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गांजरी इलाके में बाढ़ की आशंका, बेकाबू हो सकते हालात
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रेउसा (सीतापुर)। घाघरा व शारदा नदियों के जलस्तर में शनिवार को भी वृद्धि जारी रही। पहाड़ों पर बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी से नदियां उफान पर हैं। जलस्तर बढ़ने से कटान तो थमा लेकिन तटीय क्षेत्र के गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। इसी तरह जलस्तर बढ़ता रहा तो कभी भी गांजरी इलाके में हालात बेकाबू हो सकते हैं।
बिसवां के नायब तहसीलदार ने रेउसा क्षेत्र का दौरा कर लेखपालों को बराबर निगाह रखने के निर्देश दिए हैं। नायब तहसीलदार अवनींद्र कुमार शुक्ल सबसे पहले बिल्लरपुरवा व कोनी गांव पहुंचे। यहां उन्होंने उफनाई घाघरा का जायजा लिया। बांस का बांध बह जाने पर सिंचाई विभाग को निर्देश देने के बाद भी हुई लापरवाही से वह खासा नाराज दिखे।
सिंचाई विभाग के जेई को मोबाइल पर ही कड़ी फटकार लगाते हुए कटान रोकने को ठोस उपाय करने की हिदायत दी। इसके बाद भी लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा। इसके बाद उन्होंने चहलारी घाट पहुंचकर जलस्तर मापने के लिए पुल के पोल पर अंकित निशान को देखा। नायब तहसीलदार ने बताया कि अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं।
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यहां उन्होंने क्षेत्रीय लेखपालों को हर समय सजग रहने के निर्देश दिए। गांव के लोगों का मोबाइल नंबर लेकर बराबर संपर्क में रहने को कहा। जिनके पास निजी नावें हैं उनसे भी संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए। उधर, नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो जल्द ही बाढ़ आ सकती है।
संख्या लिखी पर मानक लिखना भूल गए
चहलारी पुल के खंभे पर जलस्तर मापने के लिए मानक अंकित किया गया है। इसमें संख्या तो लिख दी गई लेकिन मानक नहीं लिखा गया है। जिसके चलते यह तय कर पाना मुश्किल है कि दर्ज संख्या का पैमाना क्या है। नायब तहसीलदार ने बताया कि तीन दिन पहले जलस्तर 115.59 पर था जो अब बढ़कर 115.79 पर पहुंच गया है।
तालाब व नाले उफनाए
घाघरा का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटीय क्षेत्र के तालाब व नाले भी उफना गए हैं। घाघरा से करीब दो किमी. दूर खानी हुसैनपुर के करीब बहने वाला लालपुर का नाला भी उफान पर पहुंच गया है जबकि तालाबों के बाहर पानी निकलने लगा है।
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बिसवां के नायब तहसीलदार ने रेउसा क्षेत्र का दौरा कर लेखपालों को बराबर निगाह रखने के निर्देश दिए हैं। नायब तहसीलदार अवनींद्र कुमार शुक्ल सबसे पहले बिल्लरपुरवा व कोनी गांव पहुंचे। यहां उन्होंने उफनाई घाघरा का जायजा लिया। बांस का बांध बह जाने पर सिंचाई विभाग को निर्देश देने के बाद भी हुई लापरवाही से वह खासा नाराज दिखे।
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सिंचाई विभाग के जेई को मोबाइल पर ही कड़ी फटकार लगाते हुए कटान रोकने को ठोस उपाय करने की हिदायत दी। इसके बाद भी लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा। इसके बाद उन्होंने चहलारी घाट पहुंचकर जलस्तर मापने के लिए पुल के पोल पर अंकित निशान को देखा। नायब तहसीलदार ने बताया कि अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं।
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यहां उन्होंने क्षेत्रीय लेखपालों को हर समय सजग रहने के निर्देश दिए। गांव के लोगों का मोबाइल नंबर लेकर बराबर संपर्क में रहने को कहा। जिनके पास निजी नावें हैं उनसे भी संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए। उधर, नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो जल्द ही बाढ़ आ सकती है।
संख्या लिखी पर मानक लिखना भूल गए
चहलारी पुल के खंभे पर जलस्तर मापने के लिए मानक अंकित किया गया है। इसमें संख्या तो लिख दी गई लेकिन मानक नहीं लिखा गया है। जिसके चलते यह तय कर पाना मुश्किल है कि दर्ज संख्या का पैमाना क्या है। नायब तहसीलदार ने बताया कि तीन दिन पहले जलस्तर 115.59 पर था जो अब बढ़कर 115.79 पर पहुंच गया है।
तालाब व नाले उफनाए
घाघरा का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटीय क्षेत्र के तालाब व नाले भी उफना गए हैं। घाघरा से करीब दो किमी. दूर खानी हुसैनपुर के करीब बहने वाला लालपुर का नाला भी उफान पर पहुंच गया है जबकि तालाबों के बाहर पानी निकलने लगा है।