फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   महंगी किताबों खरीदने को मजबूर अभिभावक

महंगी किताबों खरीदने को मजबूर अभिभावक

Sat, 08 Jun 2019 12:18 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jun 2019 12:18 AM IST
विज्ञापन
महंगी किताबों खरीदने को मजबूर अभिभावक
मनमानी कर कॉलेज एनसीईआरटी के दूसरे प्रकाशकों की चला रहे पुस्तकें
विज्ञापन

सीतापुर। माध्यमिक कॉलेज के विद्यार्थियों को निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें न खरीदने पड़ें इसके लिए शासन ने सभी कॉलेजों में एनसीईआरटी की पुस्तकें चलाने का निर्देश दिए थे। बाकायदा प्रकाशक तय करके सस्ते दर पर जिले में पुस्तकें उपलब्ध करा दी थीं।

इससे कॉलेजों की कमीशनखोरी बंद हो गई है। इसका काट निकालते हुए कॉलेजों ने पुस्तकें तो एनसीईआरटी की चलाई है, लेकिन प्रकाशक बदल दिए हैं। इन प्रकाशकों की पुस्तकें बहुत महंगी हैं। इससे अभिभावकों के जेब पर अधिक भार पड़ रहा है। वहीं निर्धारित प्रकाशन की पुस्तकें डंप हो रही हैं।
विज्ञापन


इस समस्या की शासन स्तर को लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इस पर शासन ने डीआईओएस को पत्र जारी करके इस धांधली की जांच करने के हिदायत दी है। साथ ही सभी कॉलेजों में निर्धारित प्रकाशक की ही पुस्तकें चलवाने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


शासन ने पिछले बरस एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अनुसार नवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई कराने का निर्देश दिया था। इसके लिए प्रकाशक व पुस्तकें के रेट निर्धारित कर दिए थे। बाजार में इन पुस्तकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करा दी थी।

यह पुस्तकें अन्य प्रकाशकों से काफी सस्ती थीं। इसके पीछे उद्देश्य था कि अभिभावकों पर कॉपी किताबों का कम बोझ पड़े। वहीं विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा मिल सके। इससे कॉलेजों की कमीशनखोरी बंद हो गई थी। इन पुस्तकों पर उनको कोई कमीशन नहीं मिल रहा था।

इससे परेशान कॉलेज प्रबंधकों ने इसका दूसरा विकल्प निकाल लिया है। वह एनसीईआरटी की पुस्तकें तो अपने कॉलेज में चलवा रहे हैं। लेकिन प्रकाशक बदल दिए है। दूसरे प्रकाशनों की पुस्तकें बहुत ही महंगी हैं। इससे अभिभावकों पर अधिक आर्थिक बोझ आ रहा है।

वहीं निर्धारित प्रकाशक की पुस्तकें बाजार में मौजूद हैं, लेकिन वह बिक नहीं रही हैं। इसकी अभिभावक व प्रकाशकों ने शासन स्तर पर शिकायत दर्ज कराई है। इस पर शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। डीआईओएस को जिले में निर्धारित प्रकाशक की पुस्तकेें चलवाने की हिदायत दी है। साथ ही जांच करके रिपोर्ट भी तलब की है।

यह तय हुए हैं प्रकाशक
कक्षा नौ से इंटर तक के लिए 47 पुस्तकों को एनसीईआरटी में शामिल किया गया है। यह पांच प्रकाशक की पुस्तकें हैं। जिनमें राजीव प्रकाशन, प्रयागराज, रवि ऑफसेट प्रिंटर्स एंड पब्लिशर्स प्राइवेट लिमिटेड, पीताम्बरा बुक्स प्राइवेट लिमिटेड, जनरल ऑफसेट प्रिटिंग प्रेस, मेसर्स आलोक प्रिंटर्स आगरा है। लेकिन कॉलेजों में इनसे इतर पुस्तकें चल रही हैं।


जांच करके होगी कार्रवाई
सभी कॉलेज निर्धारित प्रकाशक की ही पुस्तकें अपना यहां चलवाएं। औचक निरीक्षण करने पर अगर दूसरे प्रकाशक की पुस्तकें मिलती हैं तो कॉलेज के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-नरेंद्र शर्मा, डीआईओएस
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed