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‘साइकोलॉजिकल दबाव’ से घुटने टेकेंगे अपराधी
Sitapur
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:30 AM IST
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सीतापुर। अपराधियों से जुर्म और सच कबूलवाने के लिए थर्ड डिग्री इस्तेमाल करने से अक्सर सुर्खियों में रहने वाली पुलिस अब अपना खौफनाक चरित्र छोड़ कर हाईटेक तरीके अपनाने की तैयारी में है। पुलिस अब जरायम पेशा लोगों पर ‘साइकोलॉजिकल इम्पैक्ट’ को हथियार बना कर उनसे सच उगलवाएगी। पुलिसवालों को सिर्फ सच उगलवाना ही नहीं, मौका-ए-वारदात से साक्ष्य संकलन करने के हाईटेक तरीके बताए जाएंगे।
अपराधियों से सच कबूलवाने के लिए पुलिस अब ‘साइकोलॉजिकल इम्पैक्ट’ को हथियार बनाएगी। इसके कोर्स के लिए सीतापुर पीटीसी में कवायद तेज कर दी गई हैं। क्लास रूमों में प्रोजेक्टर लगवाए जा रहे हैं। ताकि जवानों को भलीभांति प्रशिक्षण दिया जा सके। सीतापुर पुलिस ट्रेनिंग सेंटर के सूत्रों का कहना है कि अपराधियों से सच उगलवाने के पुराने तरीकों पर मानवाधिकार आयोग जैसी एजेंसियों का अक्सर पहरा और विरोध रहता है। आए दिन होने वाली शिकायतों और जांचों से पुलिस कर्मियों के हांथ बंधे से रहते हैं। जिससे वह अपराधियों से सच उगलवाने में थर्ड डिग्री का इस्तेमाल नहीं कर पाते। ऐसे सूरत में दुर्दांत अपराधी जरायम कबूल नहीं करते और तमाम केसों का वर्कआउट नहीं पाता। सूत्रों का कहना है कि इसी को देखते हुए अब पुलिस ‘साइकोलॉजिकल इम्पैक्ट’ को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की शुरूआत कर रही है। लिहाजा अब तमाम ऐसी बारीकियों के बारे में जवानों को ट्रेंड करने के लिए सीतापुर पुलिस ट्रेनिंग में नए अंदाज में ट्रेनिंग देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पीटीसी के क्लास रूमों में प्रोजेक्टर पर फिल्म के माध्यम से जवानों को हाईटेक अंदाज में ट्रेनिंग की बारीकियां सिखाई जाएंगी। प्रोजेक्टर और मल्टीमीडिया के जरिए नारकोटिक डिटेक्शन, गिरफ्तारी के नए तरीके , साक्ष्य संकलन में क्या-क्या और कैसे करना है, आदि के तरीके सिखाए जाएंगे। अपराधियों से जुर्म कबूलवाने व उनसे सच जानने के लिए थर्ड डिग्री नहीं, ‘साइकोलॉजिकल इम्पैक्ट’ से सच उगलवाया जाएगा।
पीटीसी के अधिकारियों कहना है कि ट्रेनिंग सेंटर में जवानों को हाईटेक तरीके से ट्रेनिंग देने के लिए 30 प्रोजेक्टर लगाए जा रहे हैं। इनको लगाने में करीब तीन लाख रुपए का खर्च आ रहा है। इसके अलावा मल्टीमीडिया का भी सहारा लिया जाएगा। जवानों को ट्रेनिंग के नए तरीके सिखाने के लिए पर्दे पर दिखाया जाएगा कि साक्ष्य संकलन कैसे करना है। अपराधियों से कैसे पूछताछ करनी है और उन्हें गिरफ्तार करते वक्त कौन-कौन सी सावधानियां अपनानी हैं।
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अपराधियों से सच कबूलवाने के लिए पुलिस अब ‘साइकोलॉजिकल इम्पैक्ट’ को हथियार बनाएगी। इसके कोर्स के लिए सीतापुर पीटीसी में कवायद तेज कर दी गई हैं। क्लास रूमों में प्रोजेक्टर लगवाए जा रहे हैं। ताकि जवानों को भलीभांति प्रशिक्षण दिया जा सके। सीतापुर पुलिस ट्रेनिंग सेंटर के सूत्रों का कहना है कि अपराधियों से सच उगलवाने के पुराने तरीकों पर मानवाधिकार आयोग जैसी एजेंसियों का अक्सर पहरा और विरोध रहता है। आए दिन होने वाली शिकायतों और जांचों से पुलिस कर्मियों के हांथ बंधे से रहते हैं। जिससे वह अपराधियों से सच उगलवाने में थर्ड डिग्री का इस्तेमाल नहीं कर पाते। ऐसे सूरत में दुर्दांत अपराधी जरायम कबूल नहीं करते और तमाम केसों का वर्कआउट नहीं पाता। सूत्रों का कहना है कि इसी को देखते हुए अब पुलिस ‘साइकोलॉजिकल इम्पैक्ट’ को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की शुरूआत कर रही है। लिहाजा अब तमाम ऐसी बारीकियों के बारे में जवानों को ट्रेंड करने के लिए सीतापुर पुलिस ट्रेनिंग में नए अंदाज में ट्रेनिंग देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पीटीसी के क्लास रूमों में प्रोजेक्टर पर फिल्म के माध्यम से जवानों को हाईटेक अंदाज में ट्रेनिंग की बारीकियां सिखाई जाएंगी। प्रोजेक्टर और मल्टीमीडिया के जरिए नारकोटिक डिटेक्शन, गिरफ्तारी के नए तरीके , साक्ष्य संकलन में क्या-क्या और कैसे करना है, आदि के तरीके सिखाए जाएंगे। अपराधियों से जुर्म कबूलवाने व उनसे सच जानने के लिए थर्ड डिग्री नहीं, ‘साइकोलॉजिकल इम्पैक्ट’ से सच उगलवाया जाएगा।
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पीटीसी के अधिकारियों कहना है कि ट्रेनिंग सेंटर में जवानों को हाईटेक तरीके से ट्रेनिंग देने के लिए 30 प्रोजेक्टर लगाए जा रहे हैं। इनको लगाने में करीब तीन लाख रुपए का खर्च आ रहा है। इसके अलावा मल्टीमीडिया का भी सहारा लिया जाएगा। जवानों को ट्रेनिंग के नए तरीके सिखाने के लिए पर्दे पर दिखाया जाएगा कि साक्ष्य संकलन कैसे करना है। अपराधियों से कैसे पूछताछ करनी है और उन्हें गिरफ्तार करते वक्त कौन-कौन सी सावधानियां अपनानी हैं।
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