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दहेज लोभी पति को दस वर्ष की कैद
Updated Thu, 19 Jul 2018 01:05 AM IST
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कोर्ट ने अभियुक्त पर दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया
सीतापुर। अदालत ने दहेज हत्या के मामले में अभियुक्त एक पति को दस वर्ष के कठोर कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा न होने की स्थिति में अभियुक्त को छह माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बिजेन्द्र कुमार अवस्थी ने की। इमलिया सुल्तानपुर थाना क्षेत्र के ग्राम रामपुर मझना निवासी हीरालाल ने अपनी पुत्री कांती का विवाह मानपुर थानाक्षेत्र के ग्राम मिर्जापुर के मजरा भिमरी निवासी इंद्रसेन के साथ किया था।
शादी में हैसियत के मुताबिक दान दहेज दिए जाने के बावजूद उसके ससुराल वाले संतुष्ट नही थे। दहेज में मोटर साइकिल व चेन की मांग को लेकर कांती को मारते-पीटते थे। इसी क्रम में 9 मार्च 2015 को कांती की उसकी ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
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जिसकी रिपोर्ट वादी हीरालाल द्वारा इंद्रसेन, उसके पिता संतराम व मां सताना के विरुद्ध दर्ज कराई गई। पुलिस ने विवेचना करने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया। सुनवाई के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश सुरेन्द्र प्रसाद यादव ने साक्ष्य सच पाते हुए इंद्रसेन को घटना का दोषी पाया। न्यायालय द्वारा उसे दस वर्ष की कैद व अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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सीतापुर। अदालत ने दहेज हत्या के मामले में अभियुक्त एक पति को दस वर्ष के कठोर कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा न होने की स्थिति में अभियुक्त को छह माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बिजेन्द्र कुमार अवस्थी ने की। इमलिया सुल्तानपुर थाना क्षेत्र के ग्राम रामपुर मझना निवासी हीरालाल ने अपनी पुत्री कांती का विवाह मानपुर थानाक्षेत्र के ग्राम मिर्जापुर के मजरा भिमरी निवासी इंद्रसेन के साथ किया था।
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शादी में हैसियत के मुताबिक दान दहेज दिए जाने के बावजूद उसके ससुराल वाले संतुष्ट नही थे। दहेज में मोटर साइकिल व चेन की मांग को लेकर कांती को मारते-पीटते थे। इसी क्रम में 9 मार्च 2015 को कांती की उसकी ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
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जिसकी रिपोर्ट वादी हीरालाल द्वारा इंद्रसेन, उसके पिता संतराम व मां सताना के विरुद्ध दर्ज कराई गई। पुलिस ने विवेचना करने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया। सुनवाई के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश सुरेन्द्र प्रसाद यादव ने साक्ष्य सच पाते हुए इंद्रसेन को घटना का दोषी पाया। न्यायालय द्वारा उसे दस वर्ष की कैद व अर्थदंड की सजा सुनाई है।