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चक्रतीर्थ में श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
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नैमिषारण्य में चक्रतीर्थ में स्नान करते श्रद्घालु। -संवाद
- फोटो : SITAPUR
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नैमिषारण्य (सीतापुर)। नैमिषारण्य में शरद पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने चक्रतीर्थ में आस्था की डुबकी लगाई। विभिन्न मठ मंदिरों के दर्शन करके दान दक्षिणा दी। इससे नैमिषारण्य में दिनभर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही।
शरद पूर्णिमा को लेकर दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं का आना जाना एक दिन पहले ही शुरू हो गया था। रविवार सुबह बारिश के बावजूद तमाम श्रद्धालु तीर्थ पहुंचे। सुबह पांच बजे से ही श्रद्धालुओं द्वारा स्नान, दान कार्य शुरू हो गया था। तीर्थ पुरोहितों को दान दक्षिणा दी। श्रद्धालुओं ने भगवान सत्यदेव की व्रत कथा सुनी।
उसके बाद मां ललिता देवी का दर्शन पूजन किया और हवन कुंड में आहुति दी। व्यास गद्दी, हनुमानगढ़ी, कालीपीठ, सूत गद्दी, देवपुरी, देवदेवेश्वर आदि देव स्थानों का दर्शन पूजन किया। चक्रतीर्थ प्रधान पुजारी राज नारायण पांडेय ने बताया कि रविवार से कार्तिक मास का प्रारम्भ हो गया है। मान्यता है कि कार्तिक मास भगवान श्री विष्णु को अति प्रिय है।
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कार्तिक मास में नैमिष तीर्थ में धार्मिक प्रवास की बड़ी महत्ता है। इसके चलते यहां विभिन्न प्रदेशों से बड़ी संख्या में आए श्रद्धालु एक महीने तक धर्म प्रवास करते हैं। प्रतिदिन तीर्थ में स्नान कर देव स्थलों का दर्शन पूजन करते हैं। शाम को भगवान चक्रतीर्थ की अष्टकोणीय महाआरती में सम्मिलित होते और पूजा पाठ व अन्य धार्मिक कर्मकांड करते हैं।
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शरद पूर्णिमा को लेकर दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं का आना जाना एक दिन पहले ही शुरू हो गया था। रविवार सुबह बारिश के बावजूद तमाम श्रद्धालु तीर्थ पहुंचे। सुबह पांच बजे से ही श्रद्धालुओं द्वारा स्नान, दान कार्य शुरू हो गया था। तीर्थ पुरोहितों को दान दक्षिणा दी। श्रद्धालुओं ने भगवान सत्यदेव की व्रत कथा सुनी।
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उसके बाद मां ललिता देवी का दर्शन पूजन किया और हवन कुंड में आहुति दी। व्यास गद्दी, हनुमानगढ़ी, कालीपीठ, सूत गद्दी, देवपुरी, देवदेवेश्वर आदि देव स्थानों का दर्शन पूजन किया। चक्रतीर्थ प्रधान पुजारी राज नारायण पांडेय ने बताया कि रविवार से कार्तिक मास का प्रारम्भ हो गया है। मान्यता है कि कार्तिक मास भगवान श्री विष्णु को अति प्रिय है।
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कार्तिक मास में नैमिष तीर्थ में धार्मिक प्रवास की बड़ी महत्ता है। इसके चलते यहां विभिन्न प्रदेशों से बड़ी संख्या में आए श्रद्धालु एक महीने तक धर्म प्रवास करते हैं। प्रतिदिन तीर्थ में स्नान कर देव स्थलों का दर्शन पूजन करते हैं। शाम को भगवान चक्रतीर्थ की अष्टकोणीय महाआरती में सम्मिलित होते और पूजा पाठ व अन्य धार्मिक कर्मकांड करते हैं।