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Sitapur News: छह साल में बढ़ेेगा पृथ्वी का तापमान, प्रकृति के अनुकूल जीने की जरूरत
Fri, 02 Jun 2023 11:28 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 02 Jun 2023 11:28 PM IST
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सीतापुर। पृथ्वी का तापमान आने वाले छह वर्ष और पचास दिनों में 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा। जो पृथ्वी पर जीवन के लिए हानिकारक बनेगा। पृथ्वी का तापमान बिगडऩे के साथ ही समुद्र की सीमा का भी विस्तार होगा।
इसलिए मनुष्य को प्रकृति के अनुकूल जीवन जीना चाहिए। यह विचार सोलर मैन ऑफ इंडिया के नाम से मशहूर आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी ने व्यक्त किए। वह एनर्जी स्वराज यात्रा लेकर शुक्रवार को सीतापुर शिक्षण संस्थान पहुंचे थे।
सीतापुर शिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रोफेसर सोलंकी ने जीवाश्म ईंधन से पृथ्वी को होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी।
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उन्होंने कहा कि उत्सर्जित कार्बन डाई ऑक्साइड वातावरण मेंं 300 वर्ष तक रहती है। इसके कारण ही तापमान व समुद्र की सीमाएं अव्यवस्थित होती हैं। पेट्रोल डीजल से चलने वाले वाहन और एसी के इस्तेमाल से कार्बन डाई ऑक्साइड गैस ज्यादा निकलती है।
बताया कि एक अध्ययन से सामने आया है कि पृथ्वी पर एक सेकेंड में 14 लाख किलोग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड निकलती है। इसके बचाव के लिए एएमजी का मंत्र भी दिया। ए से तात्पर्य एवायड, एम से तात्पर्य मिनिमाइज और जी से जेनरेट है। उन्होंने सलाह दी कि बिजली के उपकरणों का प्रयोग कम से कम करना चाहिए और प्रकृति के अनुकूल जीवन जीना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान संस्थान की सचिव डा. सुमन मेहरोत्रा, आईईटी के निदेशक डा. जगवीर सिंह, कुल सचिव मनोज कुमार शर्मा मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्राचार्य डा. मनोज मौर्या ने किया।
एनर्जी स्वराज स्थापित करना लक्ष्य
प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी मध्यप्रदेश सरकार के सौर ऊर्जा के ब्रांड एंबेस्डर हैं। पिछले 917 दिनों से वह अपनी सोलर पावर युक्त बस से सौर ऊर्जा के प्रयोग और उससे होने वाले लाभ के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए देश भ्रमण कर रहे हैं। प्रोफेसर सोलंकी ने कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य एनर्जी स्वराज स्थापित करना है।
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इसलिए मनुष्य को प्रकृति के अनुकूल जीवन जीना चाहिए। यह विचार सोलर मैन ऑफ इंडिया के नाम से मशहूर आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी ने व्यक्त किए। वह एनर्जी स्वराज यात्रा लेकर शुक्रवार को सीतापुर शिक्षण संस्थान पहुंचे थे।
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सीतापुर शिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रोफेसर सोलंकी ने जीवाश्म ईंधन से पृथ्वी को होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी।
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उन्होंने कहा कि उत्सर्जित कार्बन डाई ऑक्साइड वातावरण मेंं 300 वर्ष तक रहती है। इसके कारण ही तापमान व समुद्र की सीमाएं अव्यवस्थित होती हैं। पेट्रोल डीजल से चलने वाले वाहन और एसी के इस्तेमाल से कार्बन डाई ऑक्साइड गैस ज्यादा निकलती है।
बताया कि एक अध्ययन से सामने आया है कि पृथ्वी पर एक सेकेंड में 14 लाख किलोग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड निकलती है। इसके बचाव के लिए एएमजी का मंत्र भी दिया। ए से तात्पर्य एवायड, एम से तात्पर्य मिनिमाइज और जी से जेनरेट है। उन्होंने सलाह दी कि बिजली के उपकरणों का प्रयोग कम से कम करना चाहिए और प्रकृति के अनुकूल जीवन जीना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान संस्थान की सचिव डा. सुमन मेहरोत्रा, आईईटी के निदेशक डा. जगवीर सिंह, कुल सचिव मनोज कुमार शर्मा मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्राचार्य डा. मनोज मौर्या ने किया।
एनर्जी स्वराज स्थापित करना लक्ष्य
प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी मध्यप्रदेश सरकार के सौर ऊर्जा के ब्रांड एंबेस्डर हैं। पिछले 917 दिनों से वह अपनी सोलर पावर युक्त बस से सौर ऊर्जा के प्रयोग और उससे होने वाले लाभ के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए देश भ्रमण कर रहे हैं। प्रोफेसर सोलंकी ने कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य एनर्जी स्वराज स्थापित करना है।