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मिश्रिख पालिका अध्यक्ष सहित 14 पार्टी से बाहर

Sat, 24 Apr 2021 11:04 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 24 Apr 2021 11:04 PM IST
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14 out of 14 party, including Mishrikh Municipality President
सीतापुर। पंचायत चुनावों में बगावती तेवर अपनाने वाले 14 पदाधिकारियों को भाजपा ने छह वर्ष के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया है। पार्टी के इस कदम की प्रतिक्रिया भी आनी शुरू हो गई हैं। कुछ पार्टी के कदम की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ आलोचना के स्वर बुलंद कर रहे हैं।
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जिला पंचायत चुनाव के लिए पार्टी ने सभी 79 पदों के सूची जारी की थी। इससे भाजपा के कई कार्यकर्ता निराशा हो गए।
कई ऐसे लोगों को टिकट दिया गया, जिन्होंने चंद समय पहले ही पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। पर्चा वापसी न होने के चलते उनके बगावती तेवर सार्वजनिक नहीं हो पा रहे थे। चुनाव चिह्न आवंटित होने के साथ ही तस्वीर साफ हो गई। बगावती तेवर अपनाने वालों ने पर्चा वापस नहीं लिया तो कुछ ने पार्टी समर्थित उम्मीदवारों का विरोध करना शुरू कर दिया।
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इसकी जानकारी प्रदेश कार्यालय को हुई। बगावत करने वालों का फेहरिस्त तैयार की गई। इसके बाद कार्रवाई का चाबुक चलाया गया। नगर पालिका मिश्रिख की अध्यक्ष सरला भार्गव और मंडल महामंत्री खुशीराम मौर्य को पुत्र वधू को चुनाव लड़ाने के चलते बाहर किया गया है। बगावत करके जिला पंचायत लड़ रहे पूर्व जिला मंत्री अरविंद सिंह, पूर्व मंडल अध्यक्ष युवा मोर्चा जगदीश निषाद, मंडल महामंत्री सेनजीत मौर्य, बूथ अध्यक्ष सियाराम जायसवाल, सेक्टर संयोजक सुभाष गिरी, सेक्टर प्रभरी अशोक बाजपेई और झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।
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पत्नी को चुनाव लड़ाने के चलते जिला उपाध्यक्ष अनुसूचित मोर्चा मुकेश कनौजिया, क्रय विक्रय समिति के चेयरमैन मनोज तिवारी और जिला उपाध्यक्ष किसान मोर्चा अनुराग मिश्र को बाहर कर दिया गया है। युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष बलवीर सिंह यादव को बेटे को चुनावी मैदान में उतारने पर बाहर का रास्ता दिखाया गया है। मंडल अध्यक्ष कृष्णपाल सिंह को पार्टी समर्थित उम्मीदवार को विरोध में वोट मांगने के चलते बाहर किया गया है।

‘दलबदलुओं को दी गई तरजीह’
पार्टी के इस निर्णय की राजनीतिक गलियों में चर्चाओं को बाजार गर्म हो गया है। विपक्षी दल चिंगारी को भड़काकर ज्वाला बनाने की फिराक में हैं। भाजपा से भी मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ पार्टी के निर्णय को सही बताकर कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रहने की नसीहत दे रहे हैं तो कुछ पार्टी के निर्णय के विरोध में तर्क दे रहे हैं और सोशल मीडिया पर पोस्ट करके भड़ास निकाल रहे हैं। भाजपा के एक कार्यकर्ता ने फेस बुक पर डाले गए पोस्ट में कहा कि पार्टी में पुराने और कर्मठ कार्यकर्ताओं की पूछ नहीं रह गई है। दलबदलुओं को तरजीह दी जा रही है।
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