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Sitapur News: पोषण भी करेगा मोटा अनाज, एफपीओ की अनाज किट सेवा शुरू
Sat, 27 Dec 2025 11:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sat, 27 Dec 2025 11:58 PM IST
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सीतापुर। सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माने जाने वाले मोटे अनाजों की खेती अब रेउसा ब्लॉक के ऑर्गेनिक विलेज सिकौहा में पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से की जा रही है। यहां राज्य पुरस्कृत प्रगतिशील किसान श्वेतांक त्रिपाठी गो-आधारित खेती कर रहे हैं, जिसमें वे रासायनिक खादों और कीटनाशकों की जगह अग्निहोत्र भस्म का प्रयोग करते हैं। इस पद्धति से न केवल रसायन मुक्त फसलें तैयार हो रही हैं, बल्कि मिट्टी की सेहत में भी सुधार हो रहा है। श्वेतांक से प्रेरित होकर अब क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसान इस मुहिम से जुड़ चुके हैं।
जनमानस को शुद्ध और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए यहां सिकौहा ऑर्गेनिक एफपीओ का गठन किया गया है। इसके माध्यम से अब लोगों को उनकी आवश्यकता के अनुसार रसोई उपयोगी मोटे अनाज की किट उपलब्ध कराई जाएगी। इस किट में देसी बीजों से तैयार गो-आधारित उत्पाद शामिल होंगे, जिनमें रमकजरा, रमकजरी, विशुन पराग और काला नमक जैसे चावल के साथ-साथ बेलर मूंगफली भी उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा, किट में सोना मोती, ग्वाला और बंशी प्रजाति के गेहूं का आटा और बेझरा, मसूर, अरहर, उरद कतिकह जैसी पारंपरिक दालें भी शामिल होंगी।
किसान श्वेतांक त्रिपाठी का कहना है कि हाइब्रिड और उन्नत बीजों से भूख तो मिट जाती है, लेकिन शरीर को पोषण और विटामिन नहीं मिल पाते। इसे पूरा करने के लिए अब कोदो, कंगनी, कुटकी, ज्वार, बाजरा, रागी और सफेद मक्का के चावल व आटे के साथ ही छह प्रजाति की विशेष दालें आम लोगों को सुलभ कराई जाएंगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य लोगों की थाली तक शुद्ध और औषधीय गुणों से भरपूर अनाज पहुंचाना है।
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जनमानस को शुद्ध और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए यहां सिकौहा ऑर्गेनिक एफपीओ का गठन किया गया है। इसके माध्यम से अब लोगों को उनकी आवश्यकता के अनुसार रसोई उपयोगी मोटे अनाज की किट उपलब्ध कराई जाएगी। इस किट में देसी बीजों से तैयार गो-आधारित उत्पाद शामिल होंगे, जिनमें रमकजरा, रमकजरी, विशुन पराग और काला नमक जैसे चावल के साथ-साथ बेलर मूंगफली भी उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा, किट में सोना मोती, ग्वाला और बंशी प्रजाति के गेहूं का आटा और बेझरा, मसूर, अरहर, उरद कतिकह जैसी पारंपरिक दालें भी शामिल होंगी।
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किसान श्वेतांक त्रिपाठी का कहना है कि हाइब्रिड और उन्नत बीजों से भूख तो मिट जाती है, लेकिन शरीर को पोषण और विटामिन नहीं मिल पाते। इसे पूरा करने के लिए अब कोदो, कंगनी, कुटकी, ज्वार, बाजरा, रागी और सफेद मक्का के चावल व आटे के साथ ही छह प्रजाति की विशेष दालें आम लोगों को सुलभ कराई जाएंगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य लोगों की थाली तक शुद्ध और औषधीय गुणों से भरपूर अनाज पहुंचाना है।
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