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फरवरी के पहले हफ्ते तक होगी सीआरएस जांच
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सीतापुर। लखनऊ के ऐशबाग से सीतापुर तक इलेक्ट्रिक ट्रैक बनकर तैयार हो चुका है। इंजन दौड़ाकर ट्रैक का ट्रॉयल भी हो चुका है। अब रेलवे इस ट्रैक के सीआरएस की तैयारी में है। उम्मीद है कि जनवरी के अंतिम हफ्ते या फरवरी के पहले हफ्ते में कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) का निरीक्षण होगा।
पूर्वोत्तर रेलवे का ऐशबाग वाया सीतापुर-लखीमपुर मीटर गेज ट्रैक को ब्रॉडगेज में बदलने के बाद इस रूट पर डीजल इंजन की ट्रेनें दौड़ाई जा रही हैं। इस रूट पर ट्रेनों की संख्या काफी कम है। आमान परिवर्तन के बाद रेलवे ने इस रूट का विद्युतीकरण कराने का फैसला किया।
ऐशबाग वाया सीतापुर होते हुए बरेली तक इस ट्रैक का विद्युतीकरण चार चरणों में कराया जाएगा। पहले चरण में कार्यदायी संस्था कल्पतरु ने ऐशबाग-सीतापुर तक इलेक्ट्रिक लाइन बिछा दी है। कार्य पूरा होने के बाद ऐशबाग-सीतापुर तक 25 हजार वोल्ट करंट दौड़ाकर लाइन की टेस्टिंग की गई।
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टेस्टिंग सही पाए जाने के बाद 14 फरवरी को 90 किमी. की स्पीड से रूट पर इलेक्ट्रिक इंजन दौड़ाया गया। ट्रॉयल सफल होने के बाद रेल महकमा अब सीआरएस कराने की तैयारी में है।
विभागीय जानकारों की मानें तो ऐशबाग-सीतापुर रूट के सीआरएस से पहले रायबरेली रूट के कराए गए विद्युतीकरण ट्रैक का सीआरएस होगा। इसके लिए 24 जनवरी की तारीख तय है। इस रूट का सीआरएस होने के बाद ही ऐशबाग-सीतापुर तक इलेक्ट्रिक ट्रैक का सीआरएस कराया जाएगा।
सीतापुर-लखीमपुर रूट पर 600 फाउंडेशन तैयार
पहले चरण में इलेक्ट्रिक लाइन बिछाने के बाद रेलवे द्वितीय चरण में सीतापुर-लखीमपुर तक ट्रैक का विद्युतीकरण करेगा। जानकारों के मुताबिक इस रूट पर 800 फाउंडेशन बनाए जाएंगे।
इनके सापेक्ष करीब छह सौ फाउंडेशन बनकर तैयार हो चुके हैं। 200 फाउंडेशन तैयार किए जा रहे हैं। इसके बाद रूट पर विद्युत पोल खड़े किए जाएंगे। रेलवे विभाग के आंकड़ों पर निगाह डाले तो दिसंबर माह में लखनऊ से लखीमपुर के बीच रेल से प्रतिदिन औसतन तीन हजार यात्रियों ने सफर किया।
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पूर्वोत्तर रेलवे का ऐशबाग वाया सीतापुर-लखीमपुर मीटर गेज ट्रैक को ब्रॉडगेज में बदलने के बाद इस रूट पर डीजल इंजन की ट्रेनें दौड़ाई जा रही हैं। इस रूट पर ट्रेनों की संख्या काफी कम है। आमान परिवर्तन के बाद रेलवे ने इस रूट का विद्युतीकरण कराने का फैसला किया।
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ऐशबाग वाया सीतापुर होते हुए बरेली तक इस ट्रैक का विद्युतीकरण चार चरणों में कराया जाएगा। पहले चरण में कार्यदायी संस्था कल्पतरु ने ऐशबाग-सीतापुर तक इलेक्ट्रिक लाइन बिछा दी है। कार्य पूरा होने के बाद ऐशबाग-सीतापुर तक 25 हजार वोल्ट करंट दौड़ाकर लाइन की टेस्टिंग की गई।
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टेस्टिंग सही पाए जाने के बाद 14 फरवरी को 90 किमी. की स्पीड से रूट पर इलेक्ट्रिक इंजन दौड़ाया गया। ट्रॉयल सफल होने के बाद रेल महकमा अब सीआरएस कराने की तैयारी में है।
विभागीय जानकारों की मानें तो ऐशबाग-सीतापुर रूट के सीआरएस से पहले रायबरेली रूट के कराए गए विद्युतीकरण ट्रैक का सीआरएस होगा। इसके लिए 24 जनवरी की तारीख तय है। इस रूट का सीआरएस होने के बाद ही ऐशबाग-सीतापुर तक इलेक्ट्रिक ट्रैक का सीआरएस कराया जाएगा।
सीतापुर-लखीमपुर रूट पर 600 फाउंडेशन तैयार
पहले चरण में इलेक्ट्रिक लाइन बिछाने के बाद रेलवे द्वितीय चरण में सीतापुर-लखीमपुर तक ट्रैक का विद्युतीकरण करेगा। जानकारों के मुताबिक इस रूट पर 800 फाउंडेशन बनाए जाएंगे।
इनके सापेक्ष करीब छह सौ फाउंडेशन बनकर तैयार हो चुके हैं। 200 फाउंडेशन तैयार किए जा रहे हैं। इसके बाद रूट पर विद्युत पोल खड़े किए जाएंगे। रेलवे विभाग के आंकड़ों पर निगाह डाले तो दिसंबर माह में लखनऊ से लखीमपुर के बीच रेल से प्रतिदिन औसतन तीन हजार यात्रियों ने सफर किया।