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जिला अस्पताल में गहराया खून का संकट
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जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक।
- फोटो : SITAPUR
सीतापुर। जिला अस्पताल में खून का संकट खड़ा हो गया है। 300 यूनिट वाले ब्लॅड बैंक में मौजूदा समय में महज 15 यूनिट ही खून बचा है। खून की कमी से रोजाना मरीज लौट रहे हैं। इससे उनकी जान पर आफत आ जाती है। बैंक में महज बी पॉजिटिव खून ही उपलब्ध है। इसके अलावा अन्य किसी भी ग्रुप का खून नहीं है। ऐसे में इमरजेंसी में अगर किसी को खून की जरूरत पड़ जाए तो यहां पर मिलना मुश्किल है।
जिला अस्पताल में ब्लड बैंक है। इस बैंक के जरिए सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को खून दिया जाता है। इसके अलावा अन्य प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों को खून की जरूरत होने पर इस बैंक से ही खून की सुविधा मिलती है। इसी वजह से इस बैंक की क्षमता 300 यूनिट की है। एक साथ जब बैंक में पूरा ब्लॅड होता है तो खून की कोई किल्लत नहीं रह जाती है। लेकिन इधर कोरोना के कारण कार्यक्रमों पर रोक लगी रही। ब्लॅड शिविर भी आयोजित नहीं हो सके है।
इसकी वजह से लगातार डिमांड बढ़ती चली गई। अब खून का संकट आ गया है। इस समय बैंक में केवल 15 यूनिट ही खून बचा है। वह भी केवल बी पॉजिटिव ग्रुप का है। अगर इस ग्रुप के अलावा किसी को अन्य ग्रुप की जरूरत पड़ जाए तो उसको इस बैंक से खून मिलना मुश्किल हो रहा है। जिला अस्पताल प्रशासन के मुताबिक रोजाना 10 से 15 यूनिट ब्लॅड बैंक से जरूरतमंदों को खून जाता है। ऐसे में यह लोग रोजाना खून लेने आते है तो उनसे डोनेटर लाने की बात कहकर वापस कर दिया जाता है।
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अगर वह डोनेटर की व्यवस्था कर लेते है, तभी उनको खून उपलब्ध हो पाता है। सबसे अधिक इमरजेंसी के समय हो रही है। अगर कोई इमरजेंसी में खून की जरूरत पड़ जाए तो उसको यहां से खून मिलना मुश्किल हो रहा है। इस कमी लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।
कोरोना के कारण खड़ी हुई दिक्कत
जिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कोरोना की वजह से यह दिक्कत आई है। वैसे दो माह के बीच में कोई न कोई संस्था ब्लॅड शिविर आयोजित करा देती थी। इन शिविरों में जरूरत के मुताबिक खून मिल जाता था। मार्च के बाद लंबा लॉकडाउन चला। उस समय ब्लॅड बैंक में पर्याप्त खून था। जरूरतमंदों को खून मिल जाता था। इससे लॉकडाउन के समय कोई दिक्कत नहीं आई। इधर, शिविर आयोजित न होने से दिक्कत आ गई है।
रक्तदानी होने के बाद भी रहती समस्या
जरूरतमंदों की सबसे बड़ी समस्या यह है उसी ग्रुप के खून की व्यवस्था करनी है। अगर कोई मरीज ओ पॉजिटिव है। उसको खून की जरूरत पड़ जाती है, उसके पास रक्तदानी है, जो ब्लॅड बैंक पहुंचकर खून देने को राजी होते है। अगर उनका खून ओ पॉजिटिव नहीं है तो मरीज को अपने ग्रुप का खून का इंतजाम करने में पसीने आ जाता है। वह सबसे पहले उसी ग्रुप के इंसान को तलाशे। उसके बाद ही वह खून की व्यवस्था कर सकता है। इस समस्या के कारण मरीजों को काफी दिक्कतें आ रही है।
खून की कमी है। ब्लॅड शिविर लगाने वाली संस्थाएं आगे आएं। शिविर आयोजित कर खून की कमी को दूर करने में मदद करें, जिससे लोगों को जरूरत के समय खून मिल सके।
- डॉ. प्रवीन श्रीवास्तव, जिला ब्लॅड बैंक प्रभारी
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जिला अस्पताल में ब्लड बैंक है। इस बैंक के जरिए सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को खून दिया जाता है। इसके अलावा अन्य प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों को खून की जरूरत होने पर इस बैंक से ही खून की सुविधा मिलती है। इसी वजह से इस बैंक की क्षमता 300 यूनिट की है। एक साथ जब बैंक में पूरा ब्लॅड होता है तो खून की कोई किल्लत नहीं रह जाती है। लेकिन इधर कोरोना के कारण कार्यक्रमों पर रोक लगी रही। ब्लॅड शिविर भी आयोजित नहीं हो सके है।
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इसकी वजह से लगातार डिमांड बढ़ती चली गई। अब खून का संकट आ गया है। इस समय बैंक में केवल 15 यूनिट ही खून बचा है। वह भी केवल बी पॉजिटिव ग्रुप का है। अगर इस ग्रुप के अलावा किसी को अन्य ग्रुप की जरूरत पड़ जाए तो उसको इस बैंक से खून मिलना मुश्किल हो रहा है। जिला अस्पताल प्रशासन के मुताबिक रोजाना 10 से 15 यूनिट ब्लॅड बैंक से जरूरतमंदों को खून जाता है। ऐसे में यह लोग रोजाना खून लेने आते है तो उनसे डोनेटर लाने की बात कहकर वापस कर दिया जाता है।
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अगर वह डोनेटर की व्यवस्था कर लेते है, तभी उनको खून उपलब्ध हो पाता है। सबसे अधिक इमरजेंसी के समय हो रही है। अगर कोई इमरजेंसी में खून की जरूरत पड़ जाए तो उसको यहां से खून मिलना मुश्किल हो रहा है। इस कमी लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।
कोरोना के कारण खड़ी हुई दिक्कत
जिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कोरोना की वजह से यह दिक्कत आई है। वैसे दो माह के बीच में कोई न कोई संस्था ब्लॅड शिविर आयोजित करा देती थी। इन शिविरों में जरूरत के मुताबिक खून मिल जाता था। मार्च के बाद लंबा लॉकडाउन चला। उस समय ब्लॅड बैंक में पर्याप्त खून था। जरूरतमंदों को खून मिल जाता था। इससे लॉकडाउन के समय कोई दिक्कत नहीं आई। इधर, शिविर आयोजित न होने से दिक्कत आ गई है।
रक्तदानी होने के बाद भी रहती समस्या
जरूरतमंदों की सबसे बड़ी समस्या यह है उसी ग्रुप के खून की व्यवस्था करनी है। अगर कोई मरीज ओ पॉजिटिव है। उसको खून की जरूरत पड़ जाती है, उसके पास रक्तदानी है, जो ब्लॅड बैंक पहुंचकर खून देने को राजी होते है। अगर उनका खून ओ पॉजिटिव नहीं है तो मरीज को अपने ग्रुप का खून का इंतजाम करने में पसीने आ जाता है। वह सबसे पहले उसी ग्रुप के इंसान को तलाशे। उसके बाद ही वह खून की व्यवस्था कर सकता है। इस समस्या के कारण मरीजों को काफी दिक्कतें आ रही है।
खून की कमी है। ब्लॅड शिविर लगाने वाली संस्थाएं आगे आएं। शिविर आयोजित कर खून की कमी को दूर करने में मदद करें, जिससे लोगों को जरूरत के समय खून मिल सके।
- डॉ. प्रवीन श्रीवास्तव, जिला ब्लॅड बैंक प्रभारी