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इन अवैध कब्जों पर कब पड़ेगी सरकार की नजर
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
Updated Fri, 29 Apr 2016 11:21 PM IST
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बस स्टॉप के पास हुआ अवैध कब्जा
- फोटो : अमर उजाला
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सत्ता की हनक में विधायक से लेकर मंत्री तक ने जिले के कई स्थानों पर अवैध कब्जे कर रखे हैं। शहर के बाईपास पर स्पर्श होटल के अलावा भी यहां रामपाल यादव कई अवैध कार्य कराते रहे हैं। गांजर में बालू खनन हो या खाद्यान्न की कालाबाजारी।
सत्ताई रसूख के बूते खुलेआम होता रहा। सत्ता की हनक-धमक के जरिये कब्जा करने में राज्यमंत्री रामपाल राजवंशी और सदर विधायक राधेश्याम जायसवाल भी पीछे नहीं हैं। विगत मार्च माह में सदर विधायक खुद के अवैध कब्जे को बचाने के लिए अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे।
शहर के आर्य नगर में राकेश मेहरोत्रा की जमीन पर भी सदर विधायक ने कब्जा कर लिया था। यह मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने पर प्रशासन हरकत में आया, जिसके बाद राकेश मेहरोत्रा की जमीन से अवैध कब्जा हटवाया गया। लखनऊ के जियामऊ व सीतापुर के स्पर्श होटल पर कार्रवाई के बाद सवाल उठना लाजिमी है, कि इन अवैध निर्माणों व कारगुजारियों पर सरकार व प्रशासन की नजर अब तक क्यों नहीं पड़ी?
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केस 1
सदर विधायक ने किया तालाब पर कब्जा
सदर विधायक राधेश्याम जायसवाल ने शहर के मोहल्ला सिविल लाइन में तालाब व नजूल की भूमि पर अवैध कब्जा किया है। विगत मार्च माह में अवैध कब्जे की इस जमीन पर प्रशासन की ओर से जब तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट अतुल श्रीवास्तव निर्माण कार्य रोकवाने पहुंचे तो विधायक आग बबूला हो उठे और अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए। यही नहीं विधायक ने तत्कालीन डीएम इन्द्रवीर सिंह व सिटी मजिस्ट्रेट पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी जड़ दिए। सत्ता की हनक के आगे आखिर प्रशासन को झुकना पड़ा। डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट का तबादला कर दिया। तब जाकर धरना समाप्त हुआ।
केस 2
नहीं ढहाया जा सका बिसवां का अवैध निर्माण
विधायक रामपाल यादव ने बिसवां में भी अवैध निर्माण करा रखा है। बिसवां में रोडवेज बस स्टॉप के करीब राजा महमूदाबाद की जमीन है, जिसे शत्रु संपत्ति घोषित किया गया है। इस जमीन को विधायक ने खरीदने का दावा किया। लेकिन वह जमीन का बैनामा नहीं करा सके। इसके बावजूद विधायक ने नक्शा पास कराए बगैर इस जमीन पर भवन निर्माण करा डाला। हालांकि बाद में जब शत्रु संपत्तियां सरकार ने अपने कब्जे में ली, तब इस भवन में ताला डाल दिया गया। पर अवैध निर्माण गिराने की कार्रवाई नहीं की गई।
केस 3
कब्जेदारी में पीछे नहीं कारागार राज्यमंत्री
सूबे के कारागार राज्यमंत्री, मिश्रिख विधायक रामपाल राजवंशी भी अवैध कब्जे के मामले में पीछे नहीं हैं। शहर के मोहल्ला बट्सगंज में रामपाल राजवंशी का मकान है। इन्होंने अपने मकान से सटी वक्फ बोर्ड की जमीन पर कब्जा कर रखा है। राज्यमंत्री होने की वजह से इस मामले में प्रशासन कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
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सत्ताई रसूख के बूते खुलेआम होता रहा। सत्ता की हनक-धमक के जरिये कब्जा करने में राज्यमंत्री रामपाल राजवंशी और सदर विधायक राधेश्याम जायसवाल भी पीछे नहीं हैं। विगत मार्च माह में सदर विधायक खुद के अवैध कब्जे को बचाने के लिए अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे।
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शहर के आर्य नगर में राकेश मेहरोत्रा की जमीन पर भी सदर विधायक ने कब्जा कर लिया था। यह मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने पर प्रशासन हरकत में आया, जिसके बाद राकेश मेहरोत्रा की जमीन से अवैध कब्जा हटवाया गया। लखनऊ के जियामऊ व सीतापुर के स्पर्श होटल पर कार्रवाई के बाद सवाल उठना लाजिमी है, कि इन अवैध निर्माणों व कारगुजारियों पर सरकार व प्रशासन की नजर अब तक क्यों नहीं पड़ी?
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केस 1
सदर विधायक ने किया तालाब पर कब्जा
सदर विधायक राधेश्याम जायसवाल ने शहर के मोहल्ला सिविल लाइन में तालाब व नजूल की भूमि पर अवैध कब्जा किया है। विगत मार्च माह में अवैध कब्जे की इस जमीन पर प्रशासन की ओर से जब तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट अतुल श्रीवास्तव निर्माण कार्य रोकवाने पहुंचे तो विधायक आग बबूला हो उठे और अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए। यही नहीं विधायक ने तत्कालीन डीएम इन्द्रवीर सिंह व सिटी मजिस्ट्रेट पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी जड़ दिए। सत्ता की हनक के आगे आखिर प्रशासन को झुकना पड़ा। डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट का तबादला कर दिया। तब जाकर धरना समाप्त हुआ।
केस 2
नहीं ढहाया जा सका बिसवां का अवैध निर्माण
विधायक रामपाल यादव ने बिसवां में भी अवैध निर्माण करा रखा है। बिसवां में रोडवेज बस स्टॉप के करीब राजा महमूदाबाद की जमीन है, जिसे शत्रु संपत्ति घोषित किया गया है। इस जमीन को विधायक ने खरीदने का दावा किया। लेकिन वह जमीन का बैनामा नहीं करा सके। इसके बावजूद विधायक ने नक्शा पास कराए बगैर इस जमीन पर भवन निर्माण करा डाला। हालांकि बाद में जब शत्रु संपत्तियां सरकार ने अपने कब्जे में ली, तब इस भवन में ताला डाल दिया गया। पर अवैध निर्माण गिराने की कार्रवाई नहीं की गई।
केस 3
कब्जेदारी में पीछे नहीं कारागार राज्यमंत्री
सूबे के कारागार राज्यमंत्री, मिश्रिख विधायक रामपाल राजवंशी भी अवैध कब्जे के मामले में पीछे नहीं हैं। शहर के मोहल्ला बट्सगंज में रामपाल राजवंशी का मकान है। इन्होंने अपने मकान से सटी वक्फ बोर्ड की जमीन पर कब्जा कर रखा है। राज्यमंत्री होने की वजह से इस मामले में प्रशासन कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा सका।