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कम नहीं हो रहीं तटीय क्षेत्र के बाशिंदों की मुसीबतें
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रेउसा (सीतापुर)। घाघरा व शारदा नदियों के जलस्तर में उतारचढ़ाव के बीच तटीय क्षेत्र के नागरिकों की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। कई संपर्क मार्गों पर पानी भरा होने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही हैं। वहीं, शनिवार को लगभग पचास बीघा खेती वाली जमीन कटान की भेंट चढ़ गई। जटपुरवा को कटान से बचाने के लिए बांस के अस्थाई बांध का निर्माण शुरू हो गया है।
जिले के गांजरी इलाके से बहने वाली घाघरा व शारदा नदियों का जलस्तर शनिवार को स्थिर रहा। पानी के उतारचढ़ाव के बीच ग्रामीणों की मुसीबतें बरकरार हैं। परमेशवरपुरवा, लोधपुरवा, चौकीपुरवा, मरेली व दुर्गापुरवा आदि गांवों के संपर्क मार्ग अब भी जलमग्न होने से ग्रामीणों का आवागमन दुश्वार है। इन गांवों के बेहद करीब लहरें हिलोरें मारती नजर आ रही हैं। जिससे ग्रामीण अपनी गृहस्थी सुरक्षित करने की कवायद में जुटे हुए हैं।
शनिवार को जंगल पटरी के मुंशी, जटपुरवा के बंशी, चुन्नी, खेलावन, त्रिभवन, लल्लू आदि की लगभग पचास बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समा गई। पानी घटने पर जटपुरवा को कटान से बचाने के लिए बांस के अस्थाई बांध बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक बैराजों से लगातार छोड़ा जा रहा लाखों क्यूसेक पानी किसी भी वक्त फिर से नदियों में उफान ला सकता है। इसे लेकर ग्रामीणों का डर फिलहाल बना हुआ है।
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जिले के गांजरी इलाके से बहने वाली घाघरा व शारदा नदियों का जलस्तर शनिवार को स्थिर रहा। पानी के उतारचढ़ाव के बीच ग्रामीणों की मुसीबतें बरकरार हैं। परमेशवरपुरवा, लोधपुरवा, चौकीपुरवा, मरेली व दुर्गापुरवा आदि गांवों के संपर्क मार्ग अब भी जलमग्न होने से ग्रामीणों का आवागमन दुश्वार है। इन गांवों के बेहद करीब लहरें हिलोरें मारती नजर आ रही हैं। जिससे ग्रामीण अपनी गृहस्थी सुरक्षित करने की कवायद में जुटे हुए हैं।
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शनिवार को जंगल पटरी के मुंशी, जटपुरवा के बंशी, चुन्नी, खेलावन, त्रिभवन, लल्लू आदि की लगभग पचास बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समा गई। पानी घटने पर जटपुरवा को कटान से बचाने के लिए बांस के अस्थाई बांध बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक बैराजों से लगातार छोड़ा जा रहा लाखों क्यूसेक पानी किसी भी वक्त फिर से नदियों में उफान ला सकता है। इसे लेकर ग्रामीणों का डर फिलहाल बना हुआ है।
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