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बोरवेल में गिरा मिट्टी का ढेर, किसान की मौत, मजदूर घायल
Updated Tue, 31 Jul 2018 12:07 AM IST
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घायल सीएचसी में भर्ती, पिसावां क्षेत्र में घटना
कुतुबनगर (सीतापुर)। पिसावां थाना क्षेत्र में सोमवार की सुबह बोरवेल में मिट्टी का ढेर गिर गया। इससे उसमें मौजूद एक किसान की दबकर मौत हो गई। जबकि उसका मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। दोनों लोग बोरवेल में लगे मोटर को दुरुस्त कर रहे थे। इसी बीच हादसा हो गया।
पिसावां के ग्राम जमुनिहा कुंवरपुर के पास स्थित फार्म निवासी भूपेंद्र सिंह उर्फ बन्नी सिंह (25) के खेत में बोरिंग है। हाल में ही बोरिंग में लगे मोटर में खराबी आ गई थी। इस वजह से सोमवार सुबह भूपेंद्र सिंह अपने नौकर जमुनिहा कुंवरपुर निवासी नरेंद्र (22) के साथ खेत पर गया था।
यहां पर दोनों लोग बोरवेल में उतरकर मोटर ठीक करने लगे। इसी बीच बोरवेल के आसपास की मिट्टी का ढेर कुएं में गिर गया। इससे उसमें मौजूद किसान व उसका नौकर मिट्टी के ढेर में दब गया। वहां मौजूद लोग मदद में जुटे, लेकिन वे असफल रहे।
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इसके बाद करीब के गांव से जेसीबी मशीन मंगाकर बोरवेल की मिट्टी हटाई गई। इसके बाद उसमें दबे किसान व मजदूर को बाहर निकाला गया लेकिन तब तक किसान की मौत हो चुकी थी। जबकि मजदूर गंभीर रूप से घायल हो चुका था। स्थानीय नागरिकों ने मजदूर को कस्बे की सीएचसी में भर्ती कराया है।
मदद में देरी से चली गई जान
स्थानीय नागरिकों की माने तो जिस स्थान पर हादसा हुआ, वह आबादी से दूर खेतों में है। यही वजह रही की कि वहां पर मदद पहुंचने में काफी वक्त लग गया। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मदद मिल जाती, तब शायद किसान की जान बचाई जा सकती थी।
रेतीली जमीन बनी हादसे की वजह
जिस कुएं में बोरिंग थी, उसके आसपास की जमीन रेतीली थी। घायल मजदूर नरेंद्र की मानें तो जब वे बोरवेल में उतरे, तब ऐसा बिल्कुल नहीं लग रहा था, कि आसपास की मिट्टी फटकर उनके ऊपर गिर पड़ेगी। लेकिन बारिश से रेतीली जमीन का भारी भरकम हिस्सा सीधे बोरिंग में गिर गया। जिससे दोनों उसी में दबकर रह गए। नरेंद्र का कहना है कि उसे खुद ही नहीं मालूम की उसकी सांस कैसे चल रही थी।
सिमरन पर टूटा दुखों का पहाड़
किसान भूपेंद्र के परिवार में उसकी पत्नी सिमरन कौर, पुत्र साहबदीप व पुत्री अवनीत कौर है। पूरे परिवार की जिम्मेदारी भूपेंद्र उठा रहा था। यही वजह थी कि वह रात दिन एक करके खेतों में मेहनत करता था और परिवार की जरूरतों को पूरा करता था। लेकिन एक सुबह ऐसी आई कि पूरा का पूरा परिवार गम में डूब गया।
उसकी पत्नी सिमरन जहां पति भूपेंद्र की मौत को लेकर दुखी थी, वहीं अपने दो बच्चों की परवरिश को लेकर चिंतित थी। वह बार-बार कह रही थी कि आखिर अब उसके बच्चों की परवरिश कैसे होगी, कौन उसके बच्चों की जरूरत पूरी करने के लिए कमाएगा। भूपेंद्र की मौत के बाद सिमरन के कंधों पर बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी आ गई है।
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कुतुबनगर (सीतापुर)। पिसावां थाना क्षेत्र में सोमवार की सुबह बोरवेल में मिट्टी का ढेर गिर गया। इससे उसमें मौजूद एक किसान की दबकर मौत हो गई। जबकि उसका मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। दोनों लोग बोरवेल में लगे मोटर को दुरुस्त कर रहे थे। इसी बीच हादसा हो गया।
पिसावां के ग्राम जमुनिहा कुंवरपुर के पास स्थित फार्म निवासी भूपेंद्र सिंह उर्फ बन्नी सिंह (25) के खेत में बोरिंग है। हाल में ही बोरिंग में लगे मोटर में खराबी आ गई थी। इस वजह से सोमवार सुबह भूपेंद्र सिंह अपने नौकर जमुनिहा कुंवरपुर निवासी नरेंद्र (22) के साथ खेत पर गया था।
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यहां पर दोनों लोग बोरवेल में उतरकर मोटर ठीक करने लगे। इसी बीच बोरवेल के आसपास की मिट्टी का ढेर कुएं में गिर गया। इससे उसमें मौजूद किसान व उसका नौकर मिट्टी के ढेर में दब गया। वहां मौजूद लोग मदद में जुटे, लेकिन वे असफल रहे।
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इसके बाद करीब के गांव से जेसीबी मशीन मंगाकर बोरवेल की मिट्टी हटाई गई। इसके बाद उसमें दबे किसान व मजदूर को बाहर निकाला गया लेकिन तब तक किसान की मौत हो चुकी थी। जबकि मजदूर गंभीर रूप से घायल हो चुका था। स्थानीय नागरिकों ने मजदूर को कस्बे की सीएचसी में भर्ती कराया है।
मदद में देरी से चली गई जान
स्थानीय नागरिकों की माने तो जिस स्थान पर हादसा हुआ, वह आबादी से दूर खेतों में है। यही वजह रही की कि वहां पर मदद पहुंचने में काफी वक्त लग गया। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मदद मिल जाती, तब शायद किसान की जान बचाई जा सकती थी।
रेतीली जमीन बनी हादसे की वजह
जिस कुएं में बोरिंग थी, उसके आसपास की जमीन रेतीली थी। घायल मजदूर नरेंद्र की मानें तो जब वे बोरवेल में उतरे, तब ऐसा बिल्कुल नहीं लग रहा था, कि आसपास की मिट्टी फटकर उनके ऊपर गिर पड़ेगी। लेकिन बारिश से रेतीली जमीन का भारी भरकम हिस्सा सीधे बोरिंग में गिर गया। जिससे दोनों उसी में दबकर रह गए। नरेंद्र का कहना है कि उसे खुद ही नहीं मालूम की उसकी सांस कैसे चल रही थी।
सिमरन पर टूटा दुखों का पहाड़
किसान भूपेंद्र के परिवार में उसकी पत्नी सिमरन कौर, पुत्र साहबदीप व पुत्री अवनीत कौर है। पूरे परिवार की जिम्मेदारी भूपेंद्र उठा रहा था। यही वजह थी कि वह रात दिन एक करके खेतों में मेहनत करता था और परिवार की जरूरतों को पूरा करता था। लेकिन एक सुबह ऐसी आई कि पूरा का पूरा परिवार गम में डूब गया।
उसकी पत्नी सिमरन जहां पति भूपेंद्र की मौत को लेकर दुखी थी, वहीं अपने दो बच्चों की परवरिश को लेकर चिंतित थी। वह बार-बार कह रही थी कि आखिर अब उसके बच्चों की परवरिश कैसे होगी, कौन उसके बच्चों की जरूरत पूरी करने के लिए कमाएगा। भूपेंद्र की मौत के बाद सिमरन के कंधों पर बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी आ गई है।