी समय उफनाई लहरें गांव में घुस सकती हैं। ग्रामीण बाढ़ की आशंका को देखते हुए ऊंची जगहों पर ठिकाना बनाने में जुट गए हैं। इसके बाद भी इलाके में कहीं भी प्रशासनिक तैयारियां नजर नहीं आ रही हैं। अब तक बाढ़ राहत चौकियों की स्थापना तक नहीं की जा सकी है।

हालात पर रखी जा रही है नजर
बिसवां तहसीलदार राजकुमार गुप्ता ने शनिवार को घाघरा के तटवर्ती इलाके का दौरा किया। उन्होंने बताया कि अभी बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं हैं। नदियों का जलस्तर अपने दायरे में है। इसके बाद भी क्षेत्र में लेखपालों को नजर रखने के लिए अलर्ट कर दिया गया है। बराबर नजर रखी जा रही है।
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