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एक ही घर में दोबारा पहुंची अध्यक्ष की कुर्सी

Sat, 03 Jul 2021 11:18 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jul 2021 11:18 PM IST
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Chairperson's chair reached again in the same house
सीतापुर। श्रद्धा सागर की जीत के साथ ही जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष पद का एक नया इतिहास बन गया है। राजनीतिक पंडित बताते हैं कि जिले में पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी एक ही घर में दोबारा पहुंची है। जिले में 1926 से शुरू हुआ जिला पंचायत अध्यक्ष का सफर दोबारा किसी भी घर की दहलीज पार नहीं कर सका है। परिवार के मुखिया शिवकुमार गुप्ता ने पहले अपने छोटे भाई की पत्नी व इस बार अपनी बहू को कुर्सी दिलाकर इतिहास रच दिया है।
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राजनीतिक जानकार बताते हैं कि जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर पहली बार राजाराम पाल विराजमान हुए थे। राजाराम 1926 से 1933 तक इस पद पर रहे। उनका कार्यकाल जिले में आजादी से पहले का था। उसके बाद जिले में कई दिग्गज इस कुर्सी पर बैठे और वह उसका भरपूर मजा लेते रहे। लेकिन किसी भी घराने को एक बार कुर्सी मिलने के बाद दोबारा उनको उस पर बैठना नसीब नहीं हुआ। पिछले एक दशक की बात की जाए तो बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे रामहेत भारती ने 2014 में अपनी पत्नी ऊषा भारती को इस कुर्सी पर बैठाया।
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उसके बाद विधानसभा चुनाव में बसपा की करारी हार हुई। सपा सत्ता में आई तो जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर अविश्वास प्रस्ताव की चर्चाएं तेज हो गईं। सपा, ऊषा भारती के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई। जिसमें ऊषा भारती की कुर्सी चली गई। सपा नेता शिवकुमार गुप्ता ने कुर्सी हथियाने के लिए पुरजोर कोशिश की। अपने भाई की पत्नी मधु गुप्ता को सपा का प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारा और कुर्सी हथियाने में सफल भी रहे। मधु गुप्ता ने जून 2014 से जनवरी 2016 तक कुर्सी पर रहीं।
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उसके बाद सपा सरकार में चुनाव हुआ, जिसमें सपा ने शिवकुमार गुप्ता की पत्नी सीमा गुप्ता को प्रत्याशी बनाया। उस समय सपा विधायक रहे रामपाल यादव ने अपने बेटे जितेंद्र यादव को चुनाव लड़वाने के लिए पुरजोर कोशिश की। जब उनको टिकट नहीं मिला तो जितेंद्र को निर्दलीय ही चुनाव लड़वा दिया। आखिर में मधु गुप्ता को सपा सरकार में सपा प्रत्याशी होने के बावजूद हार का मुंह देखना पड़ा था।

जिले में सपा की किरकिरी होने पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कई विधायक को पार्टी से निकाल दिया था। बाद में कुछ महीनों बाद इनको वापस बुला लिया गया था। जनवरी 2016 से जनवरी 2021 तक जितेंद्र यादव कुर्सी पर जमे रहे। इस बार जब चुनाव हुआ तो सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए शिवकुमार गुप्ता ने अपनी बहू श्रद्धा सागर को भाजपा के टिकट से चुनाव लड़वाया, जिसमे वह सफल रहे। यानी जिले में दूसरी बार एक ही घर में जिला पंचायत की कुर्सी पहुंची है।
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