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योजना बंद, पर 24 माह का नहीं मिला बकाया
Updated Sun, 28 Oct 2018 11:50 PM IST
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सीतापुर। साक्षर भारत मिशन योजना तो बंद हो गई पर इसको जमीनी पर पहचान दिलाने वाले प्रेरक बकाया मानदेय को लेकर अफसरों की चौखट पर फरियाद कर रहे हैं। वे 48 माह के बकाया मानदेय की मांग कर रहे हैं लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शासन से बकाया मानदेय की जानकारी कई बार ली जा चुकी है फिर भी मानदेय नहीं मिला। इससे इन प्रेरकों की दीपावली अब फीकी रहेगी।
15 साल से ऊपर के निरक्षरों को साक्षर करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से साक्षर भारत मिशन योजना शुरू की गई थी। इसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत पर दो प्रेरक रखे गए थे। इन प्रेरकों को प्रतिमाह दो हजार रुपये मानदेय मिलता था। इसके बदले वे प्रौढ़ महिला-पुरुष को पढ़ाते-लिखाते थे। एक वर्ष में दो बार परीक्षा कराकर उनको साक्षरता का प्रमाणपत्र दिलाते। तीन साल तक यह योजना चली।
31 मार्च 2018 को इस योजना के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी गई थी। इन तीन सालो में कभी भी प्रेरकों को प्रतिमाह भुगतान नहीं मिला। अगर मिला तो वह भी पांच माह से अधिक का कभी नहीं रहा। इससे इनका बकाया बढ़ता गया। जब योजना बंद हुई तो उस समय प्रेरकों का करीब 48 माह का मानदेय बकाया था।
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इसके बाद प्रेरकों ने दिल्ली तक आवाज बुलंद की। जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसरों तक से गुहार लगाई लेकिन न तो अफसर और न ही जनप्रतिनिधि ही उनको मानदेय दिला सके। अब हालात ये हैं इनके सामने आर्थिक समस्याएं खड़ी हो गई हैं। दीपावली आने वाली है, इससे इनका यह पर्व फीका साबित होगा।
प्रेरकों के अंदर इस बात का आक्रोश व्याप्त है कि योजना के क्रियान्वयन में ईमानदारी से काम किया जब मेहनताना देने की नौबत आई तो सरकार लापरवाही बरत रही है। मेहनत का ही पैसा नहीं दे रही है। अगर यही हालात रहे तो प्रेरक भूख हड़ताल तक करने को मजबूर होगे। इससे जिले के करीब 2400 प्रेरक प्रभावित हैं।
कोई तो दिलाए मेरा बकाया मानदेय
प्रेरक अमित शुक्ल का कहना है नियमित रूप से स्कूल पहुंचकर अध्यापन करते थे। कड़ी मेहनत करके परीक्षा करवाए लेकिन मानदेय न मिलने से बहुत परेशान हूं। आर्थिक समस्याएं खड़ी हो गई हैं। प्रेेरक देवेद्री का कहना है कई बार बैंक व बीआरसी के चक्कर काट चुकी हूं। हर जगह सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। पूजा का कहना है आज तक पूरा मानदेय एक साथ नहीं मिला जब 20 माह से अधिक का हो जाता था तो पांच या दो माह का मानदेय एक साथ मिल जाता था। अब तो हद हो गई है करीब 50 हजार रुपये बकाया है। प्रेरक अनुज का कहना है पूरा समय अध्यापन पर देते थे, उसके बदले महज दो हजार रुपये ही मिलते थे। आज वह भी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। केंद्र सरकार को प्रेरकों की समस्याएं देखते हुए तत्काल बकाया मानदेय दिलाना चाहिए।
नहीं मिला है बजट
प्रेरकों के बकाया मानदेय को लेकर शासन को सूचना भेजी जा चुकी है। अभी बजट नहीं मिला है, बजट मिलने पर खाते में रकम भेज दी जाएगी।
-अजय कुमार, बीएसए
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15 साल से ऊपर के निरक्षरों को साक्षर करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से साक्षर भारत मिशन योजना शुरू की गई थी। इसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत पर दो प्रेरक रखे गए थे। इन प्रेरकों को प्रतिमाह दो हजार रुपये मानदेय मिलता था। इसके बदले वे प्रौढ़ महिला-पुरुष को पढ़ाते-लिखाते थे। एक वर्ष में दो बार परीक्षा कराकर उनको साक्षरता का प्रमाणपत्र दिलाते। तीन साल तक यह योजना चली।
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31 मार्च 2018 को इस योजना के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी गई थी। इन तीन सालो में कभी भी प्रेरकों को प्रतिमाह भुगतान नहीं मिला। अगर मिला तो वह भी पांच माह से अधिक का कभी नहीं रहा। इससे इनका बकाया बढ़ता गया। जब योजना बंद हुई तो उस समय प्रेरकों का करीब 48 माह का मानदेय बकाया था।
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इसके बाद प्रेरकों ने दिल्ली तक आवाज बुलंद की। जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसरों तक से गुहार लगाई लेकिन न तो अफसर और न ही जनप्रतिनिधि ही उनको मानदेय दिला सके। अब हालात ये हैं इनके सामने आर्थिक समस्याएं खड़ी हो गई हैं। दीपावली आने वाली है, इससे इनका यह पर्व फीका साबित होगा।
प्रेरकों के अंदर इस बात का आक्रोश व्याप्त है कि योजना के क्रियान्वयन में ईमानदारी से काम किया जब मेहनताना देने की नौबत आई तो सरकार लापरवाही बरत रही है। मेहनत का ही पैसा नहीं दे रही है। अगर यही हालात रहे तो प्रेरक भूख हड़ताल तक करने को मजबूर होगे। इससे जिले के करीब 2400 प्रेरक प्रभावित हैं।
कोई तो दिलाए मेरा बकाया मानदेय
प्रेरक अमित शुक्ल का कहना है नियमित रूप से स्कूल पहुंचकर अध्यापन करते थे। कड़ी मेहनत करके परीक्षा करवाए लेकिन मानदेय न मिलने से बहुत परेशान हूं। आर्थिक समस्याएं खड़ी हो गई हैं। प्रेेरक देवेद्री का कहना है कई बार बैंक व बीआरसी के चक्कर काट चुकी हूं। हर जगह सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। पूजा का कहना है आज तक पूरा मानदेय एक साथ नहीं मिला जब 20 माह से अधिक का हो जाता था तो पांच या दो माह का मानदेय एक साथ मिल जाता था। अब तो हद हो गई है करीब 50 हजार रुपये बकाया है। प्रेरक अनुज का कहना है पूरा समय अध्यापन पर देते थे, उसके बदले महज दो हजार रुपये ही मिलते थे। आज वह भी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। केंद्र सरकार को प्रेरकों की समस्याएं देखते हुए तत्काल बकाया मानदेय दिलाना चाहिए।
नहीं मिला है बजट
प्रेरकों के बकाया मानदेय को लेकर शासन को सूचना भेजी जा चुकी है। अभी बजट नहीं मिला है, बजट मिलने पर खाते में रकम भेज दी जाएगी।
-अजय कुमार, बीएसए