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चुनावी रण में ताल ठोंक रहे डॉक्टर, टटोल रहे मतदाताओं की नब्ज
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सीतापुर। राजनीति में आना भी एक समाजसेवा है। भले ही पुराना वक्त और पुरानी बातें न रही हो लेकिन सियासत में आने वाले नेता विकास और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के दावों के साथ ही सियासी पिच पर बैटिंग करने आते हैं। अब जनता किस पर मेहरबान होती है, यह तो मतदाता का मिजाज ही जाने, लेकिन इस बार छिड़े 2022 के चुनावी दंगल में कई डॉक्टरों को सियासत रास आ गई है। यही वजह है कि अब वह मरीजों को छोड़कर सियासी रण में कूद पड़े हैं।
गांव-गली, खेत, खलिहान से लेकर वोटरों की ड्योढ़ी पर जाकर उनकी नब्ज टटोल रहे हैं। ‘आला’ से मतदाताओं का मिजाज का अंदाजा लगा रहे हैं। नतीजे जो भी हों, लेकिन डॉक्टरों के चुनावी समर में आने से सियासी डगर और दिलचस्प हो चली है। सबसे पहले बात करते हैं महोली के बसपा प्रत्याशी डॉ. रामेंद्र प्रताप वर्मा की। वह मूल रूप से बिसवां के निवासी हैं। पार्टी से बिसवां के लिए टिकट मांग रहे थे, लेकिन महोली का थमा दिया गया। फिलहाल, पूरी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में हैं।
इन दिनों सुबह से शाम तक मतदाताओं का हाल जानने में उनका समय जा रहा है, लेकिन इससे पहले की बात करें तो वह मछरेहटा सीएचसी में संविदा पर डॉक्टरी कर रहे थे। एमबीबीएस की डिग्री है। फरवरी 2016 को नौकरी ज्वाइन की थी। करीब पांच सालों से अधिक समय तक मछरेहटा सीएचसी में तैनात रहे और मरीजों की सेवा करते रहे। 2022 विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही उन्हें सियासत रास आ गई। यही वजह है कि जनवरी में इस्तीफा देकर दो फरवरी को नामांकन दाखिल कर दिया। फिलहाल जनता की नब्ज टटोल रहे हैं।
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अब बात करते हैं कांग्रेस के जिलाध्यक्ष उत्कर्ष अवस्थी के पिता व सेवता विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी डॉ. विजयनाथ अवस्थी की। वह होम्योपैथिक के डॉक्टर हैं। बीएमएस की डिग्री है। हालांकि, उनका डॉक्टरी का कोई पेशा नहीं है, लेकिन फिर मरीजों को निशुल्क सेवाएं लंबे समय से देते चले आ रहे हैं। अब सेवता विधानसभा क्षेत्र की जनता के बीच पहुंचकर उनका मिजाज भांप रहे हैं।
इसी तरह से हरगांव विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की प्रत्याशी डॉ. ममता वर्मा भी पीएचडी की डिग्री लेकर इन दिनों मतदाताओं के बीच पहुंच रहीं हैं। अब देखना यह होगा कि इन डॉक्टर साहबों को चुुनाव में जनता का कितना साथ मिलता है। फिलहाल डॉक्टरों के चुनावी दंगल में उतरने से सियासी कहानी थोड़ा दिलचस्प जरूर है।
पहले भी डॉक्टर बने हैं विधायक
2022 के चुनावी के दंगल में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, जब रण में कूद हैं। सियासी जानकारों की माने तो इससे पहले भी डॉक्टर विधायक बने हैं। सदर विधानसभा से होम्योपैथिक के जाने माने डॉक्टर श्याम किशोर कांग्रेस की सरकार में विधायक बने। एक नहीं दो बार। पहली बार 1969 व दूसरी बार 1974 में विधायक बने।
राष्ट्रपति का इलाज करने जाते थे दिल्ली
जानकारों की माने तो कांग्रेस के टिकट से दो बार नगर के विधायक बने डॉ. श्याम किशोर की ख्याति सिर्फ जिले तक ही सीमित नहीं थी, उस दौर में वह पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा का इलाज करने दिल्ली जाते थे। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्हें कितना अनुभव रहा होगा।
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गांव-गली, खेत, खलिहान से लेकर वोटरों की ड्योढ़ी पर जाकर उनकी नब्ज टटोल रहे हैं। ‘आला’ से मतदाताओं का मिजाज का अंदाजा लगा रहे हैं। नतीजे जो भी हों, लेकिन डॉक्टरों के चुनावी समर में आने से सियासी डगर और दिलचस्प हो चली है। सबसे पहले बात करते हैं महोली के बसपा प्रत्याशी डॉ. रामेंद्र प्रताप वर्मा की। वह मूल रूप से बिसवां के निवासी हैं। पार्टी से बिसवां के लिए टिकट मांग रहे थे, लेकिन महोली का थमा दिया गया। फिलहाल, पूरी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में हैं।
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इन दिनों सुबह से शाम तक मतदाताओं का हाल जानने में उनका समय जा रहा है, लेकिन इससे पहले की बात करें तो वह मछरेहटा सीएचसी में संविदा पर डॉक्टरी कर रहे थे। एमबीबीएस की डिग्री है। फरवरी 2016 को नौकरी ज्वाइन की थी। करीब पांच सालों से अधिक समय तक मछरेहटा सीएचसी में तैनात रहे और मरीजों की सेवा करते रहे। 2022 विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही उन्हें सियासत रास आ गई। यही वजह है कि जनवरी में इस्तीफा देकर दो फरवरी को नामांकन दाखिल कर दिया। फिलहाल जनता की नब्ज टटोल रहे हैं।
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अब बात करते हैं कांग्रेस के जिलाध्यक्ष उत्कर्ष अवस्थी के पिता व सेवता विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी डॉ. विजयनाथ अवस्थी की। वह होम्योपैथिक के डॉक्टर हैं। बीएमएस की डिग्री है। हालांकि, उनका डॉक्टरी का कोई पेशा नहीं है, लेकिन फिर मरीजों को निशुल्क सेवाएं लंबे समय से देते चले आ रहे हैं। अब सेवता विधानसभा क्षेत्र की जनता के बीच पहुंचकर उनका मिजाज भांप रहे हैं।
इसी तरह से हरगांव विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की प्रत्याशी डॉ. ममता वर्मा भी पीएचडी की डिग्री लेकर इन दिनों मतदाताओं के बीच पहुंच रहीं हैं। अब देखना यह होगा कि इन डॉक्टर साहबों को चुुनाव में जनता का कितना साथ मिलता है। फिलहाल डॉक्टरों के चुनावी दंगल में उतरने से सियासी कहानी थोड़ा दिलचस्प जरूर है।
पहले भी डॉक्टर बने हैं विधायक
2022 के चुनावी के दंगल में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, जब रण में कूद हैं। सियासी जानकारों की माने तो इससे पहले भी डॉक्टर विधायक बने हैं। सदर विधानसभा से होम्योपैथिक के जाने माने डॉक्टर श्याम किशोर कांग्रेस की सरकार में विधायक बने। एक नहीं दो बार। पहली बार 1969 व दूसरी बार 1974 में विधायक बने।
राष्ट्रपति का इलाज करने जाते थे दिल्ली
जानकारों की माने तो कांग्रेस के टिकट से दो बार नगर के विधायक बने डॉ. श्याम किशोर की ख्याति सिर्फ जिले तक ही सीमित नहीं थी, उस दौर में वह पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा का इलाज करने दिल्ली जाते थे। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्हें कितना अनुभव रहा होगा।