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मोटर में उतरा करंट, चाचा-भतीजे की मौत
Amarujala Bureau
Updated Tue, 14 Jun 2016 11:22 PM IST
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मौत पर गमगीन परिवार
- फोटो : अमर उजाला
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महोली कोतवाली क्षेत्र में सोमवार रात मोटर में करंट उतरने से चाचा-भतीजे की मौत हो गई। दोनों नलकूप से सिंचाई करने खेत गए थे। इसी दौरान मोटर के स्टॉर्टर में करंट उतरने से दोनों उसमें चिपक गए। घरवाले उन्हें खोजते हुए पहुंचे तो दोनों के शव झुलसे पड़े थे।
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महोली कोतवाली क्षेत्र के पकरिया पांडेय निवासी रामनाथ (32) का खेत गांव के बाहर है। खेत में सिंचाई के लिए बिजली से चलित मोटर लगा हुआ है। इन दिनों खेत में गन्ने की फसल पैदा की जा रही है। सोमवार रात रामनाथ अपने रिश्ते के चाचा शील कुमार (30) के साथ सिंचाई करने खेत गया था।
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इसी दौरान मोटर के स्टार्टर में करंट आ रहा था। जैसे ही रामनाथ ने स्टार्टर में हाथ लगाया, वह चिपक गया। उसे चिपका देख शील बचाने का प्रयास करने लगा लेकिन वह भी करंट की चपेट में आ गया। इस दौरान खेत में कोई मौजूद नहीं था। इस वजह से दोनों की मदद कोई नहीं कर सका। नतीजतन करंट लगने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
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इधर, देर रात तक दोनों घर नहीं लौटे तो परिवार के सदस्य चिंतित हो उठे और उन्हें तलाशते हुए खेत पहुंचे। यहां का नजारा देख, उनके होश उड़ गए। मोटर के करीब दोनों के शव पड़े थे। करंट से शरीर बुरी तरह झुलस गया था। परिवार का कहना है कि स्टार्टर खराब चल रहा था, अचानक उसमें करंट उतर आया। जिसकी वजह से हादसा हुआ है। एक ही परिवार में दो मौतों से गांव में भी कोहराम मच गया।
सांसद ने ढांढस बंधाया
करंट से दो किसानों की मौत की खबर पाकर धौरहरा सांसद रेखा वर्मा पोस्टमार्टम हाउस पहुंची और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। सांसद ने घटना की जानकारी लेने के साथ पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
पत्नी पर आई बच्चों की जिम्मेदारी
करंट की चपेट में आकर जान गंवाने वाले किसान रामनाथ की पत्नी संगीता अचानक परिवार की जिम्मेदारी आ गई। रामनाथ के एक पुत्र रमन (8) व पुत्री सिद्धी (6) हैं। वह किसानी के साथ मजदूरी कर घर चलाता था। अब अचानक ही उसकी मौत से संगीता पर परिवार की जिम्मेदारी गई गई।
जवान बेटे की मौत से मां-बाप पर टूटा दुखों का पहाड़
रामनाथ के बच्चे रमन व सिद्धी सुबह होते ही उछल कूद मचाने लगते थे। वे अपने पिता से तरह-तरह की फरमाइशें भी करते थे। हर दिन लगभग ऐसा ही होता था। सोमवार रात बच्चे मीठी यादें लेकर सो गए। सोचा था कि सुबह उठकर पिता से अपनी जरूरत की चीजें मांगेंगे, लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था।
बच्चों को घर पर सोता छोड़ रामनाथ घर से क्या निकला, पर वापस नहीं आ सका। बच्चे बार-बार पापा को जगा रहे थे, लेकिन उन बच्चों को कौन बताता कि उनके पापा हमेशा के लिए गहरी नींद में सो गए हैं। रामनाथ के बूढ़े पिता राधेश्याम व मां रामकांती पर मानों दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा हो। जवान बेटे की मौत ने दोनों की कमर ही तोड़ दी।