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अब सीधे बैंक खाते में जाएगी खाद की सब्सिडी
Updated Mon, 01 Jan 2018 12:02 AM IST
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1200 दुकानों पर आज से पीओएस मशीन से मिलेगी खाद
सीतापुर। नए साल में एक जनवरी से खाद पर मिलने वाली छूट का पैसा अब सीधे किसानों के खाते में जाएगा। गैस सिलेंडर की तरह ही किसानों के बैंक खातों में खाद की सब्सिडी पहुंचेगी।
किसान को आधार कार्ड दिखाने पर ही खाद मिलेगी। इसके लिए खाद विक्रेताओं को प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें मुहैया कराई गई हैं। ऑनलाइन खाद ब्रिकी से कालाबाजारी के अलावा बढ़ी दरों पर बिक्री की शिकायतें खत्म हो जाएगी।
जिले में प्राइवेट और सरकारी की करीब 1200 खाद दुकानें हैं। इसके सापेक्ष 1028 पीओएस मशीनों का वितरण किया जा चुका है।
अक्सर खाद की कालाबाजारी और मूल्य से अधिक दरों पर बिक्री की शिकायतें अफसरों से लेकर शासन तक पहुंचती हैं। शासन ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए खाद की ऑनलाइन बिक्री करने की रणनीति बनाई है।
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इससे कालाबाजारी खत्म होने के अलावा किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। खाद के अनुदान का भुगतान डीबीटी (डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर) के जरिये सीधे किसान के बैंक खाते में पहुंचेगा।
हालांकि किसानों को यूरिया, डीएपी व पोटाश की पूरी कीमत दुकानदार को चुकानी होगी। जिसके बाद सब्सिडी किसान के बैंक खाते में भेज दी जाएगी।
इसके लिए खाद विक्रेताओं को पीओएस मशीन रखना अनिवार्य कर दिया गया है। चाहे वह सरकारी, सहकारी दुकानदार हों या निजी दुकानदार।
सभी को इसी मशीन के जरिये खाद बेचनी होगी। यदि मशीन दुकानदार के पास नहीं है, तो अब वह खाद नहीं बेच पाएंगे। पीओएस मशीन से खाद बिक्री का प्रशिक्षण सभी विक्रेताओं को दिया जा चुका है।
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सीतापुर। नए साल में एक जनवरी से खाद पर मिलने वाली छूट का पैसा अब सीधे किसानों के खाते में जाएगा। गैस सिलेंडर की तरह ही किसानों के बैंक खातों में खाद की सब्सिडी पहुंचेगी।
किसान को आधार कार्ड दिखाने पर ही खाद मिलेगी। इसके लिए खाद विक्रेताओं को प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें मुहैया कराई गई हैं। ऑनलाइन खाद ब्रिकी से कालाबाजारी के अलावा बढ़ी दरों पर बिक्री की शिकायतें खत्म हो जाएगी।
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जिले में प्राइवेट और सरकारी की करीब 1200 खाद दुकानें हैं। इसके सापेक्ष 1028 पीओएस मशीनों का वितरण किया जा चुका है।
अक्सर खाद की कालाबाजारी और मूल्य से अधिक दरों पर बिक्री की शिकायतें अफसरों से लेकर शासन तक पहुंचती हैं। शासन ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए खाद की ऑनलाइन बिक्री करने की रणनीति बनाई है।
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इससे कालाबाजारी खत्म होने के अलावा किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। खाद के अनुदान का भुगतान डीबीटी (डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर) के जरिये सीधे किसान के बैंक खाते में पहुंचेगा।
हालांकि किसानों को यूरिया, डीएपी व पोटाश की पूरी कीमत दुकानदार को चुकानी होगी। जिसके बाद सब्सिडी किसान के बैंक खाते में भेज दी जाएगी।
इसके लिए खाद विक्रेताओं को पीओएस मशीन रखना अनिवार्य कर दिया गया है। चाहे वह सरकारी, सहकारी दुकानदार हों या निजी दुकानदार।
सभी को इसी मशीन के जरिये खाद बेचनी होगी। यदि मशीन दुकानदार के पास नहीं है, तो अब वह खाद नहीं बेच पाएंगे। पीओएस मशीन से खाद बिक्री का प्रशिक्षण सभी विक्रेताओं को दिया जा चुका है।