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200 बीघा खेत घाघरा ने निगले
Amarujala Bureau
Updated Tue, 02 Aug 2016 10:45 PM IST
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घाघरा नदी से कटान
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गांजर में घाघरा का कहर बरकरार है। सोमवार रात नदी 200 बीघा खेती को निगल गई। पचीसा व कोनी गांव में कटान तेज हो गई है। पचीसा गांव में बसे तीन सौ परिवारों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जो इस टापू पर भूमि की मोह में फंसे हुए हैं।
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दूसरी तरफ शारदा व घाघरा बैराजों से पौने तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे करीब सप्ताह से बाढ़ का दंश झेल रहे पीड़ितों की मुसीबत और बढ़ती हुई नजर आ रही है। बाढ़ग्रस्त इलाके के 80 प्रतिशत हिस्सों में अभी तक प्रशासन की मदद नहीं मिल सकी है। पीड़ित परेशान हैं और जिम्मेदार मदद के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं।
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टापू पर बसे पचीसा गांव में घाघरा का कहर बरप रहा है। सोमवार रात घाघरा ने पचीसा गांव के रामसिंह की 15 बीघा, कलेक्टर की 10 बीघा, केशराम की 20 बीघा, पैकरमा की 11 बीघा, देशराज की 10 बीघा, नंगू की 20 बीघा, लालजी की 25 बीघा, रामदास की 25 बीघा, ज्वाला की 15 बीघा, बच्चू की 10 बीघा, समई की 11 बीघा आदि किसानों की करीब 200 बीघा खेती कटकर घाघरा में बह गई है।
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ग्रामीणों का कहना है कि इतनी तेज कटान उन्होंने पहली बार देखी है। करीब 1 किलोमीटर की दूरी तक टापू पर घाघरा ने काटा है। लगभग सारे परिवार दहशत में हैं। उधर कोनी गांव में भी घाघरा कटान कर रही है। यहां पर पांच परिवारों ने घरों को छोड़ दिया है। ये घर किसी भी समय घाघरा की धार में बह सकते हैं।
हालत यह है कि कोनी गांव में चारों तरफ पानी भरा हुआ है। घर, आंगन व रास्ते सब पानी में समाए हैं। यहां के परिवार गांव में फंसे हैं। प्रमुख मार्ग पर आने के लिए भी इन पीड़ितों को 2 किलोमीटर से अधिक दूरी पानी में ही तय करनी होगी।
प्रशासन भी इनकी नहीं सुन रहा है। जिसकी वजह से गांव में फंसे लोगों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बैरागीपुर, परमेश्वरदीन पुरवा, जैतहिया, लालापुरवा, ठेकेदार पुरवा, बारिन पुरवा आदि गांवों के हाल जुदा नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन तक प्रशासन की कोई मदद नहीं पहुंची है।
अभी तक बाढ़ग्रस्त गांवों से पानी घटा नहीं है। जिसकी वजह से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ पीड़ित व उनके पालतू मवेशी भी बीमार पड़ रहे हैं। गांजर क्षेत्र का प्रमुख चौराहा मारू बेहड़ भी बाढ़ के पानी से घिर गया है। मारू बेहड़ के आसपास बाढ़ का पानी पहुंचने से क्षेत्र के लोगों को चौराहे तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
रामपुर मथुरा क्षेत्र में भी बाढ़ के हालात जस के तस बने हुए हैं। बाढ़ग्रस्त 48 गांवों में पानी कम होता नजर नहीं आ रहा है। यहां भी प्रशासन की मदद की हालत ये है कि अधिकांश पीड़ित मदद से वंचित रह गए हैं। उधर शारदा व घाघरा बैराज से 2,80,409 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे बाढ़ के हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। यह पानी जब सीतापुर पहुंचेगा, तब बाढ़ के पानी में और इजाफा होगा।
नहीं पहुंचा मोबाइल शौचालय
पांच दिन पहले बाढ़ग्रस्त इलाके में डीएम अमृत त्रिपाठी पहुंचे थे। उन्होंने मोबाइल शौचालय लगाने के निर्देश दिए थे। पांच दिन बीतने के बाद भी अभी तक किसी भी गांव में मोबाइल शौचालय की व्यवस्था नहीं की गई है। ये बात अलग है कि प्रशासन मोबाइल शौचालय बाढ़ ग्रस्त इलाके में तैनात करने के दावे कर रहा है।
बैराजों से छोड़ा गया पानी