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अब नदियों में बिना पट्टा के नहीं कर सकेंगे मछली का शिकार
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सीतापुर। नदियों में बिना पट्टे के मछलियों का शिकार करना अब महंगा पड़ सकता है। शासन ने नदियों में मत्स्य आखेट के लिए नई नीति बनाई है। इसके तहत प्रशासन मछली शिकार क्षेत्रों का निर्धारण कर पट्टे देगा, इसके बाद ही शिकार किया जा सकता है।
मत्स्य जीवी सहकारी समिति की ओर से हाईकोर्ट इलाहाबाद में दाखिल की गई रिट में पारित आदेश के बाद शासन ने नदियों में मछली के शिकार के लिए नीति बनाई है। इसके अनुसार डीएम की ओर से प्रत्येक तहसील में एसडीएम की अध्यक्षता में तहसील स्तरीय मत्स्य आखेट समिति का गठन किया जाएगा।
इसमें एसडीएम अध्यक्ष, डीएम की ओर से नामित एक बीडीओ, एक्सईएन सिंचाई की ओर से नामित एक सहायक अभियंता, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत से नामित एक अफसर, सहायक वन संरक्षक सदस्य होंगे। सहायक निदेशक मत्स्य सदस्य सचिव होंगे। इ
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स समिति की ओर से तहसील क्षेत्र की नदियों का सर्वेक्षण कर मत्स्य आखेट क्षेत्रों का चिन्हांकन किया जाएगा। चिन्हांकन, मत्स्य मात्रा के निर्धारण एवं उसका न्यूनतम आरक्षित मूल्य निर्धारण का कार्य प्रत्येक वर्ष अप्रैल में पूर्ण होगा। प्रतिबंधित क्षेत्र को चिन्हांकन से अलग रखा जाएगा।
बाक्स
समितियों की पात्रता का क्रम
मछली शिकार के लिए सर्वप्रथम संबंधित गांव में निवास करने वाले मछुआ समुदाय के व्यक्तियों की सहकारी समिति जो विभाग से मान्यता प्राप्त हो वहीं पात्र होगी। इसके बाद संबंधित न्याय पंचायत क्षेत्र की सहकारी समिति, संबंधित विकास खंड की समिति, जिले की समिति, राज्य की समिति, अनुसूचित जाति की समिति के बाद अन्य सहकारी समितियों को पट्टा दिया जाएगा।
बाक्स
ऐसे होगा पट्टा
डीएम से नामित एडीएम या एसडीएम पट्टा आवंटन /नीलामी अफसर होगा। समिति की ओर से मई व जून के अंत तक पट्टा कर दिया जाएगा। पट्टा अधिकारी की ओर से चिह्नित मछली आखेट क्षेत्रों के पट्टा आवंटन की सूचना जिले में प्रकाशित कराई जाएगी। आवेदन के लिए कम से कम 21 दिन का समय दिया जाएगा। मत्स्य आखेट समिति की बोली में उच्चतम राशि वाली लगाने वाली समिति से 25 प्रतिशत धन तत्काल जमा कराया जोगा। शेष धन एक सप्ताह में जमा करना होगा। वहीं प्रत्येक वर्ष एक जून से 31 अगस्त तक नदियों में शिकार प्रतिबंधित रहेगा। शिकार के लिए नदी का जल प्रवाह भी नहीं रोका जाएगा। कछुआ, घड़िहाल, डॉलफिन, मगरमच्छ एवं अन्य प्रतिबंधित जलीय वन्य जीवों को पकड़ने का अधिकार भी नहीं होगा।
समितियों का होगा गठन
नदियों में मछली शिकार के लिए क्षेत्र चिन्हांकन के लिए एडीएम ने सभी एसडीएम को पत्र लिखा है। इसके लिए समिति का गठन किया जाना है। अभी तक जिले में समितियों का गठन नहीं हुआ है। - सुमेर चंद्र श्रीवास्तव, सहायक निदेशक मत्स्य
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मत्स्य जीवी सहकारी समिति की ओर से हाईकोर्ट इलाहाबाद में दाखिल की गई रिट में पारित आदेश के बाद शासन ने नदियों में मछली के शिकार के लिए नीति बनाई है। इसके अनुसार डीएम की ओर से प्रत्येक तहसील में एसडीएम की अध्यक्षता में तहसील स्तरीय मत्स्य आखेट समिति का गठन किया जाएगा।
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इसमें एसडीएम अध्यक्ष, डीएम की ओर से नामित एक बीडीओ, एक्सईएन सिंचाई की ओर से नामित एक सहायक अभियंता, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत से नामित एक अफसर, सहायक वन संरक्षक सदस्य होंगे। सहायक निदेशक मत्स्य सदस्य सचिव होंगे। इ
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स समिति की ओर से तहसील क्षेत्र की नदियों का सर्वेक्षण कर मत्स्य आखेट क्षेत्रों का चिन्हांकन किया जाएगा। चिन्हांकन, मत्स्य मात्रा के निर्धारण एवं उसका न्यूनतम आरक्षित मूल्य निर्धारण का कार्य प्रत्येक वर्ष अप्रैल में पूर्ण होगा। प्रतिबंधित क्षेत्र को चिन्हांकन से अलग रखा जाएगा।
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समितियों की पात्रता का क्रम
मछली शिकार के लिए सर्वप्रथम संबंधित गांव में निवास करने वाले मछुआ समुदाय के व्यक्तियों की सहकारी समिति जो विभाग से मान्यता प्राप्त हो वहीं पात्र होगी। इसके बाद संबंधित न्याय पंचायत क्षेत्र की सहकारी समिति, संबंधित विकास खंड की समिति, जिले की समिति, राज्य की समिति, अनुसूचित जाति की समिति के बाद अन्य सहकारी समितियों को पट्टा दिया जाएगा।
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ऐसे होगा पट्टा
डीएम से नामित एडीएम या एसडीएम पट्टा आवंटन /नीलामी अफसर होगा। समिति की ओर से मई व जून के अंत तक पट्टा कर दिया जाएगा। पट्टा अधिकारी की ओर से चिह्नित मछली आखेट क्षेत्रों के पट्टा आवंटन की सूचना जिले में प्रकाशित कराई जाएगी। आवेदन के लिए कम से कम 21 दिन का समय दिया जाएगा। मत्स्य आखेट समिति की बोली में उच्चतम राशि वाली लगाने वाली समिति से 25 प्रतिशत धन तत्काल जमा कराया जोगा। शेष धन एक सप्ताह में जमा करना होगा। वहीं प्रत्येक वर्ष एक जून से 31 अगस्त तक नदियों में शिकार प्रतिबंधित रहेगा। शिकार के लिए नदी का जल प्रवाह भी नहीं रोका जाएगा। कछुआ, घड़िहाल, डॉलफिन, मगरमच्छ एवं अन्य प्रतिबंधित जलीय वन्य जीवों को पकड़ने का अधिकार भी नहीं होगा।
समितियों का होगा गठन
नदियों में मछली शिकार के लिए क्षेत्र चिन्हांकन के लिए एडीएम ने सभी एसडीएम को पत्र लिखा है। इसके लिए समिति का गठन किया जाना है। अभी तक जिले में समितियों का गठन नहीं हुआ है। - सुमेर चंद्र श्रीवास्तव, सहायक निदेशक मत्स्य