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प्रधानों के खातों में पड़े रह गए 51 करोड़ रुपये

Tue, 29 Dec 2020 11:23 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 29 Dec 2020 11:23 PM IST
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51 crores lying in the accounts of the princes
सीतापुर। जिले के अधिकतर प्रधान अपने कार्यकाल में आवाम के सामने बजट का रोना रोते रहे। विकास कराने से लेकर लोगों की किस्मत बदल देने का वादा करके गांव की सत्ता पर काबिज हुए प्रधानों ने असल में बजट का पूरा पैसा विकास के कार्यों पर खर्च ही नहीं किया। ऐसे में ये कहने में कोई गुरेज नहीं कि सत्ता की सबसे अंतिम कड़ी यानी गांव की सरकार विकास को पंख नहीं लगा सकी। हकीकत ये है कि प्रधानों ने पांच साल तक हनक और रुतबे के साथ राज तो किया, लेकिन कार्यकाल खत्म होते-होते जनहित से जुड़े कई काम अधूरे ही छूट गए।
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जी हां, ये हम नहीं सरकारी आंकड़े हकीकत बता रहे हैं। 2015 में जिले में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में 1601 प्रधान चुने गए थे। इन सभी प्रधानों ने 25 दिसंबर को शपथ ली थी। इस हिसाब से 25 दिसंबर 2020 को इन सभी का कार्यकाल खत्म हो गया है। अब इनके हाथ से गांव की सरकार चली गई है। इनकी जगह पर गांवों में प्रशासक तैनात कर दिए गए हैं। पूरे कार्यकाल में इन प्रधानों ने गांव की सरकार चलाने में हनक और रुतबे का इस्तेमाल किया, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि गांव की सत्ता पाने से पहले अधिकतर प्रधानों ने गांव की जिन भोली-भाली जनता के दम पर प्रधानी का ताज अपने सिर पहना था, हकीकत में उसी जनता की उम्मीदों पर प्रधान खरे नहीं उतर सके। सुनकर चौंकना लाजिमी है पर ये सच है।
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दरअसल, अपने कार्यकाल में गांव का विकास कराने के लिए प्रधान जनता के सामने बजट न होने का रोना रोते रहे, लेकिन हकीकत ये है कि पूरा बजट ही प्रधान खर्च नहीं कर सके। केंद्र और राज्य वित्त आयोग से बजट जारी किया गया था। आबादी के हिसाब से सभी ग्राम पंचायतों में बजट दिया गया। जानकारों की माने तो केंद्र से साल में दो किस्तों में धनराशि दी गई, जबकि राज्य वित्त आयोग ने चार किस्तों में बजट जारी किया।
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इस पैसे से प्रधानों को गांव में विकास कार्य जैसे नाली, खड़ंजा, सड़क, स्कूल, पंचायत घर समेत और काम कराने होते हैं। जबकि स्वच्छ भारत मिशन और मनरेगा का काम कराने के लिए पैसा अलग से जारी होता है, लेकिन प्रधान अपने कार्यकाल में 75.36 फीसदी ही धनराशि खर्च कर सके। ऐसे में जिले को जारी हुई कुल धनराशि का 25.64 फीसदी बजट खर्च नहीं कर पाए। भारी भरकम धनराशि खातों में छोड़कर प्रधान चले गए।

प्रशासकों पर काम पूरा कराने की जिम्मेदारी
प्रधानी से विदाई लेकर जाने वाले प्रधानों के खातों में 51 करोड़ से अधिक रुपये अभी डंप पड़े है। अब आगे का अधूरा काम कराने की जिम्मेदारी गांवों में तैनात किए गए प्रशासकों के कंधों पर है, लेकिन अब विकास कराने के लिए प्रशासक व सचिव संयुक्त रूप से धनराशि खर्च करेंगे। विकास कार्य के लिए 2,10,21,15,000 रुपये जारी हुआ। प्रधान सिर्फ 1,58,40,67,000 धनराशि ही कार्यकाल में खर्च कर सके। अब भी 51,80,48,000 रुपये प्रधानों के खातों में पड़े हैं।
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