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Sitapur News: शोभा यात्रा के साथ हुआ भागवत कथा का शुभारंभ
Mon, 15 Dec 2025 11:56 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 15 Dec 2025 11:56 PM IST
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नैमिषारण्य। कालीपीठ में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ सोमवार को भव्य शोभा यात्रा के साथ हुआ। शोभा यात्रा में बड़ी संख्या में भक्तगण पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ शामिल हुए। इस दौरान पूरा माहौल श्री हरि व कृष्णा के जयघोष से गूंजता रहा। भागवत कथा के पहले दिन महाराष्ट्र से आए प्रवाचक चारुदत्त आफले ने नैमिषारण्य की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि नैमिषारण्य की भूमि पर श्रीमद्भागवत कथा सुनने का सौभाग्य किसी साधारण पुण्य या व्यक्तिगत सत्कर्मों से प्राप्त नहीं होता। यह हमारे दिवंगत पूर्वजों की कृपा से संभव होता है। जब उनके आशीर्वाद हमारे ऊपर बरसते हैं, तभी व्यक्ति को नैमिषारण्य आकर कथा सुनने का अवसर मिलता है। इस पावन धरा पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निरंतर वास है। यहां नारायणी देवी अरण्य व वृक्ष स्वरूप में विराजमान हैं।
प्रवाचक ने बताया कि नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषि मुनि निरंतर तपस्या में लीन हैं। यह 33 करोड़ देवी देवताओं का निज निवास स्थान माना गया है। ऐसे दिव्य स्थल पर अधिक से अधिक भगवान के नाम का स्मरण और उच्चारण करना चाहिए। पद्म पुराण के अनुसार नैमिषारण्य में आगमन से व्यक्ति की 21 पीढ़ियों का उद्धार होता है। कहा कि हम सभी अत्यंत सौभाग्यशाली हैं कि उस पवित्र भूमि पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हो रहा है। आयोजक कालीपीठ के महंत भास्कर शास्त्री ने बताया कि यह श्रीमद्भागवत कथा 21 दिसंबर तक निरंतर कालीपीठ नैमिषारण्य में प्रवाहित होगी।
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इस मौके पर कालीपीठ संस्थान ने सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजन व आवास की समुचित व्यवस्था की है। कथा की आरती में कालीपीठाधीश्वर गोपाल शास्त्री महाराज सहित महाराष्ट्र से आए अनेक श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
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उन्होंने कहा कि नैमिषारण्य की भूमि पर श्रीमद्भागवत कथा सुनने का सौभाग्य किसी साधारण पुण्य या व्यक्तिगत सत्कर्मों से प्राप्त नहीं होता। यह हमारे दिवंगत पूर्वजों की कृपा से संभव होता है। जब उनके आशीर्वाद हमारे ऊपर बरसते हैं, तभी व्यक्ति को नैमिषारण्य आकर कथा सुनने का अवसर मिलता है। इस पावन धरा पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निरंतर वास है। यहां नारायणी देवी अरण्य व वृक्ष स्वरूप में विराजमान हैं।
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प्रवाचक ने बताया कि नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषि मुनि निरंतर तपस्या में लीन हैं। यह 33 करोड़ देवी देवताओं का निज निवास स्थान माना गया है। ऐसे दिव्य स्थल पर अधिक से अधिक भगवान के नाम का स्मरण और उच्चारण करना चाहिए। पद्म पुराण के अनुसार नैमिषारण्य में आगमन से व्यक्ति की 21 पीढ़ियों का उद्धार होता है। कहा कि हम सभी अत्यंत सौभाग्यशाली हैं कि उस पवित्र भूमि पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हो रहा है। आयोजक कालीपीठ के महंत भास्कर शास्त्री ने बताया कि यह श्रीमद्भागवत कथा 21 दिसंबर तक निरंतर कालीपीठ नैमिषारण्य में प्रवाहित होगी।
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इस मौके पर कालीपीठ संस्थान ने सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजन व आवास की समुचित व्यवस्था की है। कथा की आरती में कालीपीठाधीश्वर गोपाल शास्त्री महाराज सहित महाराष्ट्र से आए अनेक श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया।