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आदर्शों को आत्मसात करें कार्यकर्ता
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सीतापुर। प्रखर समाजवादी चिंतक, छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि पर बुधवार को सपाइयों ने उनके चित्र पर फूल-मालाएं चढ़ाई और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। बाद में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने कार्यकर्ताओं से छोटे लोहिया के आदर्शों को आत्मसात कर उनके बताए रास्ते पर चलने की नसीहत भी दी।
शहर के टाउन हाल स्थित जिला सपा कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में पार्टी जिलाध्यक्ष क्षत्रपाल सिंह यादव की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने जनेश्वर मिश्र के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। बाद में हुई गोष्ठी में जिलाध्यक्ष ने कहा कि जनेश्वर मिश्र का जन्म 5 अगस्त 1933 को बलिया के शुभनथहीं गांव में हुआ था। उनके पिता रंजीत मिश्र किसान थे।
उन्होंने बताया कि बलिया में प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद छोटे लोहिया 1953 में प्रयागराज पहुंचे जो उनका कार्यक्षेत्र रहा। जनेश्वर को आजाद भारत के विकास की राह समाजवादी सपनों के साथ आगे बढ़ने में दिखी और वह समाजवादी आंदोलन में इतना पगे कि उन्हें लोग छोटे लोहिया के तौर पर ही जानने लगे। छात्रों के मुद्दे पर उन्होंने कई आंदोलन छेड़े जिसमें छात्रों ने उनका बढ़-चढ़ कर साथ दिया।
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बताया कि 1967 में उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ। वह जेल में थे तभी लोकसभा का चुनाव आ गया। छुन्नन गुरु व सालिगराम जायसवाल ने उन्हें फूलपुर से विजयलक्ष्मी पंडित के खिलाफ चुनाव लड़ाया। चुनाव में सात दिन बाकी था, तब उन्हें जेल से रिहा किया गया। चुनाव में जनेश्वर को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद विजय लक्ष्मी राजदूत बनीं।
फूलपुर सीट पर 1969 में उपचुनाव हुआ तो जनेश्वर मिश्र सोशलिस्ट पार्टी से मैदान में उतरे और जीते। लोकसभा में पहुंचे तो राज नारायण ने छोटे लोहिया का नाम दिया, छोटे लोहिया समाजवाद की परिभाषा में यही कहते थे कि समता और संपन्नता लाना ही समाजवाद है।
इस अवसर पर पूर्व विधायक अनूप गुप्ता, अनिल वर्मा, फिदा हुसैन अंसारी, रमेश चंद्र निषाद, कार्यालय प्रभारी जय सिंह यादव, कौशलेंद्र सिंह, सुहैल अहमद, मसूद आलम व संतोष कुमार आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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शहर के टाउन हाल स्थित जिला सपा कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में पार्टी जिलाध्यक्ष क्षत्रपाल सिंह यादव की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने जनेश्वर मिश्र के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। बाद में हुई गोष्ठी में जिलाध्यक्ष ने कहा कि जनेश्वर मिश्र का जन्म 5 अगस्त 1933 को बलिया के शुभनथहीं गांव में हुआ था। उनके पिता रंजीत मिश्र किसान थे।
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उन्होंने बताया कि बलिया में प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद छोटे लोहिया 1953 में प्रयागराज पहुंचे जो उनका कार्यक्षेत्र रहा। जनेश्वर को आजाद भारत के विकास की राह समाजवादी सपनों के साथ आगे बढ़ने में दिखी और वह समाजवादी आंदोलन में इतना पगे कि उन्हें लोग छोटे लोहिया के तौर पर ही जानने लगे। छात्रों के मुद्दे पर उन्होंने कई आंदोलन छेड़े जिसमें छात्रों ने उनका बढ़-चढ़ कर साथ दिया।
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बताया कि 1967 में उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ। वह जेल में थे तभी लोकसभा का चुनाव आ गया। छुन्नन गुरु व सालिगराम जायसवाल ने उन्हें फूलपुर से विजयलक्ष्मी पंडित के खिलाफ चुनाव लड़ाया। चुनाव में सात दिन बाकी था, तब उन्हें जेल से रिहा किया गया। चुनाव में जनेश्वर को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद विजय लक्ष्मी राजदूत बनीं।
फूलपुर सीट पर 1969 में उपचुनाव हुआ तो जनेश्वर मिश्र सोशलिस्ट पार्टी से मैदान में उतरे और जीते। लोकसभा में पहुंचे तो राज नारायण ने छोटे लोहिया का नाम दिया, छोटे लोहिया समाजवाद की परिभाषा में यही कहते थे कि समता और संपन्नता लाना ही समाजवाद है।
इस अवसर पर पूर्व विधायक अनूप गुप्ता, अनिल वर्मा, फिदा हुसैन अंसारी, रमेश चंद्र निषाद, कार्यालय प्रभारी जय सिंह यादव, कौशलेंद्र सिंह, सुहैल अहमद, मसूद आलम व संतोष कुमार आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।