{"_id":"671a97137619f79ca00e5004","slug":"diwali-celebrated-on-birth-of-daughter-sitapur-news-c-102-1-stp1002-120996-2024-10-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sitapur News: बेटी के पैदा होने पर मनाई दिवाली, कार में गाजे-बाजे संग लाए घर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sitapur News: बेटी के पैदा होने पर मनाई दिवाली, कार में गाजे-बाजे संग लाए घर
Fri, 25 Oct 2024 12:20 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 25 Oct 2024 12:20 AM IST
विज्ञापन
जन्म के बाद बेटी के घर पहुंचने पर आतिशबाजी हुई।
सीतापुर। समाज में आज भी कुछ लोग बेटियों के जन्म पर मायूस हो जाते हैं। इन सबके बीच एक पिता ने बेटी के जन्म पर खूब जश्न मनाया। नौ साल बाद किलकारी गूंजने पर परिवार की खुशी देखते ही बन रही है।
नवजात बेटी को सजी-धजी कार में अस्पताल से घर लाए। परिवार के सदस्य ढोल नगाड़ों की थाप पर जमकर थिरके। आतिशबाजी के साथ बिटिया का स्वागत किया। मोहल्ले में मिठाइयां बांटी गईं। शहर के इस परिवार ने समाज में एक मिसाल पेश की। संदेश दिया कि बेटियां बोझ नहीं, दो कुल का अभिमान और घर-आंगन की शान हैं।
शहर में घंटाघर के पास रहने वाले नीरज गुप्ता की लालबाग में बताशे की दुकान है। दो भाइयों में नीरज बड़े हैं। शादी के दो साल बाद तक आंगन में किलकारी नहीं गूंजी तो नीरज चिंतित हो गए। लखनऊ में डॉक्टरों से इलाज शुरू कराया। इसके बाद भी उन्हें संतान नहीं हुई। नीरज ने ईश्वर पर विश्वास रखते हुए उम्मीद का दीया रोशन रखा। आखिरकार ईश्वर ने उनकी मुराद पूरी की।
विज्ञापन
नौ साल बाद लखनऊ के एक निजी अस्पताल में बेटी पैदा होने से परिवार में जश्न का माहौल है। बुधवार शाम नीरज की पत्नी अस्पताल से डिस्चार्ज होकर नवजात पुत्री के साथ सजी-धजी कार में घर पहुंचीं। घर पहुंचते ही बैंड और ढोल के साथ परिवार ने नवजात पुत्री का स्वागत किया। खूब आतिशबाजी हुई। खुशी में परिवार के लोग जमकर थिरके। मोहल्ले के लोग भी काफी एकत्र थे।
परिवार ने पुत्री होने की खुशी में मिठाइयां भी बांटीं। पिता नीरज ने बताया कि कि वह बेटा-बेटी में फर्क नहीं करते। पहली संतान बेटी हो यह उनकी हार्दिक इच्छा थी। बेटियां नसीब वालों को ही मिलती हैं। वह खुशनसीब हैं कि ईश्वर के आशीर्वाद से पुत्री के रूप में लक्ष्मी मिली है। उन्होंने बताया कि घर में नौ साल बाद बेटी ने जन्म लिया है, इसलिए वे बेहद खुश हैं। परिवार में जश्न का माहौल है।
विज्ञापन
नवजात बेटी को सजी-धजी कार में अस्पताल से घर लाए। परिवार के सदस्य ढोल नगाड़ों की थाप पर जमकर थिरके। आतिशबाजी के साथ बिटिया का स्वागत किया। मोहल्ले में मिठाइयां बांटी गईं। शहर के इस परिवार ने समाज में एक मिसाल पेश की। संदेश दिया कि बेटियां बोझ नहीं, दो कुल का अभिमान और घर-आंगन की शान हैं।
विज्ञापन
शहर में घंटाघर के पास रहने वाले नीरज गुप्ता की लालबाग में बताशे की दुकान है। दो भाइयों में नीरज बड़े हैं। शादी के दो साल बाद तक आंगन में किलकारी नहीं गूंजी तो नीरज चिंतित हो गए। लखनऊ में डॉक्टरों से इलाज शुरू कराया। इसके बाद भी उन्हें संतान नहीं हुई। नीरज ने ईश्वर पर विश्वास रखते हुए उम्मीद का दीया रोशन रखा। आखिरकार ईश्वर ने उनकी मुराद पूरी की।
विज्ञापन
नौ साल बाद लखनऊ के एक निजी अस्पताल में बेटी पैदा होने से परिवार में जश्न का माहौल है। बुधवार शाम नीरज की पत्नी अस्पताल से डिस्चार्ज होकर नवजात पुत्री के साथ सजी-धजी कार में घर पहुंचीं। घर पहुंचते ही बैंड और ढोल के साथ परिवार ने नवजात पुत्री का स्वागत किया। खूब आतिशबाजी हुई। खुशी में परिवार के लोग जमकर थिरके। मोहल्ले के लोग भी काफी एकत्र थे।
परिवार ने पुत्री होने की खुशी में मिठाइयां भी बांटीं। पिता नीरज ने बताया कि कि वह बेटा-बेटी में फर्क नहीं करते। पहली संतान बेटी हो यह उनकी हार्दिक इच्छा थी। बेटियां नसीब वालों को ही मिलती हैं। वह खुशनसीब हैं कि ईश्वर के आशीर्वाद से पुत्री के रूप में लक्ष्मी मिली है। उन्होंने बताया कि घर में नौ साल बाद बेटी ने जन्म लिया है, इसलिए वे बेहद खुश हैं। परिवार में जश्न का माहौल है।