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Sitapur News: फैसले की घड़ी करीब, प्रत्याशियों व समर्थकों की धड़कनें बढ़ीं
Mon, 03 Jun 2024 01:22 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 03 Jun 2024 01:22 AM IST
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सीतापुर। संसदीय सीट सीतापुर से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचने का सपना संजोये आठ प्रत्याशियों के भाग्य के फैसले की घड़ी नजदीक आती जा रही है। उम्मीदवारों के दिल की धड़कनें भी बढ़ने लगी हैं। चार जून को मतगणना होगी। कौन जीतेगा और कौन हारेगा, इसको लेकर कयास तेज हो गए हैं। यहां भाजपा और कांग्रेस-सपा गठबंधन में सीधा मुकाबला है। भाजपा व गठबंधन के प्रत्याशी और समर्थक अपनी-अपनी जीत पक्की बता रहे हैं। इसके लिए पर्याप्त तर्क देते हुए जीत की दावेदारी कर रहे हैं।
सीतापुर लोकसभा क्षेत्र के दायरे में आने वाली पांच विधानसभा सीटों में से चार पर भाजपा काबिज है। भाजपा ने यह सीट 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा से छीनी थी। इससे पहले 1999, 2004 और 2009 में लगातार इस सीट पर बसपा का कब्जा रहा था।
भाजपा के राजेश वर्मा ने 2014 में मोदी लहर पर सवार होकर 4,17,546 वोट हासिल कर निकटतम प्रतिद्वंद्वी बसपा की कैसरजहां को 51 हजार 27 मतों के अंतर से शिकस्त देकर कुर्सी पर कब्जा जमाया था। उस समय पांच विधानसभा सीटों में से चार पर समाजवादी पार्टी काबिज थी। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में सीतापुर, बिसवां, लहरपुर तथा सेवता सीट भाजपा की झोली में आ गई। जबकि महमूदाबाद में सपा का कब्जा रहा।
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सपा-बसपा ने 2019 का लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ा था। सीतापुर लोकसभा सीट बसपा के हिस्से आई थी। बसपा ने पूर्व मंत्री नकुल दुबे पर दांव लगाया था। इसके बाद भी भाजपा के राजेश वर्मा ने कुर्सी पर कब्जा तो बरकरार ही रखा, जीत का अंतर भी एक लाख के पार पहुंचा दिया।
भाजपा को इस चुनाव में 5,14,528 मत जबकि बसपा-सपा गठबंधन को 4,13,695 मत मिले थे। जीत का अंतर एक लाख 833 रहा था। 2022 के विधानसभा चुनाव हुए तो भाजपा की झोली में सीतापुर लोकसभा क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटों में से चार ही आईं। हालांकि, उलटफेर यह रहा कि महमूदाबाद विधानसभा सीट भाजपा ने सपा से छीन ली जबकि लहरपुर विधानसभा सीट गंवा दी। लहरपुर में सपा ने जीत दर्ज की। अब 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के सामने न सिर्फ केसरिया दुर्ग बचाने बल्कि हैट्रिक लगाने की भी चुनौती है। इस बार सीतापुर सीट पर 17,59,943 मतदाताओं में से 11 लाख 741 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। मतदान 62.54 फीसदी हुआ है।
2019 की तुलना में 1.30 फीसदी कम मतदान हुआ है। भाजपा के राजेश वर्मा जीत का सिलसिला बरकरार रखने का दावा कर रहे हैं। वहीं, भाजपा के राजेश वर्मा का विजय रथ रोकने को लेकर कांग्रेस-सपा गठबंधन के राकेश राठौर पूरी तरह से आश्वस्त हैं। मतगणना चार जून को है, यानी मतों की गिनती होने में सिर्फ एक रोज बचे हैं। मतगणना की तारीख नजदीक आने के साथ चुनावी रणभूमि में हर दांव पेंच अपनाने वाले प्रत्याशियों व समर्थकों की बेचैनी भी बढ़ने लगी है।
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सीतापुर लोकसभा क्षेत्र के दायरे में आने वाली पांच विधानसभा सीटों में से चार पर भाजपा काबिज है। भाजपा ने यह सीट 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा से छीनी थी। इससे पहले 1999, 2004 और 2009 में लगातार इस सीट पर बसपा का कब्जा रहा था।
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भाजपा के राजेश वर्मा ने 2014 में मोदी लहर पर सवार होकर 4,17,546 वोट हासिल कर निकटतम प्रतिद्वंद्वी बसपा की कैसरजहां को 51 हजार 27 मतों के अंतर से शिकस्त देकर कुर्सी पर कब्जा जमाया था। उस समय पांच विधानसभा सीटों में से चार पर समाजवादी पार्टी काबिज थी। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में सीतापुर, बिसवां, लहरपुर तथा सेवता सीट भाजपा की झोली में आ गई। जबकि महमूदाबाद में सपा का कब्जा रहा।
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सपा-बसपा ने 2019 का लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ा था। सीतापुर लोकसभा सीट बसपा के हिस्से आई थी। बसपा ने पूर्व मंत्री नकुल दुबे पर दांव लगाया था। इसके बाद भी भाजपा के राजेश वर्मा ने कुर्सी पर कब्जा तो बरकरार ही रखा, जीत का अंतर भी एक लाख के पार पहुंचा दिया।
भाजपा को इस चुनाव में 5,14,528 मत जबकि बसपा-सपा गठबंधन को 4,13,695 मत मिले थे। जीत का अंतर एक लाख 833 रहा था। 2022 के विधानसभा चुनाव हुए तो भाजपा की झोली में सीतापुर लोकसभा क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटों में से चार ही आईं। हालांकि, उलटफेर यह रहा कि महमूदाबाद विधानसभा सीट भाजपा ने सपा से छीन ली जबकि लहरपुर विधानसभा सीट गंवा दी। लहरपुर में सपा ने जीत दर्ज की। अब 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के सामने न सिर्फ केसरिया दुर्ग बचाने बल्कि हैट्रिक लगाने की भी चुनौती है। इस बार सीतापुर सीट पर 17,59,943 मतदाताओं में से 11 लाख 741 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। मतदान 62.54 फीसदी हुआ है।
2019 की तुलना में 1.30 फीसदी कम मतदान हुआ है। भाजपा के राजेश वर्मा जीत का सिलसिला बरकरार रखने का दावा कर रहे हैं। वहीं, भाजपा के राजेश वर्मा का विजय रथ रोकने को लेकर कांग्रेस-सपा गठबंधन के राकेश राठौर पूरी तरह से आश्वस्त हैं। मतगणना चार जून को है, यानी मतों की गिनती होने में सिर्फ एक रोज बचे हैं। मतगणना की तारीख नजदीक आने के साथ चुनावी रणभूमि में हर दांव पेंच अपनाने वाले प्रत्याशियों व समर्थकों की बेचैनी भी बढ़ने लगी है।