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डॉक्टर आते नहीं, सफाई कर्मी देते कोरोना मरीजों को दवाएं

Thu, 10 Sep 2020 11:03 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2020 11:03 PM IST
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Doctors do not come, cleaning workers give medicines to Corona patients
सीतापुर। योगी सरकार कोरोना मरीजों के इलाज को लेकर गंभीर है। बेहतर सुविधाएं देने के लिए जिले को भारी भरकम बजट भी जारी किया गया है, लेकिन इसके बाद भी कोरोना मरीज बेहतर इलाज और सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। उन्हें समय पर खाना नहीं मिल रहा है। दवा मिलने का समय भी तय नहीं है। शुरुआती दौर में मरीजों को लेकर गंभीर दिखने वाला स्वास्थ्य महकमा अब लापरवाही की हदों को पार करता जा रहा है। जिम्मेदार मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लाख दावे क्यों न करें, लेकिन हकीकत किसी से छिपी नहीं है। कई बार मरीज खुद वीडियो वायरल कर व्यवस्था की पोल खोल चुके हैं।
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गुरुवार को अमर उजाला की पड़ताल में एक बार फिर अव्यवस्था उजागर हुई है। मरीजों को समय से दवाएं और हेल्दी डाइट मिल रही है या नहीं, अस्पतालों में उनके साथ कैसा व्यवहार हो रहा है, इसको लेेकर अमर उजाला ने कोविड अस्पतालों में भर्ती मरीजों से फोन पर बात की तो उनका दर्द सामने आ गया। मरीजों ने सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा के उन दावों की पोल खोल दी, जिनका बखान करते वह थकते नहीं है। मरीजों ने जो बताया, वह हैरान करने वाला है। डॉक्टर मरीजों के पास जाने से कतराते हैं। स्वीपरों से इलाज कराया जा रहा है। मरीज अव्यवस्थाएं से काफी परेशान हैं। स्वास्थ्य विभाग पर केवल खानापूर्ति करने का आरोप लगाया।
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जिले में एल वन, एल टू, एमजे पैलेस व बीसीएम संबद्ध कोविड अस्पताल है। पॉजिटिव मरीज चार स्थानों पर भर्ती किए जाते है। लेकिन किसी भी सेंटर के मरीज सुविधाओं से संतुष्ट नहीं दिखे। मरीजों की सबसे बड़ी दिक्कत डॉक्टरों का मरीजों के पास न जाना है। हाल यह है स्वीपर ही डॉक्टर से लेकर सफाई तक की भूमिका अदा कर रहे है। अगर मरीज को कोई दिक्कत होती है तो डॉक्टर न आकर स्वीपर हालचाल लेकर चला जाता है। मरीज बीपी, शुगर की जांच कराने के लिए तड़पते रहते है। लेकिन न तो जांच के उपकरण है न ही जांच करने वाला चिकित्सक है। जबकि मरीजों का इलाज करने के लिए चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जा रही है। इन अव्यवस्थाओं के चलते जिले में पॉजिटिव मरीजों को इलाज मिलना बहुत ही मुश्किल हो रहा है।
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कई वायरल वीडियो खोल चुक है पोल
कोविड अस्पतालों में भर्ती मरीजों के साथ शुरुआत से ही खिलवाड़ किया जा रहा है। एल-वन, एमजे पैलेस व बीसीएम संबद्ध अस्पताल के कई बार ऑडियो व वीडियो वायरल हो चुके है। इन वीडियो में मरीजों ने भोजन की खराब गुणवत्ता गंदगी, बिजली न आना, चिकित्सक गायब रहने जैसे शिकायतें की थी। इस पर जिला प्रशासन कुछ सक्रिय हुआ। निरीक्षण कर अफसरों को केवल हिदायत दी गई थी। जब लापरवाहों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह फिर से पुराने ढर्रे पर आ गए है। स्वास्थ्य विभाग मरीजों के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे है।
दवा से लेकर खाना तक स्वीपर की जिम्मेदारी
एल-1 हॉस्पिटल खैराबाद में भर्ती एक मरीज को जब फोन कर उसका हालचाल जाना, तो वह वहां की व्यवस्थाओं से काफी नाराज था। मरीज ने बताया कि सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। सफाई कर्मचारी ही डॉक्टर है। वही दवाई देने आता है। शनिवार को भर्ती हुए थे। एक बार भी कोई चिकित्सक देखने नहीं आया है। सुबह शाम केवल दो गोलियां दी जाती है। अगर तबियत खराब हो जाए तो इलाज करने वाला कोई नहीं है। खाने के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। पॉजिटिव मरीजों को इम्युनिटी सिस्टम मजबूत करने के लिए बेहतर भोजन दिया जाना चाहिए। लेकिन यहां पर मरीजों वाला खाना मिल रहा है। हर तरफ गंदगी की भरमार है।
चिल्लाते रहो, कोई सुनने वाला नहीं
एल-1 हॉस्पिटल में ही भर्ती सिधौली की एक महिला ने बताया कि छह दिन से भर्ती हूं। यहां पर सफाई नहीं होती है। ब्लॅड प्रेशर की मरीज हूं। कई बार यहां आने वाले स्टॉफ से बीपी व पल्स चेक करने की फरियाद कर चुकी है। लेकिन छह दिन बीतने के बाद भी बीपी नहीं नापा जा सका है। जब बहुत तबियत खराब हुई तो स्वीपर बीपी मशीन लेकर आया था, जैसे ही उसने चालू किया तो वह मशीन डिस्चार्ज हो गई। उसके बाद कोई नहीं आया है। डॉक्टर के आज तक दर्शन नहीं हुए है। खाना, पानी, दवाई सब स्वीपर ही लेकर आता है। हर तरफ गंदगी ही फैली हुई है। यहां पर इलाज के नाम पर कुछ भी नहीं मिल रहा है। चिल्लाते रहो, कोई सुनने वाला नहीं है।
नहीं आते चिकित्सक
एमजे गोल्डेन पैलेस में भर्ती मरीज ने बताया कि वहां पर गंदगी रहती है। खाना केवल खानापूर्ति के नाम के लिए दिया जा रहा है। इलाज के नाम पर कुछ गोलियां ही मिलती है। अगर कोई दिक्कत हो जाए तो चिकित्सक गायब रहते है। कहते रहो, कोई सुनने नहीं है। जांच भी कभी नहीं कराई जाती है। जबकि मरीजों की रोजाना जांच होनी चाहिए। लेकिन कुछ भी नहीं होता है। इसी प्रकार बीसीएम से संबद्ध कोविड हॉस्पिटल में भर्ती मरीज ने बताया कि वहां पर गंदगी बहुत है। टॉयलेट साफ नहीं किए जाते है। इससे बीमारियों के फैलने का डर बना हुआ है।
दो शिफ्टों में चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जा रही है। अगर किसी मरीज को कोई दिक्कत होती है, तो चिकित्सक तत्काल इलाज करते है। अगर किसी मरीज को कोई दिक्कत है तो उसकी समस्या दिखवाई जाएगी।

- डॉ. रमाशंकर यादव, सीएचसी अधीक्षक/एलवन प्रभारी
क्षमता से कम है भर्ती मरीज
कोविड-19 एल-वन हॉस्पिटल के इंचार्ज डॉ. रमाशंकर यादव ने बताया अस्पताल की क्षमता 50 बेड की है। इस समय अस्पताल में 26 मरीज भर्ती है। 12 मरीजों की गुरुवार को छुट्टी हो गई है। बीसीएम से संबद्ध अस्पताल के प्रभारी डॉ. अनिल कुमार पंकज ने बताया 18 मरीज भर्ती है। आठ की छुट्टी हो गई है। एमजे गोल्डेन पैलेस के प्रभारी डॉ. अवधेश ने बताया 60 बेड की क्षमता है। इस समय 46 मरीज एडमिट है।
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