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नदियां उफनाने से 750 घरों में घुसा पानी
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रेउसा क्षेत्र में नदियों का जलस्तर बढ़ने पर नाव से सुरक्षित स्थान की ओर जाते ग्रामीण। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
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रेउसा/रामपुर मथुरा। सरयू व शारदा नदी के जलस्तर में वृद्धि के साथ बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। सरयू का पानी रविवार को 119.40 मीटर पर पहुंच गया। पिछले 24 घंटे में जलस्तर 20 सेमी. बढ़ गया है। यह खतरे के निशान से 40 सेमी. ऊपर है। करीब 60 गांवों के 750 घरों में बाढ़ का पानी भर गया है। इससे इन गांवों की लगभग 85 हजार आबादी प्रभावित है।
सैलाब के बीच फंसे कई परिवार भूखे रहने को मजबूर हैं। हजारों बीघा फसल बाढ़ के पानी में डूब गई है। प्रशासनिक अमला बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ राहत सामग्री प्रदान कर रहा है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की संख्या को देखते हुए मदद नाकाफी साबित हो रही है। रविवार को तीनों बैराजों से फिर पौने पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं। ब्लॉक रेउसा क्षेत्र में गुरगुजपुर-जंगल टपरी मार्ग व नकहिया पुलिया पानी के बहाव की जद में आ गई है। तटवर्ती इलाकों में निचली जगहों की ओर पानी का तेज बहाव नजर आ रहा है। गौलोक कोडर के जंगल टपरी, गार्गीपुरवा, आशाराम पुरवा, पासिनपुरवा, संबारी पुरवा, लोधपुरवा, मोदी नगर, आजाद नगर, नगीनापुरवा, सुंदर नगर, दर्जिनरेती, चौकीपुरवा, ताहपुर बजहा, मरेली, जैतहिया, दुर्गापुरवा, गौढी, परमेश्वरपुरवा, लालापुरवा, भिल्लरपुरवा, श्यामनगर व म्योडी छोलहा के श्रीरामपुरवा, भदम्मरपुरवा, धूसपुरवा समेत करीब 25 गांवों में घरों के भीतर पानी भर गया है।
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कई गांवों के मुख्य मार्ग बाढ़ की चपेट में आने से आवागमन ठप हो गया है। ब्लॉक रामपुर मथुरा क्षेत्र में तटबंध के पास फतेपुरवा में लगे मीटर गेज पर रविवार को सरयू का जलस्तर 119.40 मीटर दर्ज किया गया। लाल निशान से सरयू 40 सेमी ऊपर बह रही है। तटवर्ती क्षेत्र के फतेपुरवा, दुबे पुरवा, मिश्रण पुरवा, जगरूपपुरवा, कुंभरौडा, कटुआ घाटपुरवा, रानीगंज, अखरी, रामरूप पुरवा, निरंजन पुरवा, कनरखी, प्यारेपुरवा, सुंदरपुरवा, अंगरौरा, सोतीपुरवा, खरगी पुरवा, बंगालीपुरवा, हरिपुरवा, हरिहरपुरवा, बाबाकुटी, शंकर पुरवा समेत करीब 45 गांवों में लगभग चार फीट तक पानी भर गया है। लगभग 250 घरों में पानी भरने से पीड़ितों के सामने खाने-पीने और रहने का संकट खड़ा हो गया है।
बक्सीपुरवा, दुबे पुरवा, शंकर पुरवा, अखरी, प्यारे पुरवा, निरंजन पुरवा आदि गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह टूट गया है। इन रास्तों पर चार फीट तक पानी बह रहा है। यहां नाव की व्यवस्था भी नहीं है। जानकारी करने पर बताया गया कि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। इन गांवों के लोगों ने बाढ़ राहत सामग्री वितरण में भेदभाव का आरोप लगाते हुए बताया कि कुछ लोगों के नाम तो लिखे गए पर उन्हें राशन किट नहीं दी गई है।
बाढ़ में फंसे सैकड़ों परिवार, खाना बनाने की भी जगह नहीं
बाढ़ के हालात व प्रशासन की तैयारियों की हकीकत जानने के लिए अमर उजाला की टीम रविवार को रामपुर मथुरा क्षेत्र के प्रभावित गांवों में पहुंची। अचानक आई बाढ़ से सैकड़ों परिवार सैलाब में फंसे हुए हैं। रास्तों पर पानी भरा होने व नाव की पर्याप्त व्यवस्था न होने से सुरक्षित ठिकानों की ओर नहीं जा पा रहे हैं। अंगरौरा निवासी रामपाल, झाबर, जग प्रसाद, मुन्नू, पिंटू, सुरेश ने बताया कि यहां के हालात बेहद खराब हैं। तेजी से बढ़ रहे जलस्तर व इससे बचने की ऊहापोह में खाना तक नहीं नसीब हुआ।
नाव की पर्याप्त व्यवस्था न होने से घर का सारा सामान तटबंध पर नहीं ले जा सके हैं। इसी गांव के संतोष, मुंशी, दुजई, केशवराम के घरों के भी यही हाल हैं। केवल दो नावें ही मौके पर दिखाई दी जो बाढ़ की भयावहता व जरूरत के लिहाज से नाकाफी थी। अखरी व शुकुलपुरवा पहुंचने के लिए काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। यहां की मुख्य सड़कों पर पानी का बहाव काफी तेज था। इस रास्ते पर निकलना खतरे से खाली नहीं है। किसी तरह हम लोग अखरी व शुकुलपुरवा पहुंचे तो इन गांवों के हालात भी बेहद खराब दिखाई दिए। मंगम, बिक्रम, सरबजीत, रामसागर, मनोहर, संतोष, रामफल, बहादुर, मुलायम आदि ने बताया कि प्रशासनिक कर्मचारी आते तो हैं लेकिन कोई मदद नहीं मिल रही है। भीषण बाढ़ के कारण खाना बनाने की जगह तक नहीं बची है।
तटबंध पर समस्याओं का अंबार
रामपुर मथुरा क्षेत्र के तमाम बाढ़ पीड़ितों ने तटबंध पर शरण ले रखी है। यहां कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। तटबंध पर कोई सुविधाएं नहीं हैं। बच्चे व महिलाओं को नित्यकर्म के लिए जगह नहीं है। रोशनी का इंतजाम नहीं है। प्रशासन से बराबर तटबंध पर सोलर लाइट लगवाए जाने व अस्थायी शौचालय बनवाने की मांग की जाती रही पर आज तक केवल आश्वासन ही मिलता रहा है।
घरों में भरा पानी, छत पर जमाया डेरा
रेउसा के बाढ़ प्रभावित इलाके में चारों तरफ पानी भरा होने से लोगों के सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। गार्गीपुरवा के राम नरेश, कमलेश, परमेश्वर, उमेश, दिनेश, संदीप, प्रदीप, राम लखन, मुंशी, रामचन्द्र, श्रीकेशन, मौजी लाल, विजय, मुरली, रमेश, धीरा, विश्राम, लालजी, मूलचंद, पेशकार व छोटे आदि लोगों के घरों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। इनका कहना है कि तखत पर लोहे के बर्तन में मिट्टी का चूल्हा रखकर खाना बनाते हैं। ग्रामीणों को आवागमन के लिए नावों की सहारा लेना पड़ रहा है। खेतों में पानी भर जाने से जानवरों के लिए चारे का संकट गहरा गया है। लगातार पानी बढ़ने से लोग घरों का सामान निकालकर छतों पर ले जा रहे हैं। कई परिवार घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं।
30 नावें चलाई जा रहीं
बिसवां तहसीलदार अविचल प्रताप सिंह ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों को पांच हजार लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। बाढ़ के पानी से अभी गौलोक कोडर के कई मजरे प्रभावित हैं। 30 नावें चल रही हैं। मारूबेहड़ बाढ़ चौकी पर दवा का भी इंतजाम है। महमूदाबाद तहसीलदार मनीष कुमार ने बताया कि जलस्तर काफी बढ़ गया है। तटबंध पर रहने वाले लोगों को सोलर टार्च दी गई है। बाढ़ में लगी टीमें प्रभावित क्षेत्र का सर्वे कर कर रही हैं।
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सैलाब के बीच फंसे कई परिवार भूखे रहने को मजबूर हैं। हजारों बीघा फसल बाढ़ के पानी में डूब गई है। प्रशासनिक अमला बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ राहत सामग्री प्रदान कर रहा है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की संख्या को देखते हुए मदद नाकाफी साबित हो रही है। रविवार को तीनों बैराजों से फिर पौने पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं। ब्लॉक रेउसा क्षेत्र में गुरगुजपुर-जंगल टपरी मार्ग व नकहिया पुलिया पानी के बहाव की जद में आ गई है। तटवर्ती इलाकों में निचली जगहों की ओर पानी का तेज बहाव नजर आ रहा है। गौलोक कोडर के जंगल टपरी, गार्गीपुरवा, आशाराम पुरवा, पासिनपुरवा, संबारी पुरवा, लोधपुरवा, मोदी नगर, आजाद नगर, नगीनापुरवा, सुंदर नगर, दर्जिनरेती, चौकीपुरवा, ताहपुर बजहा, मरेली, जैतहिया, दुर्गापुरवा, गौढी, परमेश्वरपुरवा, लालापुरवा, भिल्लरपुरवा, श्यामनगर व म्योडी छोलहा के श्रीरामपुरवा, भदम्मरपुरवा, धूसपुरवा समेत करीब 25 गांवों में घरों के भीतर पानी भर गया है।
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कई गांवों के मुख्य मार्ग बाढ़ की चपेट में आने से आवागमन ठप हो गया है। ब्लॉक रामपुर मथुरा क्षेत्र में तटबंध के पास फतेपुरवा में लगे मीटर गेज पर रविवार को सरयू का जलस्तर 119.40 मीटर दर्ज किया गया। लाल निशान से सरयू 40 सेमी ऊपर बह रही है। तटवर्ती क्षेत्र के फतेपुरवा, दुबे पुरवा, मिश्रण पुरवा, जगरूपपुरवा, कुंभरौडा, कटुआ घाटपुरवा, रानीगंज, अखरी, रामरूप पुरवा, निरंजन पुरवा, कनरखी, प्यारेपुरवा, सुंदरपुरवा, अंगरौरा, सोतीपुरवा, खरगी पुरवा, बंगालीपुरवा, हरिपुरवा, हरिहरपुरवा, बाबाकुटी, शंकर पुरवा समेत करीब 45 गांवों में लगभग चार फीट तक पानी भर गया है। लगभग 250 घरों में पानी भरने से पीड़ितों के सामने खाने-पीने और रहने का संकट खड़ा हो गया है।
बक्सीपुरवा, दुबे पुरवा, शंकर पुरवा, अखरी, प्यारे पुरवा, निरंजन पुरवा आदि गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह टूट गया है। इन रास्तों पर चार फीट तक पानी बह रहा है। यहां नाव की व्यवस्था भी नहीं है। जानकारी करने पर बताया गया कि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। इन गांवों के लोगों ने बाढ़ राहत सामग्री वितरण में भेदभाव का आरोप लगाते हुए बताया कि कुछ लोगों के नाम तो लिखे गए पर उन्हें राशन किट नहीं दी गई है।
बाढ़ में फंसे सैकड़ों परिवार, खाना बनाने की भी जगह नहीं
बाढ़ के हालात व प्रशासन की तैयारियों की हकीकत जानने के लिए अमर उजाला की टीम रविवार को रामपुर मथुरा क्षेत्र के प्रभावित गांवों में पहुंची। अचानक आई बाढ़ से सैकड़ों परिवार सैलाब में फंसे हुए हैं। रास्तों पर पानी भरा होने व नाव की पर्याप्त व्यवस्था न होने से सुरक्षित ठिकानों की ओर नहीं जा पा रहे हैं। अंगरौरा निवासी रामपाल, झाबर, जग प्रसाद, मुन्नू, पिंटू, सुरेश ने बताया कि यहां के हालात बेहद खराब हैं। तेजी से बढ़ रहे जलस्तर व इससे बचने की ऊहापोह में खाना तक नहीं नसीब हुआ।
नाव की पर्याप्त व्यवस्था न होने से घर का सारा सामान तटबंध पर नहीं ले जा सके हैं। इसी गांव के संतोष, मुंशी, दुजई, केशवराम के घरों के भी यही हाल हैं। केवल दो नावें ही मौके पर दिखाई दी जो बाढ़ की भयावहता व जरूरत के लिहाज से नाकाफी थी। अखरी व शुकुलपुरवा पहुंचने के लिए काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। यहां की मुख्य सड़कों पर पानी का बहाव काफी तेज था। इस रास्ते पर निकलना खतरे से खाली नहीं है। किसी तरह हम लोग अखरी व शुकुलपुरवा पहुंचे तो इन गांवों के हालात भी बेहद खराब दिखाई दिए। मंगम, बिक्रम, सरबजीत, रामसागर, मनोहर, संतोष, रामफल, बहादुर, मुलायम आदि ने बताया कि प्रशासनिक कर्मचारी आते तो हैं लेकिन कोई मदद नहीं मिल रही है। भीषण बाढ़ के कारण खाना बनाने की जगह तक नहीं बची है।
तटबंध पर समस्याओं का अंबार
रामपुर मथुरा क्षेत्र के तमाम बाढ़ पीड़ितों ने तटबंध पर शरण ले रखी है। यहां कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। तटबंध पर कोई सुविधाएं नहीं हैं। बच्चे व महिलाओं को नित्यकर्म के लिए जगह नहीं है। रोशनी का इंतजाम नहीं है। प्रशासन से बराबर तटबंध पर सोलर लाइट लगवाए जाने व अस्थायी शौचालय बनवाने की मांग की जाती रही पर आज तक केवल आश्वासन ही मिलता रहा है।
घरों में भरा पानी, छत पर जमाया डेरा
रेउसा के बाढ़ प्रभावित इलाके में चारों तरफ पानी भरा होने से लोगों के सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। गार्गीपुरवा के राम नरेश, कमलेश, परमेश्वर, उमेश, दिनेश, संदीप, प्रदीप, राम लखन, मुंशी, रामचन्द्र, श्रीकेशन, मौजी लाल, विजय, मुरली, रमेश, धीरा, विश्राम, लालजी, मूलचंद, पेशकार व छोटे आदि लोगों के घरों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। इनका कहना है कि तखत पर लोहे के बर्तन में मिट्टी का चूल्हा रखकर खाना बनाते हैं। ग्रामीणों को आवागमन के लिए नावों की सहारा लेना पड़ रहा है। खेतों में पानी भर जाने से जानवरों के लिए चारे का संकट गहरा गया है। लगातार पानी बढ़ने से लोग घरों का सामान निकालकर छतों पर ले जा रहे हैं। कई परिवार घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं।
30 नावें चलाई जा रहीं
बिसवां तहसीलदार अविचल प्रताप सिंह ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों को पांच हजार लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। बाढ़ के पानी से अभी गौलोक कोडर के कई मजरे प्रभावित हैं। 30 नावें चल रही हैं। मारूबेहड़ बाढ़ चौकी पर दवा का भी इंतजाम है। महमूदाबाद तहसीलदार मनीष कुमार ने बताया कि जलस्तर काफी बढ़ गया है। तटबंध पर रहने वाले लोगों को सोलर टार्च दी गई है। बाढ़ में लगी टीमें प्रभावित क्षेत्र का सर्वे कर कर रही हैं।