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Sitapur News: कलुवापुर व परमगोंडा गांव के पास कटान तेज
Wed, 02 Jul 2025 12:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Wed, 02 Jul 2025 12:31 AM IST
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रामपुर मथुरा (सीतापुर)। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश व गिरिजापुरी बैराज से छोड़े गए पानी से सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं, लेकिन उफनाती लहरों ने कलुवापुर व परमगोंडा गांव के पास नदी ने कटान शुरू कर दी है। एक घर नदी के निशाने पर है जबकि गांवों के खेत भी कटकर सरयू में समाने लगे हैं। इससे तटवर्ती गांवों के लोग सहमे हुए हैं। खतरे को देखते हुए सरयू नदी के तट के पास बसे गांवों के लोगों ने पलायन की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
बैराजों से मंगलवार को करीब 2.89 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। सोमवार की तुलना में 30 हजार 422 क्यूसेक ज्यादा पानी डिस्चार्ज किया गया है। पहाड़ों समेत मैदानी इलाकों में लगातार बारिश व बैराजों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी ने गांजर के लोगों के लिए खतरे की घंटी है। बाढ़ भले ही अभी नहीं आई है लेकिन हिलोरे मारती लहरों ने कटान शुरू कर दिया है। कलुवापुर तथा परमगोंडा गांव के पास कटान हो रहा है।
परमगोंडा निवासी नंद किशोर का घर नदी के निशाने पर है। नंद किशोर ने बताया कि सोमवार रात से कटान तेज हो गया है। लहरों की चपेट में आने से गृहस्थी समेटकर सुरक्षित ठिकाने पर जाने की तैयारी कर रहा हूं। नंद किशोर के मुताबिक प्रशासन ने हमें ग्वाहडीह ग्राम पंचायत की तेलनिया गांव में रहने के लिए जमीन दी थी। उसी में अपनी गृहस्थी लेकर जा रहा हूं। इसके अलावा मूलचंद्र, गुलाम व मंशाराम का खेत भी नदी में कट रहा है। गांव के लोग दहशत में हैं।
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117.30 मीटर पर जलस्तर
अंगरौरा में मीटर गेज लगा है। इस मीटर गेज में खतरे का निशान 119 मीटर है। लेखपाल के अनुसार मीटर गेज में जलस्तर की माप 117 मीटर से प्रारंभ होती है। मंगलवार को जलस्तर 117.30 मीटर दर्ज किया गया। खतरे के निशान से पानी अभी करीब डेढ़ मीटर दूर है।
अब बाढ़ परियोजना अधूरी ही रह जाएगी...
आखिरकार वही हुआ जिसका अंदेशा अमर उजाला ने पहले ही जता दिया था। अखरी, ग्वाहडीह व कलुवापुर के पास 15 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे स्टड का निर्माण सरयू का जलस्तर बढ़ने व बारिश के चलते अधर में अटक गया है। मंगलवार को स्टड व ठोकर के पत्थरों के ऊपर पानी बहने लगा। उधर, एक जुलाई को अमर उजाला में स्टड धंसने की प्रकाशित खबर का संज्ञान लेकर डीएम अभिषेक आनंद ने महमूदाबाद तहसीलदार अनिल कुमार को बाढ़ परियोजना के निरीक्षण के निर्देश दिए थे। बाढ़ परियोजना का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद महमूदाबाद तहसीलदार ने बताया कि करीब 30 फीसदी काम अभी शेष है। जलस्तर बढ़ने व बारिश के कारण अब काम करा पाना मुश्किल है। बाढ़ के बाद ही अब काम संभव है। फिलहाल, पत्थर लगाना संभव न होने पर बालू भरी बोरियां लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
परिवार सुरक्षित स्थान पर भेजा जा रहा
परमगोंडा में नंद किशोर का मकान कट रहा है। कटान अभी धीमी गति से हो रहा है। गृहस्थी समेत परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए जाने के इंतजाम किए गए हैं। बाढ़ जैसे हालात अभी नहीं हैं। फिर भी तराई क्षेत्र में लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ से निपटने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं।
- अनिल कुमार, तहसीलदार महमूदाबाद
..तो बाढ़ आने पर पेयजल के संकट से जूझेंगे ग्रामीण
रेउसा (सीतापुर)। सरयू व शारदा नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटीय क्षेत्र के बाशिंदे सहमे हुए हैं। संभावित बाढ़ को लेकर लोग सुरक्षित स्थान तलाशने लगे हैं। दो दिन पहले तक नदी के भीतर जहां बालू के टीले नजर आ रहे थे, वहां अब पानी फैला दिखाई दे रहा है। निचले स्थानों की ओर पानी का बहाव शुरू हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ आने पर पेयजल संकट गहरा सकता है। श्याम नगर में भगत, कपूर व रोशनलाल के घर के बाहर लगा हैंडपंप एक साल से खराब है। किसी हैंडपंप का उच्चीकरण भी नहीं कराया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ के समय पानी में हैंडपंप डूब जाते हैं और पेयजल की समस्या खड़ी हो जाती है।
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बैराजों से मंगलवार को करीब 2.89 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। सोमवार की तुलना में 30 हजार 422 क्यूसेक ज्यादा पानी डिस्चार्ज किया गया है। पहाड़ों समेत मैदानी इलाकों में लगातार बारिश व बैराजों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी ने गांजर के लोगों के लिए खतरे की घंटी है। बाढ़ भले ही अभी नहीं आई है लेकिन हिलोरे मारती लहरों ने कटान शुरू कर दिया है। कलुवापुर तथा परमगोंडा गांव के पास कटान हो रहा है।
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परमगोंडा निवासी नंद किशोर का घर नदी के निशाने पर है। नंद किशोर ने बताया कि सोमवार रात से कटान तेज हो गया है। लहरों की चपेट में आने से गृहस्थी समेटकर सुरक्षित ठिकाने पर जाने की तैयारी कर रहा हूं। नंद किशोर के मुताबिक प्रशासन ने हमें ग्वाहडीह ग्राम पंचायत की तेलनिया गांव में रहने के लिए जमीन दी थी। उसी में अपनी गृहस्थी लेकर जा रहा हूं। इसके अलावा मूलचंद्र, गुलाम व मंशाराम का खेत भी नदी में कट रहा है। गांव के लोग दहशत में हैं।
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117.30 मीटर पर जलस्तर
अंगरौरा में मीटर गेज लगा है। इस मीटर गेज में खतरे का निशान 119 मीटर है। लेखपाल के अनुसार मीटर गेज में जलस्तर की माप 117 मीटर से प्रारंभ होती है। मंगलवार को जलस्तर 117.30 मीटर दर्ज किया गया। खतरे के निशान से पानी अभी करीब डेढ़ मीटर दूर है।
अब बाढ़ परियोजना अधूरी ही रह जाएगी...
आखिरकार वही हुआ जिसका अंदेशा अमर उजाला ने पहले ही जता दिया था। अखरी, ग्वाहडीह व कलुवापुर के पास 15 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे स्टड का निर्माण सरयू का जलस्तर बढ़ने व बारिश के चलते अधर में अटक गया है। मंगलवार को स्टड व ठोकर के पत्थरों के ऊपर पानी बहने लगा। उधर, एक जुलाई को अमर उजाला में स्टड धंसने की प्रकाशित खबर का संज्ञान लेकर डीएम अभिषेक आनंद ने महमूदाबाद तहसीलदार अनिल कुमार को बाढ़ परियोजना के निरीक्षण के निर्देश दिए थे। बाढ़ परियोजना का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद महमूदाबाद तहसीलदार ने बताया कि करीब 30 फीसदी काम अभी शेष है। जलस्तर बढ़ने व बारिश के कारण अब काम करा पाना मुश्किल है। बाढ़ के बाद ही अब काम संभव है। फिलहाल, पत्थर लगाना संभव न होने पर बालू भरी बोरियां लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
परिवार सुरक्षित स्थान पर भेजा जा रहा
परमगोंडा में नंद किशोर का मकान कट रहा है। कटान अभी धीमी गति से हो रहा है। गृहस्थी समेत परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए जाने के इंतजाम किए गए हैं। बाढ़ जैसे हालात अभी नहीं हैं। फिर भी तराई क्षेत्र में लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ से निपटने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं।
- अनिल कुमार, तहसीलदार महमूदाबाद
..तो बाढ़ आने पर पेयजल के संकट से जूझेंगे ग्रामीण
रेउसा (सीतापुर)। सरयू व शारदा नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटीय क्षेत्र के बाशिंदे सहमे हुए हैं। संभावित बाढ़ को लेकर लोग सुरक्षित स्थान तलाशने लगे हैं। दो दिन पहले तक नदी के भीतर जहां बालू के टीले नजर आ रहे थे, वहां अब पानी फैला दिखाई दे रहा है। निचले स्थानों की ओर पानी का बहाव शुरू हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ आने पर पेयजल संकट गहरा सकता है। श्याम नगर में भगत, कपूर व रोशनलाल के घर के बाहर लगा हैंडपंप एक साल से खराब है। किसी हैंडपंप का उच्चीकरण भी नहीं कराया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ के समय पानी में हैंडपंप डूब जाते हैं और पेयजल की समस्या खड़ी हो जाती है।