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आंधी पानी में दो की और मौत
Updated Thu, 14 Jun 2018 11:49 PM IST
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बिसवां के पुरवारी टोला में मस्जिद की मीनार गिरने से मलबे में दबा बुजुर्ग
सीतापुर। जिले में बुधवार शाम को आई आंधी-बारिश की तस्वीर अब साफ होने लगी है। इसके कहर में दो और लोगों की जान चली गई है। इससे मरने वालों की संख्या चार से बढ़कर छह हो गई है। वहीं घायलों की संख्या भी बढ़ी है। लोग क्षेत्र की सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल व ट्रॉमा सेंटर तक इलाज करा रहे हैं।
बिसवां के पुरवारी टोला में बुधवार की शाम आंधी की वजह से मस्जिद की मीनार गिर गई। इसी मीनार के नीचे मोहल्ले के निवासी हाजी अब्दुल मजीद (80) दब गए। आंधी जब शांत हुई, तब मोहल्ले के लोगों ने कड़ी मशक्कत से मलबा हटाकर दबे हुए बुजुर्ग को बाहर निकाला।
तब तक हाजी अब्दुल मजीद की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। इधर सदरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम मनिकापुर में आंधी-बारिश से छप्पर व दीवार गिर गई। इससे छप्पर के नीचे मौजूद यशोदा देवी (65) दब गई। गांव के लोगों ने आननफानन मलबा हटाया। तब तक यशोदा की मौत हो चुकी थी।
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यहां बता दें कि बुधवार देर रात तक महज चार लोगों की मौत की सूचना ही मिल पाई थी। अब यह संख्या बढ़कर छह हो गई है। इसके अलावा क्षेत्र में करीब 20 अन्य लोग ऐसे मिले हैं, जो बुधवार को आई आंधी में जख्मी हो गए थे।
प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को दी आर्थिक मदद
एडीएम विनय पाठक ने बताया कि पूरे जिले में आंधी-बारिश में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या छह है, जबकि 26 लोग घायल बताए जा रहे हैं। इनमें 16 ऐसे हैं जो अधिक घायल हैं। एडीएम ने बताया कि आंधी-बारिश में जान गंवाने वाले चार पीड़ित परिवारों को 4-4 लाख रुपये आर्थिक मदद की चेकें सौंप दी गई हैं।
जबकि दो पीड़ित परिवार ऐसे हैं, जिनके खाते ही नहीं खुल सके। इस वजह से उन परिवारों को अभी मदद नहीं दी जा सकी है। खाता खुलवाए जा रहे हैं, जल्द ही उन परिवारों को भी मदद दी जाएगी।
घायलों की सहायता में फंसेगा पेंच
आंधी-बारिश में घायल हुए लोगों को दैवीय आपदा राहत कोष से मदद देने का नियम है। लेकिन इस कोष से मदद देने में भी एक पेंच है। मदद देने के नियम के तहत यह अनिवार्य है कि घायल व्यक्ति करीब एक सप्ताह तक जिला अस्पताल में भर्ती रहे।
तब कहीं जाकर वह मदद के लिए पात्रता की सूची में शामिल हो सकेगा। जिन लोगों का इलाज एक या दो दिन ही चलता है, ऐसे लोगों को लाभ नहीं मिल सकेगा। एडीएम विनय पाठक का भी कहना है कि एक सप्ताह तक सरकारी अस्पताल में भर्ती रहने वाले को ही मदद मिल सकेगी।
बिसवां में पेड़ गिरने से अवरुद्ध रहे रास्ते
बिसवां क्षेत्र में आंधी ने इस कदर से तबाही मचाई है कि क्षेत्र के मुख्य मार्ग व लिंक मार्ग अवरुद्ध हो गए। पूरे क्षेत्र में सैकड़ों पेड़ धराशायी हो गए। हालत यह रही कि कहीं कार तो कहीं ट्रक पर पेड़ गिरे हैं। जिसकी वजह से दर्जनों वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। क्षेत्र की अधिकांश सड़कों पर पेड़ गुरुवार की शाम तक नहीं हटाए जा सके हैं। क्षेत्र के बाशिंदे पेड़ों की शाखाओं को काटकर रास्ता साफ करने में जुटे हुए थे।
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सीतापुर। जिले में बुधवार शाम को आई आंधी-बारिश की तस्वीर अब साफ होने लगी है। इसके कहर में दो और लोगों की जान चली गई है। इससे मरने वालों की संख्या चार से बढ़कर छह हो गई है। वहीं घायलों की संख्या भी बढ़ी है। लोग क्षेत्र की सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल व ट्रॉमा सेंटर तक इलाज करा रहे हैं।
बिसवां के पुरवारी टोला में बुधवार की शाम आंधी की वजह से मस्जिद की मीनार गिर गई। इसी मीनार के नीचे मोहल्ले के निवासी हाजी अब्दुल मजीद (80) दब गए। आंधी जब शांत हुई, तब मोहल्ले के लोगों ने कड़ी मशक्कत से मलबा हटाकर दबे हुए बुजुर्ग को बाहर निकाला।
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तब तक हाजी अब्दुल मजीद की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। इधर सदरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम मनिकापुर में आंधी-बारिश से छप्पर व दीवार गिर गई। इससे छप्पर के नीचे मौजूद यशोदा देवी (65) दब गई। गांव के लोगों ने आननफानन मलबा हटाया। तब तक यशोदा की मौत हो चुकी थी।
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यहां बता दें कि बुधवार देर रात तक महज चार लोगों की मौत की सूचना ही मिल पाई थी। अब यह संख्या बढ़कर छह हो गई है। इसके अलावा क्षेत्र में करीब 20 अन्य लोग ऐसे मिले हैं, जो बुधवार को आई आंधी में जख्मी हो गए थे।
प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को दी आर्थिक मदद
एडीएम विनय पाठक ने बताया कि पूरे जिले में आंधी-बारिश में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या छह है, जबकि 26 लोग घायल बताए जा रहे हैं। इनमें 16 ऐसे हैं जो अधिक घायल हैं। एडीएम ने बताया कि आंधी-बारिश में जान गंवाने वाले चार पीड़ित परिवारों को 4-4 लाख रुपये आर्थिक मदद की चेकें सौंप दी गई हैं।
जबकि दो पीड़ित परिवार ऐसे हैं, जिनके खाते ही नहीं खुल सके। इस वजह से उन परिवारों को अभी मदद नहीं दी जा सकी है। खाता खुलवाए जा रहे हैं, जल्द ही उन परिवारों को भी मदद दी जाएगी।
घायलों की सहायता में फंसेगा पेंच
आंधी-बारिश में घायल हुए लोगों को दैवीय आपदा राहत कोष से मदद देने का नियम है। लेकिन इस कोष से मदद देने में भी एक पेंच है। मदद देने के नियम के तहत यह अनिवार्य है कि घायल व्यक्ति करीब एक सप्ताह तक जिला अस्पताल में भर्ती रहे।
तब कहीं जाकर वह मदद के लिए पात्रता की सूची में शामिल हो सकेगा। जिन लोगों का इलाज एक या दो दिन ही चलता है, ऐसे लोगों को लाभ नहीं मिल सकेगा। एडीएम विनय पाठक का भी कहना है कि एक सप्ताह तक सरकारी अस्पताल में भर्ती रहने वाले को ही मदद मिल सकेगी।
बिसवां में पेड़ गिरने से अवरुद्ध रहे रास्ते
बिसवां क्षेत्र में आंधी ने इस कदर से तबाही मचाई है कि क्षेत्र के मुख्य मार्ग व लिंक मार्ग अवरुद्ध हो गए। पूरे क्षेत्र में सैकड़ों पेड़ धराशायी हो गए। हालत यह रही कि कहीं कार तो कहीं ट्रक पर पेड़ गिरे हैं। जिसकी वजह से दर्जनों वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। क्षेत्र की अधिकांश सड़कों पर पेड़ गुरुवार की शाम तक नहीं हटाए जा सके हैं। क्षेत्र के बाशिंदे पेड़ों की शाखाओं को काटकर रास्ता साफ करने में जुटे हुए थे।