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बाढ़ पीड़ितों की मदद को मिले एक करोड़
Updated Tue, 25 Jul 2017 10:18 PM IST
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बाढ़ पीड़ितों की मदद को मिले एक करोड़
सीतापुर। बाढ़ व कटान पीड़ितों की मदद के लिए सरकार ने जिले को एक करोड़ रुपये भेजे हैं। एडीएम राकेश चंद्र शर्मा ने बताया कि शारदा व घाघरा की बाढ़ व कटान पीड़ितों की मदद के लिए शासन से एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी। उस मांग के अनुरूप शासन ने जिले को एक करोड़ रुपये भेजा है। इन रुपयों से बाढ़ व कटान पीड़ितों की मदद की जाएगी। जिसमें नुकसान का मुआवजा, पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराना। बाढ़ से बचाने के लिए संसाधन जुटाना आदि शामिल है। एडीएम ने बताया कि प्रशासन ने स्थिति विकराल होने से पहले ही बाढ़ से निपटने के इंतजाम कर लिए हैं। जरूरत के वक्त पीड़ितों को तत्काल सरकारी मदद पहुंचेगी।
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जानवरों को मिलेगा चारा
बाढ़ के वक्त अक्सर देखा जाता है, कि खेत व खलिहान डूबने से पशुओं को चारे की दिक्कत होने लगती है। ऐसे में पशुओं को चारा नहीं मिल पाता है। प्रशासन ने इस मुसीबत से भी निपटने का खाका तैयार कर लिया है। बाढ़ के वक्त प्रशासन पशुओं को भूसे का चारा भी उपलब्ध कराएगा। एडीएम राकेश चंद्र शर्मा ने बताया कि पशुओं के लिए पर्याप्त चारे का भी इंतजाम कर लिया गया है।
पचीसा गांव में सर्वे शुरू
घाघरा के बीच टापू पर बसे परिवारों को विस्थापित करने के लिए प्रशासन की कवायद तेज हो गई है। मंगलवार को टापू पर बसे परिवारों का सर्वे भी शुरू कर दिया गया है। सर्वे पूरा होने के बाद प्रशासन टापू के बाशिंदों को सुरक्षित ठिकानों पर विस्थापित करेगा। मंगलवार सुबह लेखपालों की टीम नाव से पचीसा टापू के लिए रवाना हुई। करीब 5 किलोमीटर दूर तक घाघरा के पानी पर चलने के बाद टीम पचीसा टापू पर पहुंची। जिसके बाद टीम ने यहां बसे परिवारों को सर्वे शुरू कर दिया। लेखपालों की टीम टापू पर बसे परिवारों की गणना करने के साथ उनके पालतू मवेशियों की भी गणना कर रही है। वहीं यह भी जानकारी जुटाई जा रही है, कि परिवार में गृहस्थी का कितना सामान है। ताकि उसी हिसाब से प्रशासन नावों की व्यवस्था करे। प्रशासन ने मदद का जो खाका तैयार किया है, उसमें बड़ी नावों का इंतजाम करके टापू पर बसे परिवारों को उनके पालतू जानवरों के साथ में ही बाहर निकाला जाएगा। जिसके बाद टापू के बाशिंदों को सरकारी जमीन आवंटित करके बसाने का काम किया जाएगा।
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विस्थापन की भूमि पर होंगी सुविधाएं
प्रशासन ने बाढ़ व कटान पीड़ितों को विस्थापित करने की जो योजना बनाई है, उसमें बुनियादी सुविधाओं को खासी तरजीह दी गई है। विस्थापित होने वाली जगह पर प्रसाधन कक्ष को प्राथमिकता दी गई है। वहीं आबादी में रोशनी के लिए सोलर लाइट लगाने पर विचार किया जा रहा है।
सर्वे के बाद करेंगे विस्थापित
टापू पर बसे परिवारों का सर्वे किया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद प्रशासन को यह जानकारी हो जाएगी कि, कितने परिवारों की मदद करनी है। उन परिवारों को गृहस्थी के सामान के साथ टापू से निकालकर सुरक्षित ठिकाने पर बसाया जाएगा।
दीपेंद्र यादव, एसडीएम
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सीतापुर। बाढ़ व कटान पीड़ितों की मदद के लिए सरकार ने जिले को एक करोड़ रुपये भेजे हैं। एडीएम राकेश चंद्र शर्मा ने बताया कि शारदा व घाघरा की बाढ़ व कटान पीड़ितों की मदद के लिए शासन से एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी। उस मांग के अनुरूप शासन ने जिले को एक करोड़ रुपये भेजा है। इन रुपयों से बाढ़ व कटान पीड़ितों की मदद की जाएगी। जिसमें नुकसान का मुआवजा, पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराना। बाढ़ से बचाने के लिए संसाधन जुटाना आदि शामिल है। एडीएम ने बताया कि प्रशासन ने स्थिति विकराल होने से पहले ही बाढ़ से निपटने के इंतजाम कर लिए हैं। जरूरत के वक्त पीड़ितों को तत्काल सरकारी मदद पहुंचेगी।
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जानवरों को मिलेगा चारा
बाढ़ के वक्त अक्सर देखा जाता है, कि खेत व खलिहान डूबने से पशुओं को चारे की दिक्कत होने लगती है। ऐसे में पशुओं को चारा नहीं मिल पाता है। प्रशासन ने इस मुसीबत से भी निपटने का खाका तैयार कर लिया है। बाढ़ के वक्त प्रशासन पशुओं को भूसे का चारा भी उपलब्ध कराएगा। एडीएम राकेश चंद्र शर्मा ने बताया कि पशुओं के लिए पर्याप्त चारे का भी इंतजाम कर लिया गया है।
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पचीसा गांव में सर्वे शुरू
घाघरा के बीच टापू पर बसे परिवारों को विस्थापित करने के लिए प्रशासन की कवायद तेज हो गई है। मंगलवार को टापू पर बसे परिवारों का सर्वे भी शुरू कर दिया गया है। सर्वे पूरा होने के बाद प्रशासन टापू के बाशिंदों को सुरक्षित ठिकानों पर विस्थापित करेगा। मंगलवार सुबह लेखपालों की टीम नाव से पचीसा टापू के लिए रवाना हुई। करीब 5 किलोमीटर दूर तक घाघरा के पानी पर चलने के बाद टीम पचीसा टापू पर पहुंची। जिसके बाद टीम ने यहां बसे परिवारों को सर्वे शुरू कर दिया। लेखपालों की टीम टापू पर बसे परिवारों की गणना करने के साथ उनके पालतू मवेशियों की भी गणना कर रही है। वहीं यह भी जानकारी जुटाई जा रही है, कि परिवार में गृहस्थी का कितना सामान है। ताकि उसी हिसाब से प्रशासन नावों की व्यवस्था करे। प्रशासन ने मदद का जो खाका तैयार किया है, उसमें बड़ी नावों का इंतजाम करके टापू पर बसे परिवारों को उनके पालतू जानवरों के साथ में ही बाहर निकाला जाएगा। जिसके बाद टापू के बाशिंदों को सरकारी जमीन आवंटित करके बसाने का काम किया जाएगा।
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विस्थापन की भूमि पर होंगी सुविधाएं
प्रशासन ने बाढ़ व कटान पीड़ितों को विस्थापित करने की जो योजना बनाई है, उसमें बुनियादी सुविधाओं को खासी तरजीह दी गई है। विस्थापित होने वाली जगह पर प्रसाधन कक्ष को प्राथमिकता दी गई है। वहीं आबादी में रोशनी के लिए सोलर लाइट लगाने पर विचार किया जा रहा है।
सर्वे के बाद करेंगे विस्थापित
टापू पर बसे परिवारों का सर्वे किया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद प्रशासन को यह जानकारी हो जाएगी कि, कितने परिवारों की मदद करनी है। उन परिवारों को गृहस्थी के सामान के साथ टापू से निकालकर सुरक्षित ठिकाने पर बसाया जाएगा।
दीपेंद्र यादव, एसडीएम