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20 गांवों के करीब हिलोरे मार रहा बाढ़ का पानी
Updated Sun, 29 Jul 2018 12:19 AM IST
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सीतापुर। घाघरा नदी इन दिनों पूरी तरह से उफान पर है। नदी की बाढ़ का पानी क्षेत्र के 20 गांवों के करीब पहुंच गया है। रेउसा क्षेत्र में त्यागी बाबा आश्रम में भी बाढ़ का पानी घुस रहा है। तटीय क्षेत्र के अधिकांश संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए हैं। जबकि 1500 बीघा से अधिक की खेती जलमग्न हो गई है।
जहां नदी का ऐसा रूप है, वहीं शनिवार को बैराजों से ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे आने वाले दिनों में भी मुसीबत बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। हालांकि प्रशासन हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार रहने की बात कह रहा है।
शनिवार को कोनी के निकट घाघरा नदी के कटान की रफ्तार तो थम गई। लेकिन नदी में उफान मारता पानी तटीय क्षेत्र के बाशिंदों को भयभीत कर रहा है। चहलारी घाट के निकट त्यागी बाबा आश्रम है, शनिवार को वहां पर नदी इस कदर उफनाई की कि पानी तेजी से आश्रम की जमीन पर पहुंच रहा है।
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कोनी, परमेश्वर पुरवा, फौजदार पुरवा आदि गांवों को जाने वाले करीब सात संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए हैं। बाढ़ का पानी जहां कोनी से सटकर बह रहा है, वहीं लोध पुरवा गांव से महज 50 मीटर की दूरी पर मौजूद है। कुछ ऐसा ही हाल दुर्गा पुरवा, मरेली, जैतहिया, कटैला पुरवा, दर्जिन रेती आदि गांवों की है। जहां पर चंद कदमों की दूरी पर ही बाढ़ का पानी मौजूद है।
तटीय क्षेत्र के करीब 20 गांव बाढ़ के मुहाने पर खड़े हैं। पानी का वेग देखकर लग रहा है, कि किसी भी समय बाढ़ का पानी गांवों में प्रवेश कर सकता है। इस वजह से तटीय क्षेत्र की आबादी में हड़कंप की स्थिति है। तटीय क्षेत्र के बाशिंदे घरेलू सामान को समेटकर सुरक्षित ठिकानों का रुख कर रहे हैं। जहां आबादी का यह है, वहीं करीब 1500 बीघे से अधिक की खेती जलमग्न हो गई है।
जो बची है, वह भी चपेट में आती जा रही है। जहां नदी का ऐसा रूप है, वहीं आने वाले दिनों में भी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। पहाड़ो पर बारिश की वजह से बैराजों पर काफी मात्रा में पानी जमा हो रहा है। यही वजह रही कि शनिवार को घाघरा व शारदा बैराजों से कुल 2,52,830 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस पानी मात्रा काफी मानी जा रही है। यही वजह है कि तटीय क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात से निजात मिलती नजर नहीं आ रही है।
पशुओं को होने लगी चारे की दिक्कत
तटीय क्षेत्र के बाशिंदों की माने तो नदी के उफनाने से पशुओं के चारे की दिक्कतें होने लगी हैं। लोगों का कहना है कि नदी के किनारे व टापू पर बड़े बड़े घास के मैदान थे। आम दिनों में क्षेत्र के पशु इन्हीं मैदानों में जाकर चरते थे और घास से अपनी भूख मिटाते थे। लेकिन नदी के उफनाने से घास के मैदान बाढ़ के पानी में गुम हो गए हैं। वहीं खेती भी बाढ़ की चपेट में आ गई है। इससे पशुओं के लिए हरी घास मिल पाना मुश्किल हो रहा है।
बैराजों से छोड़ा गया पानी
घाघरा 117776क्यूसेक
शारदा 135054 क्यूसेक
बनबसा 80932 क्यूसेक
स्थिति पर रखी जा रही नजर
घाघरा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। कुछ गांवों के संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी की चपेट में आए हैं, लेकिन हालात अभी बाढ़ जैसे नहीं है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है। -शशिभूषण राय, एसडीएम
आशियानों की तलाश, ऊपर से मौसम की मार
रेउसा (सीतापुर)। इन दिनों तटीय क्षेत्र के बाशिंदे अजीबोगरीब कश्मकश में पड़े हुए हैं। हालत यह है कि नीचे घाघरा नदी की लहरें तबाही मचा रही हैं, जिससे आशियानें तबाह हो रहे हैं। ऊपर मौसम खलनायक बना हुआ है। जो नदी की लहरों से बेघर हुए परिवार जब सड़कों पर पहुंच रहे हैं, वहीं बरसात उनकी परेशानी का सबब बन रही है।
कटान की वजह से बिल्लर पुरवा निवासी जंगबहादुर ने चहलारी मार्ग के किनारे श्याम नगर में टीनशेड डालकर जिंदगी की नई पारी शुरू कर दी है। इस टीन शेड के नीचे उसकी पत्नी राजमती अपने चार बच्चों के साथ रहती है। नदी के कटान से परेशान हुए इस परिवार को नया आशियाना मिलने के बाद भी सुकून मिलते नजर नहीं आ रहा है। वजह यह है कि यहां पर मौसम खलनायक बना हुआ है।
हर दिन बारिश होती है। जग बहादुर ने जो टीन शेड डाला है, वह इतना भी नहीं है कि परिवार को बारिश से बचा सके। नतीजा परिवार को भीगना पड़ता है। अगर हवा का झोंका तेज है, तो टीन शेड का कोई मतलब ही नहीं रह जाता। बारिश का पूरा पानी सीधे घर में बरसता नजर आता है। ऐसा हाल कोई अकेले जंग बहादुर का ही नहीं है।
बल्कि सुदामा, रमाशंकर आदि दर्जनों परिवारों का है, जो कटान में घर गंवाने के बाद सड़क पर आए, अब वहां भी सुकून नहीं है। श्याम नगर के बाशिंदों ने बताया कि नदी जब विकराल रूप लेगी, तब यह जमीन भी बाढ़ की चपेट में आ जाएगी। ऐसे में सीतापुर-बहराइच मार्ग ही उनकी शरण स्थली बनेगा।
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जहां नदी का ऐसा रूप है, वहीं शनिवार को बैराजों से ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे आने वाले दिनों में भी मुसीबत बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। हालांकि प्रशासन हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार रहने की बात कह रहा है।
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शनिवार को कोनी के निकट घाघरा नदी के कटान की रफ्तार तो थम गई। लेकिन नदी में उफान मारता पानी तटीय क्षेत्र के बाशिंदों को भयभीत कर रहा है। चहलारी घाट के निकट त्यागी बाबा आश्रम है, शनिवार को वहां पर नदी इस कदर उफनाई की कि पानी तेजी से आश्रम की जमीन पर पहुंच रहा है।
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कोनी, परमेश्वर पुरवा, फौजदार पुरवा आदि गांवों को जाने वाले करीब सात संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए हैं। बाढ़ का पानी जहां कोनी से सटकर बह रहा है, वहीं लोध पुरवा गांव से महज 50 मीटर की दूरी पर मौजूद है। कुछ ऐसा ही हाल दुर्गा पुरवा, मरेली, जैतहिया, कटैला पुरवा, दर्जिन रेती आदि गांवों की है। जहां पर चंद कदमों की दूरी पर ही बाढ़ का पानी मौजूद है।
तटीय क्षेत्र के करीब 20 गांव बाढ़ के मुहाने पर खड़े हैं। पानी का वेग देखकर लग रहा है, कि किसी भी समय बाढ़ का पानी गांवों में प्रवेश कर सकता है। इस वजह से तटीय क्षेत्र की आबादी में हड़कंप की स्थिति है। तटीय क्षेत्र के बाशिंदे घरेलू सामान को समेटकर सुरक्षित ठिकानों का रुख कर रहे हैं। जहां आबादी का यह है, वहीं करीब 1500 बीघे से अधिक की खेती जलमग्न हो गई है।
जो बची है, वह भी चपेट में आती जा रही है। जहां नदी का ऐसा रूप है, वहीं आने वाले दिनों में भी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। पहाड़ो पर बारिश की वजह से बैराजों पर काफी मात्रा में पानी जमा हो रहा है। यही वजह रही कि शनिवार को घाघरा व शारदा बैराजों से कुल 2,52,830 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस पानी मात्रा काफी मानी जा रही है। यही वजह है कि तटीय क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात से निजात मिलती नजर नहीं आ रही है।
पशुओं को होने लगी चारे की दिक्कत
तटीय क्षेत्र के बाशिंदों की माने तो नदी के उफनाने से पशुओं के चारे की दिक्कतें होने लगी हैं। लोगों का कहना है कि नदी के किनारे व टापू पर बड़े बड़े घास के मैदान थे। आम दिनों में क्षेत्र के पशु इन्हीं मैदानों में जाकर चरते थे और घास से अपनी भूख मिटाते थे। लेकिन नदी के उफनाने से घास के मैदान बाढ़ के पानी में गुम हो गए हैं। वहीं खेती भी बाढ़ की चपेट में आ गई है। इससे पशुओं के लिए हरी घास मिल पाना मुश्किल हो रहा है।
बैराजों से छोड़ा गया पानी
घाघरा 117776क्यूसेक
शारदा 135054 क्यूसेक
बनबसा 80932 क्यूसेक
स्थिति पर रखी जा रही नजर
घाघरा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। कुछ गांवों के संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी की चपेट में आए हैं, लेकिन हालात अभी बाढ़ जैसे नहीं है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है। -शशिभूषण राय, एसडीएम
आशियानों की तलाश, ऊपर से मौसम की मार
रेउसा (सीतापुर)। इन दिनों तटीय क्षेत्र के बाशिंदे अजीबोगरीब कश्मकश में पड़े हुए हैं। हालत यह है कि नीचे घाघरा नदी की लहरें तबाही मचा रही हैं, जिससे आशियानें तबाह हो रहे हैं। ऊपर मौसम खलनायक बना हुआ है। जो नदी की लहरों से बेघर हुए परिवार जब सड़कों पर पहुंच रहे हैं, वहीं बरसात उनकी परेशानी का सबब बन रही है।
कटान की वजह से बिल्लर पुरवा निवासी जंगबहादुर ने चहलारी मार्ग के किनारे श्याम नगर में टीनशेड डालकर जिंदगी की नई पारी शुरू कर दी है। इस टीन शेड के नीचे उसकी पत्नी राजमती अपने चार बच्चों के साथ रहती है। नदी के कटान से परेशान हुए इस परिवार को नया आशियाना मिलने के बाद भी सुकून मिलते नजर नहीं आ रहा है। वजह यह है कि यहां पर मौसम खलनायक बना हुआ है।
हर दिन बारिश होती है। जग बहादुर ने जो टीन शेड डाला है, वह इतना भी नहीं है कि परिवार को बारिश से बचा सके। नतीजा परिवार को भीगना पड़ता है। अगर हवा का झोंका तेज है, तो टीन शेड का कोई मतलब ही नहीं रह जाता। बारिश का पूरा पानी सीधे घर में बरसता नजर आता है। ऐसा हाल कोई अकेले जंग बहादुर का ही नहीं है।
बल्कि सुदामा, रमाशंकर आदि दर्जनों परिवारों का है, जो कटान में घर गंवाने के बाद सड़क पर आए, अब वहां भी सुकून नहीं है। श्याम नगर के बाशिंदों ने बताया कि नदी जब विकराल रूप लेगी, तब यह जमीन भी बाढ़ की चपेट में आ जाएगी। ऐसे में सीतापुर-बहराइच मार्ग ही उनकी शरण स्थली बनेगा।