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देवगवां पड़ाव पर लहलहा रही फसल

Thu, 25 Feb 2016 10:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर Updated Thu, 25 Feb 2016 10:46 PM IST
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cultivated crop on Devgwan padav

84 कोसी होली परिक्रमा मेले में निकलने वाले श्रद्धालुओं को देवगवां पड़ाव स्थल पर भी विश्राम करने को पर्याप्त स्थान नहीं मिलेगा। कई अहम पड़ाव पर फसल लहलहा रही हैं। पड़ाव स्थल पर दर्जन भर से अधिक सरकारी हैंडपंप लगे हैं लेकिन ये हैंडपंप इन दिनों कहां हैं, किसी को नजर नहीं आ रहे हैं।

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हकीकत यह है कि पड़ाव स्थल खेत-खलिहान में बदलता जा रहा है। अधिकांश हैंडपंप खेतों की फसल में छिपकर रह गए हैं। जो जमीन बची है, उसके ऊपर झाड़ियां हैं। ऐसे में श्रद्धालु कहां ठहरेंगे, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। देवगवां होली परिक्रमा मेले का छठा पड़ाव है।
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शास्त्रों के अनुसार महर्षि दधीचि के अलावा सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश इस स्थान पर वास कर चुके हैं। त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जब अयोध्या वासियों के साथ परिक्रमा पर निकले। तब उन्होंने भी अयोध्यावासियों के साथ इस स्थान पर विश्राम किया। एक समय था जब इस पड़ाव स्थल पर करीब डेढ़ लाख से भी अधिक श्रद्धालु ठहर जाते थे।
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आज का वक्त है कि यहां पर 100 आदमी ठहरने भर का स्थान नहीं बचा है। पड़ाव स्थल तक खेती की जा रही है। पेयजल की सुविधा देने के लिए इस पड़ाव स्थल पर दर्जन भर से अधिक हैंडपंप लगवाए थे। इन दिनों ये हैंडपंप नजर नहीं आ रहे हैं। रोशनी के नाम पर यह एक भी बल्ब नहीं लगा हुआ है।


पड़ाव स्थल पर मौजूद पूजनीय कूप भी बदहाली का शिकार हो रहा है। कूप के अंदर से लेकर बाहर तक झाड़ियां ही झाड़ियां नजर आ रही हैं। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने बाण से इस कूप को जन्म दिया था। जिसके बाद पड़ाव पर ठहरे देवताओं ने इसी कूप के जल से प्यास बुझाई थी।

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