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प्राइमरी स्कूलों में हंसते-रोते पहुंचे बच्चे
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स्टेडी वेल पब्लिक स्कूल पहले दिन पहुंची बच्ची को चुप कराती क्लास टीचर। (संवाद)
- फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। कोरोना मुक्त जिले में बुधवार को नौनिहाल हंसते-रोते विद्यालय पहुंचे। कोई अपनी मम्मी का हाथ नहीं छोड़ रहा था तो कोई पापा के गले लगकर रो रहा था। मम्मी-पापा ने दुलारते हुए किसी तरह उन्हें विद्यालय के अंदर पहुंचाया। कुछ इस तरह के नजारे पहले दिन बुधवार को स्कूलों के बाहर दिखाई दिए। लंबे समय बाद खुले प्राइमरी स्कूलों में रौनक आई। सरकारी विद्यालयों में छात्र संख्या कम रही। निजी स्कूलों में कक्षाएं भरी रही। कई जगहों पर कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ।
कोरोना की दूसरी लहर थमने के बाद बुधवार को प्राइमरी विद्यालय खुल गए। कक्षा एक से पांचवीं तक की कक्षाएं शुरू हो गई। पहले दिन होने के कारण बच्चों को स्कूल तक भेजने में माता-पिता को अपने लाड़ले के कई नखरे सहने पड़े। सुबह आठ बजे एलपीएस स्कूल के बाहर अभिभावक बच्चों को ले जाते हुए दिखाई दिए।
कई बच्चे रो रहे थे तो मम्मी ने समझाया बेटा कुछ देर बाद छुट्टी हो जाएगी। फिर से आ जाएंगे। एक बच्चा अपने पिता के चिपक कर रो रहा था। पापा बोले, बेटा आपको गाड़ी से वापस घर ले चलूंगा। आप स्कूल में बैठो मैं अभी आता हूं। इसी प्रकार स्टडीवेल पब्लिक स्कूल में कई बच्चे स्कूल के अंदर तो आ गए लेकिन वह अपनी मम्मी व पापा की याद करके रोने लगे।
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इस पर क्लॉस टीचर ने उन्हें समझाया। कुछ देर बाद घर चले जाना। इस तरह के तमाम नजारे विद्यालयों के अंदर व बाहर दिखाई दिए। प्राइवेट स्कूलों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराते हुए नौनिहालों को पढ़ाया गया। पहले दिन बच्चों को रोली चंदन का टीका लगाकर उनका स्वागत किया गया। प्राथमिक वािद्यालय इस्माइलपुर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो सका।
यहां पर एक-दूसरे के पास बैठकर बच्चे पढ़ते हुए दिखाई दिए। यहां पर बच्चे रो भी रहे थे, लेकिन उन्हें दुलारने वाला कोई नहीं था। प्राथमिक विद्यालय प्रेमनगर में 11 बजे शिक्षक व बच्चे नदारद मिले। केवल स्कूल में रसोइयां मौजूद मिली। कंपोजिट विद्यालय अंबेडकर नगर में बच्चे झूला झूलते हुए दिखाई दिए।
कोरोना को लेकर बनी हुई है चिंता
जिला सीतापुर भले ही कोरोनामुक्त हो गया हो, लेकिन माता-पिता को अपने बच्चों को लेकर कोरोना को लेकर काफी चिन्ता बनी हुई है। एलपीएस स्कूल के बाहर एक बच्ची स्कूल के अंदर जाने लगी तो मम्मी बोली बेटा मास्क लगा लो, लेकिन वह मास्क न लगाने की बात कहती रही। आखिर में मम्मी ने उसे कोरोना की बात कहकर अपने हाथ से ही मास्क पहना दिया। उसके बाद बच्ची स्कूल के अंदर गई।
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कोरोना की दूसरी लहर थमने के बाद बुधवार को प्राइमरी विद्यालय खुल गए। कक्षा एक से पांचवीं तक की कक्षाएं शुरू हो गई। पहले दिन होने के कारण बच्चों को स्कूल तक भेजने में माता-पिता को अपने लाड़ले के कई नखरे सहने पड़े। सुबह आठ बजे एलपीएस स्कूल के बाहर अभिभावक बच्चों को ले जाते हुए दिखाई दिए।
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कई बच्चे रो रहे थे तो मम्मी ने समझाया बेटा कुछ देर बाद छुट्टी हो जाएगी। फिर से आ जाएंगे। एक बच्चा अपने पिता के चिपक कर रो रहा था। पापा बोले, बेटा आपको गाड़ी से वापस घर ले चलूंगा। आप स्कूल में बैठो मैं अभी आता हूं। इसी प्रकार स्टडीवेल पब्लिक स्कूल में कई बच्चे स्कूल के अंदर तो आ गए लेकिन वह अपनी मम्मी व पापा की याद करके रोने लगे।
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इस पर क्लॉस टीचर ने उन्हें समझाया। कुछ देर बाद घर चले जाना। इस तरह के तमाम नजारे विद्यालयों के अंदर व बाहर दिखाई दिए। प्राइवेट स्कूलों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराते हुए नौनिहालों को पढ़ाया गया। पहले दिन बच्चों को रोली चंदन का टीका लगाकर उनका स्वागत किया गया। प्राथमिक वािद्यालय इस्माइलपुर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो सका।
यहां पर एक-दूसरे के पास बैठकर बच्चे पढ़ते हुए दिखाई दिए। यहां पर बच्चे रो भी रहे थे, लेकिन उन्हें दुलारने वाला कोई नहीं था। प्राथमिक विद्यालय प्रेमनगर में 11 बजे शिक्षक व बच्चे नदारद मिले। केवल स्कूल में रसोइयां मौजूद मिली। कंपोजिट विद्यालय अंबेडकर नगर में बच्चे झूला झूलते हुए दिखाई दिए।
कोरोना को लेकर बनी हुई है चिंता
जिला सीतापुर भले ही कोरोनामुक्त हो गया हो, लेकिन माता-पिता को अपने बच्चों को लेकर कोरोना को लेकर काफी चिन्ता बनी हुई है। एलपीएस स्कूल के बाहर एक बच्ची स्कूल के अंदर जाने लगी तो मम्मी बोली बेटा मास्क लगा लो, लेकिन वह मास्क न लगाने की बात कहती रही। आखिर में मम्मी ने उसे कोरोना की बात कहकर अपने हाथ से ही मास्क पहना दिया। उसके बाद बच्ची स्कूल के अंदर गई।