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ट्रिपल मर्डर के खुलासे में झोल ही झोल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jun 2017 10:53 PM IST
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मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पुलिस ट्रिपल मर्डर मामले के राजफाश का दावा कर भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो मगर पुलिसिया कहानी में कई झोल नजर आ रहे हैं। बताते हैं कि शरीफ कांशीराम कॉलोनी में भी रहता था।
पुलिस व प्रशासन का कहना है कि कांशीराम कॉलोनी के जिस कमरे में शरीफ रहता था, वह कमरा जहीदुन नाम की एक महिला के नाम अलॉट था। जहीदुन शरीफ की बहन बताई जा रही है।
डीएम का कहना है कि कांशीराम कॉलोनी की चेकिंग में वहां रह रहे करीब 90 लोगों को नोटिस जारी किया गया था। जहीदुन के नाम मौजूद कमरे का अलॉटमेंट 5 जून को निरस्त किया जा चुका है।
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बताते हैं कि शरीफ यहां जांच के दौरान मिला था लेकिन कमरा जहीदुन के नाम अलॉट होने की वजह से प्रशासन ने आवंटन को निरस्त कर दिया था। यहां पर अधिकारियों के बयान को लेकर भी संदेह उठता है।
एक तरफ प्रशासन कह रहा है कि उन्होंने 5 जून को उस कमरे का अलाटमेंट निरस्त कर दिया, जिस कमरे में ट्रिपल मर्डर का आरोपी शरीफ अक्सर ठहरा करता था। जबकि 6 जून को ही सिविल लाइन मोहल्ले में दाल व्यवसायी की लूट के दौरान हत्या कर दी गई थी।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर वारदात से एक दिन पहले ही कमरे के अलॉटमेंट निरस्त करने की बात क्यों कहीं जा रही है। वहीं कई मामलों में अपराधी किस्म का व्यक्ति गरीबों के लिए बनी कॉलोनी में कैसे रह रहा था। यह पूरी तरह से प्रशासन की लापरवाही जताता है।
हत्या 32 बोर से, बरामदगी 15 बोर
ट्रिपल मर्डर में सबसे अहम पहलू यह है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली 32 बोर की बताया जा रहा था। कामिनी व ऋतिक को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 32 बोर की कारतूस लगने की पुष्टि हो रही है।
इस खुलासे के पहले तक सुनील की हत्या में पुलिस भी 32 बोर का तमंचा प्रयोग होने की बात कहती नजर आई। अब जब ट्रिपल मर्डर का राजफाश हुआ है, तब हत्या आरोपी शरीफ के पास से 315 बोर का असलहा बरामद होने की बात कही जा रही है। दावा किया जा रहा है कि यह वही असलहा है, जिससे ट्रिपल मर्डर की घटना को अंजाम दिया गया।
अन्य साथियों की गिरफ्तारी न होना भी बड़ी वजह
ट्रिपल मर्डर कांड में पुलिस ने शरीफ को गिरफ्तार कर वाहवाही तो लूट ली, लेकिन अभी भी तमाम सवाल है, जो उलझे हुए हैं। सबसे अहम बात है कि इस वारदात में शामिल अन्य अपराधी आखिर कहां हैं।
वे अपराधी कौन हैं, जिनका नाम लेने से पुलिस बच रही है। जब शरीफ उनके हाथ लग गया, तब उसके बाकी के साथी पुलिस के हाथ आखिर क्यों नहीं लगे। लोगों का कहना है कि जब शरीफ पकड़ा गया, तो उसके अन्य साथियों की गिरफ्तारी भी होनी चाहिए।
मंगल को वारदात, मंगलवार को ही खुलासा
जिले के हाईप्रोफाइल ट्रिपल मर्डर की मिस्ट्री सुलझाने का पुलिस ने दावा करते हुए एक हत्यारे को गिरफ्तार कर मीडिया के सामने पेश किया। इस दुस्साहसिक वारदात में यह इत्तेफाक ही माना जाएगा कि बीते छह जून को मंगलवार के दिन हमलावरों ने जघन्य हत्याओं को अंजाम दिया था। अब मंगलवार को ही पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा किया है। इस वारदात ने पूरे प्रदेश की सियासत में भी उथल-पुथल मचा दिया था।
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पुलिस व प्रशासन का कहना है कि कांशीराम कॉलोनी के जिस कमरे में शरीफ रहता था, वह कमरा जहीदुन नाम की एक महिला के नाम अलॉट था। जहीदुन शरीफ की बहन बताई जा रही है।
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डीएम का कहना है कि कांशीराम कॉलोनी की चेकिंग में वहां रह रहे करीब 90 लोगों को नोटिस जारी किया गया था। जहीदुन के नाम मौजूद कमरे का अलॉटमेंट 5 जून को निरस्त किया जा चुका है।
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बताते हैं कि शरीफ यहां जांच के दौरान मिला था लेकिन कमरा जहीदुन के नाम अलॉट होने की वजह से प्रशासन ने आवंटन को निरस्त कर दिया था। यहां पर अधिकारियों के बयान को लेकर भी संदेह उठता है।
एक तरफ प्रशासन कह रहा है कि उन्होंने 5 जून को उस कमरे का अलाटमेंट निरस्त कर दिया, जिस कमरे में ट्रिपल मर्डर का आरोपी शरीफ अक्सर ठहरा करता था। जबकि 6 जून को ही सिविल लाइन मोहल्ले में दाल व्यवसायी की लूट के दौरान हत्या कर दी गई थी।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर वारदात से एक दिन पहले ही कमरे के अलॉटमेंट निरस्त करने की बात क्यों कहीं जा रही है। वहीं कई मामलों में अपराधी किस्म का व्यक्ति गरीबों के लिए बनी कॉलोनी में कैसे रह रहा था। यह पूरी तरह से प्रशासन की लापरवाही जताता है।
हत्या 32 बोर से, बरामदगी 15 बोर
ट्रिपल मर्डर में सबसे अहम पहलू यह है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली 32 बोर की बताया जा रहा था। कामिनी व ऋतिक को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 32 बोर की कारतूस लगने की पुष्टि हो रही है।
इस खुलासे के पहले तक सुनील की हत्या में पुलिस भी 32 बोर का तमंचा प्रयोग होने की बात कहती नजर आई। अब जब ट्रिपल मर्डर का राजफाश हुआ है, तब हत्या आरोपी शरीफ के पास से 315 बोर का असलहा बरामद होने की बात कही जा रही है। दावा किया जा रहा है कि यह वही असलहा है, जिससे ट्रिपल मर्डर की घटना को अंजाम दिया गया।
अन्य साथियों की गिरफ्तारी न होना भी बड़ी वजह
ट्रिपल मर्डर कांड में पुलिस ने शरीफ को गिरफ्तार कर वाहवाही तो लूट ली, लेकिन अभी भी तमाम सवाल है, जो उलझे हुए हैं। सबसे अहम बात है कि इस वारदात में शामिल अन्य अपराधी आखिर कहां हैं।
वे अपराधी कौन हैं, जिनका नाम लेने से पुलिस बच रही है। जब शरीफ उनके हाथ लग गया, तब उसके बाकी के साथी पुलिस के हाथ आखिर क्यों नहीं लगे। लोगों का कहना है कि जब शरीफ पकड़ा गया, तो उसके अन्य साथियों की गिरफ्तारी भी होनी चाहिए।
मंगल को वारदात, मंगलवार को ही खुलासा
जिले के हाईप्रोफाइल ट्रिपल मर्डर की मिस्ट्री सुलझाने का पुलिस ने दावा करते हुए एक हत्यारे को गिरफ्तार कर मीडिया के सामने पेश किया। इस दुस्साहसिक वारदात में यह इत्तेफाक ही माना जाएगा कि बीते छह जून को मंगलवार के दिन हमलावरों ने जघन्य हत्याओं को अंजाम दिया था। अब मंगलवार को ही पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा किया है। इस वारदात ने पूरे प्रदेश की सियासत में भी उथल-पुथल मचा दिया था।