हर गली-कूचे में चल रहा अस्पताल

Sitapur Updated Mon, 20 Jan 2014 05:45 AM IST
सीतापुर। शहर समेत ग्रामीण इलाकों में अवैध नर्सिंग होम की भरमार है। हर गली में छोटे-बड़े नर्सिंग होम और क्लीनिक खुले हैं। ये मरीजों से मनचाहा पैसा वसूल रहे हैं। स्वास्थ्य महकमे में महज 26 नर्सिंग होम पंजीकृत हैं। जबकि इसे चार-पांच गुना ज्यादा बगैर रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं। खास बात तो यह है कि अस्पताल में फायर सेफ्टी, मरीजों को आने ले जाने के रास्ते और ऑपरेशन थिएटर भी मानकों के लिहाज से सुरक्षित नहीं हैं। यही नहीं इनका स्टाफ भी अनट्रेंड होता है। ऐसे में जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

पांच सौ से ज्यादा क्लीनिक भी
स्वास्थ्य विभाग के जानकारों की मानें तो जिले में पांच सौ ज्यादा क्लीनिक रजिस्टर्ड हैं। जबकि जिले में करीब 800 क्लीनिक चल रहे हैं। इन क्लीनिकों के जरिए झोलाछाप गरीबों को ठग रहे हैं।

नर्सिंग होम के ये हैं मानक
भूखंड का क्षेत्रफल कम से कम 200 वर्ग मीटर होना चाहिए
12 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर अधिकतम 10 शैय्याओं का नर्सिंग होम खोला जा सकता है।
प्रत्येक 100 वर्ग मीटर तल क्षेत्रफल पर एक कार पार्किंग होनी जरूरी है।
कोई भी नर्सिंग होम बगैर प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ के नहीं चलेगा।
नर्सिंग होम में खुले डाग्नोस्टिक सेंटर का भी रजिस्ट्रेशन जरूरी।
नर्सिंग होम में कार्यरत स्टाफ, डॉक्टर से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ के पास नेम प्लेट लगी यूनिफॉर्म जरूरी।
ऑक्सीजन सिलेंडर से लेकर अलमारी की व्यवस्था हो।
20 शैय्याओं के नर्सिंग होम में कम से कम तीन नर्सें अवश्य हों।
नर्सिंग होम में मेडिकल स्टोर होने पर एक फार्मासिस्ट जरूरी।

गर्भपात के लिए ये है गाइड लाइन
स्त्री रोग विशेषज्ञ या ट्रेंड एमबीबीएस ही कर सकेंगे गर्भपात
संबंधित महिला को संक्रमण न हो इसके लिए साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था
गर्भपात के लिए पर्याप्त संसाधन
12 सप्ताह तक के भ्रूण का हो सकेगा गर्भपात
विशेष परिस्थितियों में 20 सप्ताह तक के भ्रूण का कंप्लीट ओटी सेटअप में (गाइनोकोलोजिस्ट) गर्भपात कर सकेंगे।

‘जो अस्पताल रजिस्टर्ड नहीं हैं, वह गैर कानूनी हैं। सभी को पंजीकरण कराने के लिए कहा गया है। जल्द ही ऐसे अस्पतालों की चरणबद्ध तरीके से जांच की जाएगी। अगर अस्पताल मानकों के अनुरूप नहीं मिले तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। अस्पताल और नर्सिंग होम के अलावा क्लीनिकों का भी पंजीकरण जरूरी है।

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