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तीसरी-चौथी बार संसद पहुंचाया, मगर जिला बेजार
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सीतापुर। उपलब्धियों के स्कोर बोर्ड पर जीरो दर्ज होने के बावजूद तिबारा-चौबारा संसद में दाखिला दरअसल लोकतंत्र की गजब बलिहारी है। सीतापुर, जिला धौरहरा, मोहनलालगंज व मिश्रिख संसदीय क्षेत्र का राजीतिक जंक्शन है।
इस नजरिए से देखा जाए तो सीतापुर को चार सांसदों की नुमाइंदगी हासिल है। खास तो ये है कि हैरतअंगेज लहर पर सवार होकर संसद में दाखिल हो रहे चारों सांसद दूसरी, तीसरी व चौथी दफा विजयी हुए हैं।
जातीय समीकरण और अनूठी लहर के बावजूद इनके सिर ताज सजा है मगर सीतापुर वहीं का वहीं है, जहां सालों पहले खड़ा था। बिल्कुल बेजार। जनता अब भी ये उम्मीद लगाए है कि शायद उम्मीदें पूरी हों।
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सीतापुर संसदीय क्षेत्र से डॉ. राजेंद्र कुमारी वाजपेयी तथा रामलाल राही केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। डॉ. अम्मार रिजवी, मुख्तार अनीस व राजेंद्र गुप्त सरीखे वजनदार मंत्रियों की छाया भी इसकी खास उपलब्धि है।
इन नामचीन राजनेताओं ने कई कई बार संसद व विधानसभा में दाखिला पाया है। अपनी तरह के अनूठे रणक्षेत्र में आज दोबारा निर्वाचित हुए चारों सांसद भी तीसरी-चौथी पारी खेलने जा रहे हैं।
सीतापुर से नवनिर्वाचित सांसद राजेश वर्मा चौथी बार (भाजपा/बसपा), मिश्रिख से अशोक रावत तीसरी (भाजपा/बसपा) धौरहरा से रेखा वर्मा दूसरी तथा मोहनलालगंज से कौशल किशोर (भाजपा) लगातार दूसरी दफा लोकसभा में जा रहे हैं।
चारों लोकसभा क्षेत्रों में सीतापुर जिले के नौ विधानसभा क्षेत्र, सात तहसीलें तथा 19 ब्लॉक आते हैं, जहां की आबादी करीब 45 लाख है। चारों संसदीय क्षेत्रों के जंक्शन होने का गौरव तो है मगर विकास को आज तक रफ्तार नहीं मिली। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य व पेयजल की समस्या जस की तस है।
सीतापुर-शाहजहांपुर राजमार्ग दस साल से अधूरा पड़ा है और इस पर आए दिन हादसे होते हैं। पुराने सीतापुर में बालिका डिग्री कॉलेज की घोषणा अमलीजामा पहनाने का इंतजार कर रही है।
शहर के जमैयतपुर में ट्रॉमा सेंटर की बिल्डिंग तीन साल से बनकर तैयार है, मगर यहां स्वास्थ्य सेवाओं की संचालन नहीं शुरू हो सका है। इसके चलते प्रतिमाह दर्जनों गंभीर मरीजों को ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर करना पड़ता है।
भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है। लोग पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं गांजर इलाका बरसों से बाढ़ग्रस्त है। मगर इन मोर्चों पर बदलाव को लेकर कोई खास प्रयास ही नहीं किए गए।
पूरे हिंदुस्तान में नैमिषारण्य की पौराणिकता का डंका गूंजता है मगर इसके विकास को अब तक रफ्तार नहीं मिली। इन सबके बावजूद जनता ने चारों नुमाइंदों को इस उम्मीद से लगभग दोगुने वोटों से जिताया है कि शायद अबकी उम्मीदें पूरी हों।
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इस नजरिए से देखा जाए तो सीतापुर को चार सांसदों की नुमाइंदगी हासिल है। खास तो ये है कि हैरतअंगेज लहर पर सवार होकर संसद में दाखिल हो रहे चारों सांसद दूसरी, तीसरी व चौथी दफा विजयी हुए हैं।
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जातीय समीकरण और अनूठी लहर के बावजूद इनके सिर ताज सजा है मगर सीतापुर वहीं का वहीं है, जहां सालों पहले खड़ा था। बिल्कुल बेजार। जनता अब भी ये उम्मीद लगाए है कि शायद उम्मीदें पूरी हों।
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सीतापुर संसदीय क्षेत्र से डॉ. राजेंद्र कुमारी वाजपेयी तथा रामलाल राही केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। डॉ. अम्मार रिजवी, मुख्तार अनीस व राजेंद्र गुप्त सरीखे वजनदार मंत्रियों की छाया भी इसकी खास उपलब्धि है।
इन नामचीन राजनेताओं ने कई कई बार संसद व विधानसभा में दाखिला पाया है। अपनी तरह के अनूठे रणक्षेत्र में आज दोबारा निर्वाचित हुए चारों सांसद भी तीसरी-चौथी पारी खेलने जा रहे हैं।
सीतापुर से नवनिर्वाचित सांसद राजेश वर्मा चौथी बार (भाजपा/बसपा), मिश्रिख से अशोक रावत तीसरी (भाजपा/बसपा) धौरहरा से रेखा वर्मा दूसरी तथा मोहनलालगंज से कौशल किशोर (भाजपा) लगातार दूसरी दफा लोकसभा में जा रहे हैं।
चारों लोकसभा क्षेत्रों में सीतापुर जिले के नौ विधानसभा क्षेत्र, सात तहसीलें तथा 19 ब्लॉक आते हैं, जहां की आबादी करीब 45 लाख है। चारों संसदीय क्षेत्रों के जंक्शन होने का गौरव तो है मगर विकास को आज तक रफ्तार नहीं मिली। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य व पेयजल की समस्या जस की तस है।
सीतापुर-शाहजहांपुर राजमार्ग दस साल से अधूरा पड़ा है और इस पर आए दिन हादसे होते हैं। पुराने सीतापुर में बालिका डिग्री कॉलेज की घोषणा अमलीजामा पहनाने का इंतजार कर रही है।
शहर के जमैयतपुर में ट्रॉमा सेंटर की बिल्डिंग तीन साल से बनकर तैयार है, मगर यहां स्वास्थ्य सेवाओं की संचालन नहीं शुरू हो सका है। इसके चलते प्रतिमाह दर्जनों गंभीर मरीजों को ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर करना पड़ता है।
भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है। लोग पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं गांजर इलाका बरसों से बाढ़ग्रस्त है। मगर इन मोर्चों पर बदलाव को लेकर कोई खास प्रयास ही नहीं किए गए।
पूरे हिंदुस्तान में नैमिषारण्य की पौराणिकता का डंका गूंजता है मगर इसके विकास को अब तक रफ्तार नहीं मिली। इन सबके बावजूद जनता ने चारों नुमाइंदों को इस उम्मीद से लगभग दोगुने वोटों से जिताया है कि शायद अबकी उम्मीदें पूरी हों।