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नदी के मुहाने पर 15 घर, स्कूल पर भी संकट
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रेउसा (सीतापुर)। तराई इलाके में शारदा व सरयू नदी के पानी में उतार-चढ़ाव जारी है। बिसवां तहसील के दर्जिनरेती गांव से महज 10 मीटर दूर सरयू नदी का पानी पहुंच गया है। इससे यहां के 15 घरों पर कटान का खतरा मंडराने लगा है। फौजदारपुरवा के सात परिवार अपने घर तोड़कर पलायन कर गए है।
गुरुवार को लखीमपुर के बैराजों से 2.73 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यह पानी देर रात तक जिले की नदियों में आने की उम्मीद जताई जा रही है। बिसवां तहसील की ग्राम पंचायत गोलोक कोडर का मजरा दर्जिनरेती सरयू नदी की चपेट में आ रहा है। गांव से महज 10 मीटर दूर नदी का पानी पहुंचने से लोगों की सांसे बढ़ने लगी है। गांव में करीब 15 परिवार निवास है, जिनकी आबादी करीब एक सैकड़ा है।
गांव के जिगर, सलीम, मोहम्मद उमर, राजू, मेंहदी, मुन्ना, अनवर, रियासत अली, मकसूद अली, इस्लामुद्दीन, रमजान, नसीम आदि का कहना है कि उनके घर कटान की चपेट में पहुंच रहे है। जिला प्रशासन द्वारा फौजदारपुरवा, चौकी पुरवा में बाढ़ से बचाव के इंतजाम कराए जा रहे है लेकिन हम लोगों के यहां बचने का कोई इंतजाम नहीं है। अगर प्रशासन ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया तो हम लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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फौजदारपुरवा में स्कूल की बाउंड्रीवाल के पास पानी पहुंच चुका है। गांव के भिखारी, रामू, राकेश, विनोद, त्रिभुवन, राजाराम, रामसहारे ने कटान के भय से घर तोड़ लिए है। इन सभी ने आजाद नगर रास्ते पर पलायन करके डेरा डाल लिया है। नदियों से छोड़ा गया पानी देर रात तक जिले में पहुंच जाएगा। इससे नदियों का जलस्तर थोड़ा बढ़ सकता है।
पिछले बरस कट गया था धार्मिक स्थल
दर्जिनपुरवा में एक धार्मिक स्थल बना हुआ था। पिछले बरस जब बाढ़ आई थी तो यह स्थल पूरी तरह से कट गया था। इस बार भले ही गांव से अभी दूर पानी हो। लेकिन ग्रामीण पिछले बरस की याद करके सिसक जाते है। ग्रामीणों का कहना है पिछले बरस के अभी घाव भरे नहीं है और एक बार फिर से पानी की आहट से धड़कने तेज हो गई है।
50 बीघा कटी जमीन
शारदा व सरयू नदी का कटान गांवों में परती जमीनों पर तेजी से हो रहा है। म्योढ़ी छोलहा, जटपुरवा, चौकीपुरवा, परमेश्वरपुरवा व दर्जिनरेती गांव में इन नदियों ने शुक्रवार को करीब 50 बीघा जमीन काट दी है। जबकि इससे पहले फौजदारपुरवा में तमाम जमीन कट चुकी है।
बराबर हो रही है निगरानी
जिन गांवों के समीप नदी का पानी पहुंच रहा है। वहां पर बराबर निगरानी कराई जा रही है। अभी बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं है। जिनके घर व जमीन कट रही है उसका लेखपालों के माध्यम से सर्वे कराया जा रहा है।
ज्ञानेंद्र पांडेय, नायब तहसीलदार, बिसवां
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गुरुवार को लखीमपुर के बैराजों से 2.73 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यह पानी देर रात तक जिले की नदियों में आने की उम्मीद जताई जा रही है। बिसवां तहसील की ग्राम पंचायत गोलोक कोडर का मजरा दर्जिनरेती सरयू नदी की चपेट में आ रहा है। गांव से महज 10 मीटर दूर नदी का पानी पहुंचने से लोगों की सांसे बढ़ने लगी है। गांव में करीब 15 परिवार निवास है, जिनकी आबादी करीब एक सैकड़ा है।
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गांव के जिगर, सलीम, मोहम्मद उमर, राजू, मेंहदी, मुन्ना, अनवर, रियासत अली, मकसूद अली, इस्लामुद्दीन, रमजान, नसीम आदि का कहना है कि उनके घर कटान की चपेट में पहुंच रहे है। जिला प्रशासन द्वारा फौजदारपुरवा, चौकी पुरवा में बाढ़ से बचाव के इंतजाम कराए जा रहे है लेकिन हम लोगों के यहां बचने का कोई इंतजाम नहीं है। अगर प्रशासन ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया तो हम लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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फौजदारपुरवा में स्कूल की बाउंड्रीवाल के पास पानी पहुंच चुका है। गांव के भिखारी, रामू, राकेश, विनोद, त्रिभुवन, राजाराम, रामसहारे ने कटान के भय से घर तोड़ लिए है। इन सभी ने आजाद नगर रास्ते पर पलायन करके डेरा डाल लिया है। नदियों से छोड़ा गया पानी देर रात तक जिले में पहुंच जाएगा। इससे नदियों का जलस्तर थोड़ा बढ़ सकता है।
पिछले बरस कट गया था धार्मिक स्थल
दर्जिनपुरवा में एक धार्मिक स्थल बना हुआ था। पिछले बरस जब बाढ़ आई थी तो यह स्थल पूरी तरह से कट गया था। इस बार भले ही गांव से अभी दूर पानी हो। लेकिन ग्रामीण पिछले बरस की याद करके सिसक जाते है। ग्रामीणों का कहना है पिछले बरस के अभी घाव भरे नहीं है और एक बार फिर से पानी की आहट से धड़कने तेज हो गई है।
50 बीघा कटी जमीन
शारदा व सरयू नदी का कटान गांवों में परती जमीनों पर तेजी से हो रहा है। म्योढ़ी छोलहा, जटपुरवा, चौकीपुरवा, परमेश्वरपुरवा व दर्जिनरेती गांव में इन नदियों ने शुक्रवार को करीब 50 बीघा जमीन काट दी है। जबकि इससे पहले फौजदारपुरवा में तमाम जमीन कट चुकी है।
बराबर हो रही है निगरानी
जिन गांवों के समीप नदी का पानी पहुंच रहा है। वहां पर बराबर निगरानी कराई जा रही है। अभी बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं है। जिनके घर व जमीन कट रही है उसका लेखपालों के माध्यम से सर्वे कराया जा रहा है।
ज्ञानेंद्र पांडेय, नायब तहसीलदार, बिसवां