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दायरे से बाहर आने को बेताब घाघरा
Updated Tue, 04 Jul 2017 02:03 AM IST
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भरने से पहले नया घाव दे देती घाघरा
जलस्तर बढ़ने से कटान तेज, छह गांवों के चार हजार लोग दहशत में
ग्रामीण सामान समेट सुरक्षित स्थानों की ओर निकले
अमर उजाला ब्यूरो
सीतापुर/रेउसा। घाघरा नदी बरसात के समय हर साल तटीय क्षेत्रों में कहर बरपाती है। पूरे साल ग्रामीण एक-एक कर गृहस्थी का सामान जोड़ते हैं, जिसे नदी बाढ़ के समय तिनके की तरह बहा ले जाती है। कुदरत के इस कहर को भांप कर गांव वाले अभी से सतर्क हो गए हैं। ग्रामीणों ने घरों से सामान को समेटना शुरू कर दिया है। पानी बढ़ने से नदी ने कोनी, दुर्गापुरवा, गोड़ियन पुरवा, पचीसा, रेती पुरवा व बदहाली पुरवा में कटान तेज हो गई है। जलस्तर बढ़ने से इन गांवों के चार हजार लोग दहशत में हैं। बैराजों से सोमवार को करीब सवा लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे खतरा और बढ़ गया है।
घाघरा के तटीय क्षेत्र व टापू पर बसे परिवार नदी का जलस्तर बढ़ने से परेशान हैं। उनका कहना है कि पानी की बढ़ोतरी इसी तरह से जारी रही तो जल्द ही बाढ़ के हालात पैदा हो सकते हैं। नदी इन दिनों पचीसा, रेती पुरवा व बदहाली पुरवा गांव में तेजी से कटान कर रही है। कटान की रफ्तार इस कदर तेज है कि बीते तीन दिनों में नदी ने टापू का 400 मीटर चौड़ाई व चार किलोमीटर हिस्सा लंबाई में काटा है। जो परिवार तटीय इलाके में झोपड़ी डाले थे, उन्होंने अपने आशियानों को उजाड़ना शुरू कर दिया है। ये परिवार टापू पर ही झोपड़ी डाल रहे हैं। परिवारों का कहना है कि कटान अगर इसी तरह से जारी रही, तो बहुत जल्द ही टापू का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
दुर्गापुरवा में नदी निगल रही सड़क
दुर्गापुरवा गांव में नदी ने मुख्य सड़क को निगलना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क लगभग समाप्ति के कगार पर है, जिसके बाद नदी का कहर दुर्गापुरवा गांव पर ही बरपेगा। यहां के खेत तेजी से कटकर नदी में समा रहे हैं। पानी रेउसा क्षेत्र के कटैला पुरवा, दर्जिन रेती की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। कोनी व गोड़ियन पुरवा गांव के निकट भी नदी कटान कर रही है। नदी का रौद्र रूप देख तटीय क्षेत्र के बाशिंदों ने आशियानों से जरूरत का सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।
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गांव जाने के लिए ले रहे नाव का सहारा
नदी के जलस्तर में इस कदर बढ़ोतरी हुई कि तटीय क्षेत्र के घाट बदल गए हैं। घाघरा के बीच टापू पर जाने के लिए दो सप्ताह पहले दुर्गा पुरवा गांव से करीब तीन किलोमीटर दूरी तक नदी के बीच रेत पर पैदल चलना पड़ता था। इधर नदी के पानी में इस कदर बढ़ोतरी हुई कि नदी के बीच का तीन किलोमीटर का दायरा पानी में समा गया है। अब दुर्गा पुरवा व कोनी तथा गोड़ियन पुरवा के बाशिंदे गांव के निकट से ही नाव पर सवार होकर टापू पर जा रहे हैं। ठीक ऐसा ही हाल कटैला पुरवा व दर्जिन पुरवा गांवों का भी है। इस क्षेत्र के बाशिंदों को भी टापू पर जाने के लिए पहले तीन किलोमीटर दूरी तक रेत पर चलना पड़ता था। अब इस क्षेत्र में डेढ़ किलोमीटर दूरी तक नदी का पानी बढ़ आया है।
इसलिए बढ़ता घाघरा का जलस्तर
जिले के गांजरी क्षेत्र से होकर घाघरा, शारदा व चौका नदी गुजरी हैं। रेउसा क्षेत्र में शारदा नदी का विलय घाघरा नदी में हो जाता है। महमूदाबाद क्षेत्र में चौका नदी का विलय घाघरा में हो जाता है। क्षेत्र के तमाम ऐसे नाले हैं, जिनका बरसाती पानी भी घाघरा नदी में ही गिरता है। काफी मात्रा में पानी घाघरा नदी में पहुंच जाता है। ऐसे में नदी का उफान मारना लाजिमी है।
बैराजों से छोड़ा गया पानी
बैराज पानी (क्यूसेक)
घाघरा 76440
शारदा 12390
बनबसा 24564
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जलस्तर बढ़ने से कटान तेज, छह गांवों के चार हजार लोग दहशत में
ग्रामीण सामान समेट सुरक्षित स्थानों की ओर निकले
अमर उजाला ब्यूरो
सीतापुर/रेउसा। घाघरा नदी बरसात के समय हर साल तटीय क्षेत्रों में कहर बरपाती है। पूरे साल ग्रामीण एक-एक कर गृहस्थी का सामान जोड़ते हैं, जिसे नदी बाढ़ के समय तिनके की तरह बहा ले जाती है। कुदरत के इस कहर को भांप कर गांव वाले अभी से सतर्क हो गए हैं। ग्रामीणों ने घरों से सामान को समेटना शुरू कर दिया है। पानी बढ़ने से नदी ने कोनी, दुर्गापुरवा, गोड़ियन पुरवा, पचीसा, रेती पुरवा व बदहाली पुरवा में कटान तेज हो गई है। जलस्तर बढ़ने से इन गांवों के चार हजार लोग दहशत में हैं। बैराजों से सोमवार को करीब सवा लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे खतरा और बढ़ गया है।
घाघरा के तटीय क्षेत्र व टापू पर बसे परिवार नदी का जलस्तर बढ़ने से परेशान हैं। उनका कहना है कि पानी की बढ़ोतरी इसी तरह से जारी रही तो जल्द ही बाढ़ के हालात पैदा हो सकते हैं। नदी इन दिनों पचीसा, रेती पुरवा व बदहाली पुरवा गांव में तेजी से कटान कर रही है। कटान की रफ्तार इस कदर तेज है कि बीते तीन दिनों में नदी ने टापू का 400 मीटर चौड़ाई व चार किलोमीटर हिस्सा लंबाई में काटा है। जो परिवार तटीय इलाके में झोपड़ी डाले थे, उन्होंने अपने आशियानों को उजाड़ना शुरू कर दिया है। ये परिवार टापू पर ही झोपड़ी डाल रहे हैं। परिवारों का कहना है कि कटान अगर इसी तरह से जारी रही, तो बहुत जल्द ही टापू का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
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दुर्गापुरवा में नदी निगल रही सड़क
दुर्गापुरवा गांव में नदी ने मुख्य सड़क को निगलना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क लगभग समाप्ति के कगार पर है, जिसके बाद नदी का कहर दुर्गापुरवा गांव पर ही बरपेगा। यहां के खेत तेजी से कटकर नदी में समा रहे हैं। पानी रेउसा क्षेत्र के कटैला पुरवा, दर्जिन रेती की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। कोनी व गोड़ियन पुरवा गांव के निकट भी नदी कटान कर रही है। नदी का रौद्र रूप देख तटीय क्षेत्र के बाशिंदों ने आशियानों से जरूरत का सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।
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गांव जाने के लिए ले रहे नाव का सहारा
नदी के जलस्तर में इस कदर बढ़ोतरी हुई कि तटीय क्षेत्र के घाट बदल गए हैं। घाघरा के बीच टापू पर जाने के लिए दो सप्ताह पहले दुर्गा पुरवा गांव से करीब तीन किलोमीटर दूरी तक नदी के बीच रेत पर पैदल चलना पड़ता था। इधर नदी के पानी में इस कदर बढ़ोतरी हुई कि नदी के बीच का तीन किलोमीटर का दायरा पानी में समा गया है। अब दुर्गा पुरवा व कोनी तथा गोड़ियन पुरवा के बाशिंदे गांव के निकट से ही नाव पर सवार होकर टापू पर जा रहे हैं। ठीक ऐसा ही हाल कटैला पुरवा व दर्जिन पुरवा गांवों का भी है। इस क्षेत्र के बाशिंदों को भी टापू पर जाने के लिए पहले तीन किलोमीटर दूरी तक रेत पर चलना पड़ता था। अब इस क्षेत्र में डेढ़ किलोमीटर दूरी तक नदी का पानी बढ़ आया है।
इसलिए बढ़ता घाघरा का जलस्तर
जिले के गांजरी क्षेत्र से होकर घाघरा, शारदा व चौका नदी गुजरी हैं। रेउसा क्षेत्र में शारदा नदी का विलय घाघरा नदी में हो जाता है। महमूदाबाद क्षेत्र में चौका नदी का विलय घाघरा में हो जाता है। क्षेत्र के तमाम ऐसे नाले हैं, जिनका बरसाती पानी भी घाघरा नदी में ही गिरता है। काफी मात्रा में पानी घाघरा नदी में पहुंच जाता है। ऐसे में नदी का उफान मारना लाजिमी है।
बैराजों से छोड़ा गया पानी
बैराज पानी (क्यूसेक)
घाघरा 76440
शारदा 12390
बनबसा 24564