{"_id":"63a5ef08e1d92e00ed72eae5","slug":"28-lakh-without-booster-dose-shortage-of-vaccine-sitapur-news-lko66332904","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sitapur News: कैसे निपटेंगे कोरोना से जिले में नहीं कोरोना की एक भी डोज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sitapur News: कैसे निपटेंगे कोरोना से जिले में नहीं कोरोना की एक भी डोज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीतापुर। कोरोना संक्रमण का खौफ फिर से डराने लगा है। स्वास्थ्य विभाग का अमला इससे निपटने की चाक चौबंद तैयारियों की कवायद में भी जुटने लगा है। इसके बावजूद लोगों को कोरोना से बचाव के लिए सबसे जरूरी वैक्सीन की बूस्टर डोज नहीं मिल पा रही है। जिले में वैक्सीन का टोटा होने के कारण करीब 28.65 लाख लोग अभी भी बिना बूस्टर डोज के असुरक्षित घूमने को विवश हैं। इतना ही नहीं जिला अस्पताल में भी कोरोना जांच के लिए पर्याप्त मात्रा में जांच किट की कमी कायम बनी है।
इसके साथ ही अस्पतालों से लेकर सरकारी कार्यालयों तक में कोविड प्रोटोकाल के तहत जारी निर्देशों का अनुपालन पूरी तरह से हाशिए पर है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में मरीजों व तीमारदारों की भीड़ सोशल डिस्टेंसिंग को दर किनार कर बिना मास्क के ही दिखी। मरीजों व तीमारदारों के साथ ही अस्पतालों में तैनात स्टॉफ व चिकित्सकों ने भी कोरोना से बचाव के लिए मास्क लगाना शुरू नहीं किया है। लालबाग बाजार, जिला अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप सहित तमाम सार्वजनिक जगहों पर लोग बिना मॉस्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किए ही घूमते दिख रहे हैं।
कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए शासन ने एहतियातन सभी को बूस्टर डोज लगवाने का मशवरा दिया है। लेकिन वैक्सीन की उपलब्धता न होने से यह निर्देश कागजी साबित हो रहा है। वैक्सीन स्टॉक न होने से वर्तमान में पूरा टीकाकरण अभियान ठप पड़ा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले के सभी 37.86 लाख लोगों ने पहली और 37.29 लाख लोगों ने दूसरी डोज लगवा ली है।
विज्ञापन
लगातार जागरूकता के बाद भी 57 हजार लोग कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज लेने से वंचित बने हैं। ऐसे में बूस्टर डोज लगवाने के लिए सरकारी अस्पतालों में चल रही मुफ्त व्यवस्था बंद हो जाने से पूरे टीकाकरण अभियान पर ग्रहण लग गया है। लोग प्राइवेट अस्पताल में भुगतान देकर बूस्टर डोज लगवाने से बच रहे हैं। इसके चलते ही जिले के 28.65 लाख लोग बिना बूस्टर डोज के हैं। जो कभी भी भारी पड़ सकता है।
बूस्टर डोज सरकारी अस्पतालों लगने की सुविधा बंद होने से इसे निजी अस्पतालों में भुगतान सुविधा के साथ संचालित किया जा रहा है। इसके बावजूद जिले में प्राइवेट तौर पर सिर्फ एक ही सेंटर को कोरोना से बचने के लिए बूस्टर डोज लगाने की सुविधा दी गई है। इस निजी क्लीनिक पर भी बूस्टर डोज का टोटा होने से वैक्सीनेशन के लिए पहुंचने वालों को वापस लौटना पड़ रहा है।
विज्ञापन
इसके साथ ही अस्पतालों से लेकर सरकारी कार्यालयों तक में कोविड प्रोटोकाल के तहत जारी निर्देशों का अनुपालन पूरी तरह से हाशिए पर है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में मरीजों व तीमारदारों की भीड़ सोशल डिस्टेंसिंग को दर किनार कर बिना मास्क के ही दिखी। मरीजों व तीमारदारों के साथ ही अस्पतालों में तैनात स्टॉफ व चिकित्सकों ने भी कोरोना से बचाव के लिए मास्क लगाना शुरू नहीं किया है। लालबाग बाजार, जिला अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप सहित तमाम सार्वजनिक जगहों पर लोग बिना मॉस्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किए ही घूमते दिख रहे हैं।
विज्ञापन
कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए शासन ने एहतियातन सभी को बूस्टर डोज लगवाने का मशवरा दिया है। लेकिन वैक्सीन की उपलब्धता न होने से यह निर्देश कागजी साबित हो रहा है। वैक्सीन स्टॉक न होने से वर्तमान में पूरा टीकाकरण अभियान ठप पड़ा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले के सभी 37.86 लाख लोगों ने पहली और 37.29 लाख लोगों ने दूसरी डोज लगवा ली है।
विज्ञापन
लगातार जागरूकता के बाद भी 57 हजार लोग कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज लेने से वंचित बने हैं। ऐसे में बूस्टर डोज लगवाने के लिए सरकारी अस्पतालों में चल रही मुफ्त व्यवस्था बंद हो जाने से पूरे टीकाकरण अभियान पर ग्रहण लग गया है। लोग प्राइवेट अस्पताल में भुगतान देकर बूस्टर डोज लगवाने से बच रहे हैं। इसके चलते ही जिले के 28.65 लाख लोग बिना बूस्टर डोज के हैं। जो कभी भी भारी पड़ सकता है।
बूस्टर डोज सरकारी अस्पतालों लगने की सुविधा बंद होने से इसे निजी अस्पतालों में भुगतान सुविधा के साथ संचालित किया जा रहा है। इसके बावजूद जिले में प्राइवेट तौर पर सिर्फ एक ही सेंटर को कोरोना से बचने के लिए बूस्टर डोज लगाने की सुविधा दी गई है। इस निजी क्लीनिक पर भी बूस्टर डोज का टोटा होने से वैक्सीनेशन के लिए पहुंचने वालों को वापस लौटना पड़ रहा है।