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धान की नर्सरी डालने को नहीं मिल रहा पानी
Updated Tue, 13 Jun 2017 04:31 AM IST
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धान की नर्सरी डालने को नहीं मिल रहा पानी
सीतापुर। खरीफ की फसलें उगाने की कवायद किसानों ने शुरू कर दी है। इन दिनों धान की बेहन तैयार करने का माकूल समय है पर सूखी नहरें और ज्यादातर बंद पड़े नलकूप किसानों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। मौसम विभाग ने जल्द मानसून आने के संकेत भी दे दिए हैं। ऐसे में धान की बेहन समय रहते तैयार न होने पर बारिश के बाद भी किसान धान की रोपाई नहीं कर पाएंगे। लिहाजा, धान की बोआई पिछड़ने की चिंता किसानों को सताने लगी है।
जिले में 177 किलोमीटर में 48 नहरों का जाल फैला है। जबकि 548 सरकारी नलकूप हैं। इसके बावजूद धान की बेहन तैयार करने के लिए किसानों को पानी मयस्सर नहीं हो रहा है। वजह, नहरों का सूखी होना और करीब अस्सी फीसदी नलकूप खराब होना है। अबकी 11, 195 हेक्टेअर में धान की नर्सरी डाली जा रही है। वहीं 1,67,925 हेक्टेयर में धान की रोपाई का लक्ष्य है। कृषि महकमे के अनुसार जून के पहले सप्ताह में धान की नर्सरी पड़ जानी चाहिए। नर्सरी डालने के लिए पानी की जरूरत होती है। यहां के ज्यादातर किसान सिंचाई के लिए नहरों तथा नलकूपों पर निर्भर हैं। नहरों व नलकूपों से पानी न मिलने पर किसान धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं जिससे उन्हें धान की बोआई पिछड़ने का डर सता रहा है।
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सीतापुर। खरीफ की फसलें उगाने की कवायद किसानों ने शुरू कर दी है। इन दिनों धान की बेहन तैयार करने का माकूल समय है पर सूखी नहरें और ज्यादातर बंद पड़े नलकूप किसानों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। मौसम विभाग ने जल्द मानसून आने के संकेत भी दे दिए हैं। ऐसे में धान की बेहन समय रहते तैयार न होने पर बारिश के बाद भी किसान धान की रोपाई नहीं कर पाएंगे। लिहाजा, धान की बोआई पिछड़ने की चिंता किसानों को सताने लगी है।
जिले में 177 किलोमीटर में 48 नहरों का जाल फैला है। जबकि 548 सरकारी नलकूप हैं। इसके बावजूद धान की बेहन तैयार करने के लिए किसानों को पानी मयस्सर नहीं हो रहा है। वजह, नहरों का सूखी होना और करीब अस्सी फीसदी नलकूप खराब होना है। अबकी 11, 195 हेक्टेअर में धान की नर्सरी डाली जा रही है। वहीं 1,67,925 हेक्टेयर में धान की रोपाई का लक्ष्य है। कृषि महकमे के अनुसार जून के पहले सप्ताह में धान की नर्सरी पड़ जानी चाहिए। नर्सरी डालने के लिए पानी की जरूरत होती है। यहां के ज्यादातर किसान सिंचाई के लिए नहरों तथा नलकूपों पर निर्भर हैं। नहरों व नलकूपों से पानी न मिलने पर किसान धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं जिससे उन्हें धान की बोआई पिछड़ने का डर सता रहा है।
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