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धनुष भंग का जीवंत मंचन देख दर्शक हुए भावविभोर
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:20 AM IST
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राम के छूते ही टूट गया धनुष
कमलापुर (सीतापुर)। कसमंडा स्टेट की ओर से कराई जाने वाली रामलीला में रविवार को धनुषभंग व सीता स्वयंबर का मंचन किया गया।
इसके साथ ही भगवान राम के जयकारों से पंडाल गूंज उठा। यहां होने वाली रामलीली दौ साल पुरानी है। हर साल कसमंडा स्टेट की ओर से इसका आयोजन किया जाता है।
रामलीला में रविवार को धनुषभंग व सीता स्वयंबर का मंचन किया गया। मंचन में दिखाया गया कि जब कई बलशाली राजा अथक प्रयास के बाद भी शिवजी का धुनष हिला तक नहीं सके तो स्वयंवर में सन्नाटा पसर गया।
इसी बीच गुरु की आज्ञा से प्रभु श्रीराम धनुश तोड़ने के लिए आते हैं। धनुष को प्रणाम करने के बाद वह उसे उठाते हैं। राम ने धनुष उठाकर ज्यों ही उसकी डोरी बांधनी चाही, वह टूट गया।
धनुष भंग होते ही तेज गर्जना से सभी चौंक उठे। कलाकारों का जीवंत अभिनय देख दर्शक भावविह्वल हो गए। कसमंडा स्टेट के मैनेजर मधुकृष्ण पांडेय ने बताया कि 30 सितंबर को दशहरा मेला के दौरान रावण दहन होगा।
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दशहरा पर्व के दिन राजा दिव्यकर प्रताप सिंह अपनी कोठी में शस्त्र पूजन करेंगे। इसके बाद राधा-कृष्ण मंदिर फिर स्व. जवाहर सिंह की समाधि पर दर्शन कर रामलीला का आनंद उठारएंगे।
रावण दहन के बाद राजमहल के मित्र भवन में जनता से रूबरू होंगे। मेला ग्राउंड व राजमहल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए थाना प्रभारी कमलापुर को कार्यक्रम का ब्यौरा उपलब्ध करा दिया गया है।
मालूम हो कि यह ऐतिहासिक रामलीला आजादी के पहले से होती आ रही है। दशहरा बाग में हर साल इसका आयोजन कसमंडा स्टेट की देखरेख में होता है।
इस प्राचीन व ऐतिहासिक रामलीला की शुरुआत करीब 200 साल पहले राजा जवाहर सिंह ने की थी। उसके बाद से आज तक उनके वंशज इसका आयोजन प्रतिवर्ष कराते आ रहे हैं।
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कमलापुर (सीतापुर)। कसमंडा स्टेट की ओर से कराई जाने वाली रामलीला में रविवार को धनुषभंग व सीता स्वयंबर का मंचन किया गया।
इसके साथ ही भगवान राम के जयकारों से पंडाल गूंज उठा। यहां होने वाली रामलीली दौ साल पुरानी है। हर साल कसमंडा स्टेट की ओर से इसका आयोजन किया जाता है।
रामलीला में रविवार को धनुषभंग व सीता स्वयंबर का मंचन किया गया। मंचन में दिखाया गया कि जब कई बलशाली राजा अथक प्रयास के बाद भी शिवजी का धुनष हिला तक नहीं सके तो स्वयंवर में सन्नाटा पसर गया।
इसी बीच गुरु की आज्ञा से प्रभु श्रीराम धनुश तोड़ने के लिए आते हैं। धनुष को प्रणाम करने के बाद वह उसे उठाते हैं। राम ने धनुष उठाकर ज्यों ही उसकी डोरी बांधनी चाही, वह टूट गया।
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धनुष भंग होते ही तेज गर्जना से सभी चौंक उठे। कलाकारों का जीवंत अभिनय देख दर्शक भावविह्वल हो गए। कसमंडा स्टेट के मैनेजर मधुकृष्ण पांडेय ने बताया कि 30 सितंबर को दशहरा मेला के दौरान रावण दहन होगा।
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दशहरा पर्व के दिन राजा दिव्यकर प्रताप सिंह अपनी कोठी में शस्त्र पूजन करेंगे। इसके बाद राधा-कृष्ण मंदिर फिर स्व. जवाहर सिंह की समाधि पर दर्शन कर रामलीला का आनंद उठारएंगे।
रावण दहन के बाद राजमहल के मित्र भवन में जनता से रूबरू होंगे। मेला ग्राउंड व राजमहल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए थाना प्रभारी कमलापुर को कार्यक्रम का ब्यौरा उपलब्ध करा दिया गया है।
मालूम हो कि यह ऐतिहासिक रामलीला आजादी के पहले से होती आ रही है। दशहरा बाग में हर साल इसका आयोजन कसमंडा स्टेट की देखरेख में होता है।
इस प्राचीन व ऐतिहासिक रामलीला की शुरुआत करीब 200 साल पहले राजा जवाहर सिंह ने की थी। उसके बाद से आज तक उनके वंशज इसका आयोजन प्रतिवर्ष कराते आ रहे हैं।