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नोटबंदी से डाकघरों की चांदी, 700 नए खाते खुले
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Nov 2016 10:49 PM IST
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डाकघर
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी से लोगों को भले ही दुश्वारियों के दौर से गुजरना पड़ रहा हो पर डाक विभाग के अच्छे दिन जरूर आ गए हैं। आठ नवंबर को नोटबंदी के बाद डाक विभाग में करीब 700 नए खाते खुल गए। वहीं कई सालों से निष्क्रिय पड़े करीब एक हजार अकाउंट एकाएक सक्रिय हो गए।
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उनमें करेंसी भी जमा की गई। पिछले एक पखवारे में तकरीबन दस करोड़ से अधिक पुरानी करेंसी खातों में पहुंची है। जिले भर में प्रधान डाकघर समेत करीब 42 पोस्ट ऑफिस हैं। यहां डाकघरों में तकरीबन डेढ़ लाख से अधिक खाताधारक हैं। पर तकरीबन एक हजार ऐसे अकाउंट थे, जिनमें लेनदेन प्रक्रिया न होने से यह खाते बरसों से निष्क्रिय पड़े थे।
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इनमें लेनदेन नहीं होता था। विभाग ने डाकघरों में इन खातों को मृत घोषित कर दिया था। बीते आठ नवंबर को केंद्र सरकार ने 500 व 1000 रुपये की नोट पर पाबंदी लगा दी। बैंकों व डाकघरों में ही नोट बदलने व जमा करने के एलान से एकाएक डाकघरों के अच्छे दिन शुरू हो गए। जिन खाताधारकों के खाते मृत से हो चुके थे।
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उन खातों को फिर से चालू करने के लिए प्रार्थना पत्र आने लगे। डाकघर के अधिकारियों ने कागजी कार्रवाई पूरी कर खाता चालू कर दिए। अकाउंट एक्टिव होते ही लोगों ने अपने खातों में 1000 व 500 के नोट जमा करने शुरू कर दिए। इस बीच करीब 700 लोगों ने नए खाते डाकघरों में खुलवाए। जिनमें 1000 व 500 रुपये के नोट जमा हुए।
हालांकि डाक विभाग के अधिकारी इस संबंध में खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। इतना जरूर कहते हैं कि तमाम ऐसे खाते जो बंद पड़े थे, खाता धारकों ने उनको फिर से शुरू करवाया है और उनमें लेनदेन शुरू किया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब 10 करोड़ का कैश जमा किया गया है। जिन डाकघरों में सन्नाटा पसरा रहता था और उनके खजाने खाली होने के कगार पर पहुंच गए थे। उन डाक घरों में अब भीड़ उमड़ने लगी है और खजाना भी तेजी से भर रहा है।