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अब तक 2218 ने कराया रजिस्ट्रेशन
Sitapur
Updated Sat, 18 Jan 2014 05:46 AM IST
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सीतापुर। शासन के फरमान पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने जिले में भी अभियान चला रखा है। अभियान के जरिए समूचे जनपद में एफएसडीए टीम ने अब तक 2218 खाद्य पदार्थ कारोबारियों के पंजीयन किए हैं। चार फरवरी तक व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन बिना विलंब शुल्क के होंगे। तय समय के बाद पंजीयन के लिए विलंब शुल्क भी पड़ेगा। इस नई व्यवस्था से व्यापारी को तो कोई लाभ नहीं मिलेगा, हालांकि इससे विभाग का राजस्व जरूर बढ़ेगा।
शासन ने प्रदेश में खाद्य कारोबारियों को रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य कर दिया है। नई व्यवस्था में 12 लाख से कम टर्न ओवर के कारोबारी सिर्फ रजिस्टर्ड किए जाएंगे। जबकि 12 लाख से 20 लाख तक के व्यापारियों के स्टेट या फिर इससे ऊपर के व्यापारियों के सेंट्रल लाइसेंस बनाए जाएंगे। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत लाइसेंस बनवाने की अंतिम तिथि चार फरवरी 2014 है। इस अवधि में खाद्य कारोबारों को अपने लाइसेंस का पंजीयन कराना होगा। शासन के फरमान पर सीतापुर में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन महकमे ने अभियान चला रखा है। मुख्य खाद्य सुरक्षा एवं औषधि अधिकारी कौशलेंद्र शर्मा बताते हैं कि शासन के फरमान चलाए गए अभियान में अब तक सीतापुर जनपद में 2218 खाद्य कारोबारियों के रजिस्ट्रेशन हुए हैं। जबकि दिसंबर में 269 कारोबारियों के पंजीयन किए गए। वह बताते हैं कि खाद्य पदार्थों के कारोबारियों के रजिस्ट्रेशन का मकसद कारोबारियों के बारे में जानकारी जुटाना है। इस व्यवस्था से समय-समय पर निरीक्षण कर उनके खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर भी नजर रखने में आसानी होगी।
ये आएंगे दायरे में
खाद्य व्यवसायी, निर्माता, थोक एवं फुटकर विक्रेता, अस्थाई एवं स्थाई स्टाल धारक, सब्जी एवं फल विक्रेता, गुड़ व्यवसायी, शीतल पेय कारोबारी, दुग्ध एवं दुग्ध से निर्मित पदार्थों के विक्रेता, खाद्य तेल विक्रेता, राइस मिल के मालिकान, आटा चक्की संचालक, तेल कोल्हू चलाने वाले व्यवसायी, मंडी समिति के अनाज व्यवसायी व अन्य सभी विक्रेता रखे गए हैं।
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छह माह की सजा, तीन लाख जुर्माना भी
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग में खाद्य पदार्थों के कारोबारियों के पंजीयन न कराने पर अधिकतम 25 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। चेकिंग में अगर कोई भी कारोबारी बगैर लाइसेंस के पकड़ा जाएगा, तो उससे छह माह की सजा व तीन लाख रुपये जुर्माना लगेगा।
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शासन ने प्रदेश में खाद्य कारोबारियों को रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य कर दिया है। नई व्यवस्था में 12 लाख से कम टर्न ओवर के कारोबारी सिर्फ रजिस्टर्ड किए जाएंगे। जबकि 12 लाख से 20 लाख तक के व्यापारियों के स्टेट या फिर इससे ऊपर के व्यापारियों के सेंट्रल लाइसेंस बनाए जाएंगे। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत लाइसेंस बनवाने की अंतिम तिथि चार फरवरी 2014 है। इस अवधि में खाद्य कारोबारों को अपने लाइसेंस का पंजीयन कराना होगा। शासन के फरमान पर सीतापुर में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन महकमे ने अभियान चला रखा है। मुख्य खाद्य सुरक्षा एवं औषधि अधिकारी कौशलेंद्र शर्मा बताते हैं कि शासन के फरमान चलाए गए अभियान में अब तक सीतापुर जनपद में 2218 खाद्य कारोबारियों के रजिस्ट्रेशन हुए हैं। जबकि दिसंबर में 269 कारोबारियों के पंजीयन किए गए। वह बताते हैं कि खाद्य पदार्थों के कारोबारियों के रजिस्ट्रेशन का मकसद कारोबारियों के बारे में जानकारी जुटाना है। इस व्यवस्था से समय-समय पर निरीक्षण कर उनके खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर भी नजर रखने में आसानी होगी।
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ये आएंगे दायरे में
खाद्य व्यवसायी, निर्माता, थोक एवं फुटकर विक्रेता, अस्थाई एवं स्थाई स्टाल धारक, सब्जी एवं फल विक्रेता, गुड़ व्यवसायी, शीतल पेय कारोबारी, दुग्ध एवं दुग्ध से निर्मित पदार्थों के विक्रेता, खाद्य तेल विक्रेता, राइस मिल के मालिकान, आटा चक्की संचालक, तेल कोल्हू चलाने वाले व्यवसायी, मंडी समिति के अनाज व्यवसायी व अन्य सभी विक्रेता रखे गए हैं।
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छह माह की सजा, तीन लाख जुर्माना भी
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग में खाद्य पदार्थों के कारोबारियों के पंजीयन न कराने पर अधिकतम 25 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। चेकिंग में अगर कोई भी कारोबारी बगैर लाइसेंस के पकड़ा जाएगा, तो उससे छह माह की सजा व तीन लाख रुपये जुर्माना लगेगा।